Class 6 Sanskrit Chapter 16, वृक्षाः सत्पुरुषाः इव, from NCERT Deepakam (दीपकम्), is set at a school exhibition on environment protection, where students recite subhashitas comparing trees to good people.
Class 6 Sanskrit Chapter 16 (वृक्षाः सत्पुरुषाः इव): पाठ-सार और मुख्य बिंदु
सुभाषित ‘छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे। फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव॥’ ‘दशकूपसमा वापी दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रः दशपुत्रसमो द्रुमः॥’—एक वृक्ष दस सन्तानों के बराबर है।
परोपकार श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि वृक्षों का जन्म श्रेष्ठ है, क्योंकि सज्जनों की तरह इनके पास से कोई निराश नहीं लौटता। ‘परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः। परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥’
Chapter 16 Exercises (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- सुभाषित सस्वर पढ़ें, समझें, लिखें और याद करें
- एक पद में उत्तर: वृक्षाः स्वयं कुत्र तिष्ठन्ति? परोपकाराय काः वहन्ति? दशवापीसमः कः भवति?
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FAQ
वृक्षों को सत्पुरुषों के समान क्यों कहा गया है?
वे स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों को छाया देते हैं और अपने फल भी दूसरों के लिए देते हैं।
‘दशपुत्रसमो द्रुमः’ का अर्थ?
एक वृक्ष दस पुत्रों (सन्तानों) के बराबर उपकारी है, इसलिए सबको वृक्ष लगाने चाहिए।