कक्षा 2 हिंदी सारंगी का पाठ 17 बरसात और मेंढक (Barsat Aur Mendhak) सोमा और एक प्यासे मेंढक की लोककथा है— जब तेज़ धूप से सूखा पड़ता है और सोमा अपने घड़े का बचा हुआ पानी पत्थर के नीचे बैठे मेंढक पर डाल देती है, तो मेंढक खुशी से ‘टर्र-टर्र’ गाता है और बादल झमाझम बरस पड़ते हैं!
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कहानी का सारांश — सोमा की दयालुता और बारिश: बहुत दिनों से बारिश नहीं हुई थी और खेत सूख रहे थे। सोमा दूर से घड़े में थोड़ा-सा पानी लेकर लौट रही थी तभी उसे पत्थर के नीचे गर्मी से तड़पता एक मेंढक दिखा। सोमा ने सारा पानी मेंढक पर उड़ेल दिया। मेंढक ने खुश होकर ‘टर्र-टर्र’ पुकारा और देखते ही देखते बादल घिर आए व मूसलाधार बारिश होने लगी!
जीवों के प्रति करुणा और जल संरक्षण: गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए पानी रखने और प्रकृति के चक्र को समझने की सीख।
वर्षा ऋतु के शब्द और ध्वनियाँ: बादल की गरज, बारिश की रिमझिम और मेंढक की टर्र-टर्र पर आधारित भाषा अभ्यास।
Exercises in Chapter 17
- बातचीत के लिए (पृष्ठ 78): सोमा ने अपने घड़े का पानी मेंढक पर क्यों डाल दिया और उसके बाद क्या हुआ?
- शब्दों का खेल (पृष्ठ 79–80): बारिश से जुड़े शब्द लिखिए और वाक्य पूरे कीजिए।
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FAQ
सोमा को रास्ते में पत्थर के नीचे कौन मिला?
सोमा को रास्ते में पत्थर के नीचे गर्मी और प्यास से परेशान एक मेंढक मिला।
पानी मिलने पर मेंढक ने क्या किया?
पानी मिलते ही मेंढक खुश होकर ‘टर्र-टर्र’ टर्राने लगा, जिससे बादल घिर आए और झमाझम बारिश होने लगी।