NCERT Class 1 Hindi Sarangi Chapter 9 आलू की सड़क (Aloo Ki Sadak) PDF (2026-27)

कक्षा 1 हिंदी सारंगी का पाठ 9 आलू की सड़क (Aloo Ki Sadak) (इकाई 3: हमारा खान-पान, लेखक: चंदन यादव) नानी के घर जाते भालू की मज़ेदार कहानी है— जिसके फटे बोरे से रास्ते भर ‘धप्प-धप्प’ आलू गिरते जाते हैं और पेड़ पर बैठा बंदर आलुओं के निशान देखकर पता लगा लेता है कि भालू किधर गया है!

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कहानी का सारांश — भालू का बोरा और आलू की सड़क: एक भालू को आलू बहुत पसंद थे। वह बोरा भरकर आलू पीठ पर रखकर नानी के घर चला, पर बोरे में छेद था। भालू आगे बढ़ता गया और बोरे से ‘धप्प! टप्प!’ आलू गिरकर सड़क पर लाइन बनती गई। बंदर ने सड़क पर पड़े आलू देखे तो समझ गया कि भालू इसी रास्ते गया है!

ध्वन्यात्मक शब्द और अनुमान: अलग-अलग चीज़ों के गिरने या चलने की आवाज़ (धप्प, टप्प, छपाक, खड़-खड़) और निशान देखकर अनुमान लगाना।

वर्ण अभ्यास (आ, ऊ, भ, ल, ड, ड़): आलू, भालू, सड़क, बोरा, बंदर शब्दों का पठन व लेखन।

Exercises in Chapter 9

  • बातचीत के लिए (पृष्ठ 58): भालू बोरे में क्या लेकर कहाँ जा रहा था? बंदर को कैसे पता चला कि भालू किधर गया है?
  • शब्दों का खेल (पृष्ठ 59–61): आलू से बनने वाली चीज़ों के नाम बताइए और ‘ल’, ‘ड़’, ‘भ’ अक्षरों वाले शब्द लिखिए।

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FAQ

सड़क पर आलू क्यों गिरते जा रहे थे?
क्योंकि भालू जिस बोरे में आलू भरकर ले जा रहा था, उसमें एक छेद था।

पेड़ पर बैठे बंदर ने कैसे पहचाना कि भालू किस रास्ते गया है?
सड़क पर एक कतार में गिरे हुए आलुओं को देखकर बंदर समझ गया कि भालू उसी रास्ते से गया है।