NCERT Class 2 Hindi Sarangi Chapter 24 गिरे ताल में चंदा मामा PDF (2026-27)

कक्षा 2 हिंदी सारंगी का पाठ 24 गिरे ताल में चंदा मामा (कवि: राजेश उत्साही) एक अत्यंत रोचक बाल-कविता है जिसमें बच्चे तालाब के पानी में चंदा मामा की परछाईं देखकर समझते हैं कि चंदा मामा तालाब में गिर गए हैं और मछुआरे के जाल से उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करते हैं!

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कविता का भावार्थ — तालाब में चाँद की परछाईं: गिरे ताल में चंदा मामा, सबने देखा सबने जाना! मछुआरे ने जाल फेंका ताकि चंदा मामा को बाहर निकाला जाए, पर जैसे ही पानी हिला और जाल समेटा गया, चंदा मामा कहीं गायब हो गए— क्योंकि तालाब में तो केवल चाँद की परछाईं (प्रतिबिंब) थी!

पानी में प्रतिबिंब (Reflection) की समझ: शांत पानी और आईने में दिखने वाली परछाईं तथा पानी हिलने पर परछाईं के लहरिया बनने का अनुभव।

तुकबंदी और शब्द अभ्यास: मामा-जाना, जाल-ताल, अचंभा-खंभा जैसे तुक मिलने वाले शब्द।

Exercises in Chapter 24

  • बातचीत के लिए (पृष्ठ 111): क्या चंदा मामा सचमुच तालाब में गिर गए थे? जाल समेटने पर वे कहाँ चले गए?
  • शब्दों का खेल (पृष्ठ 111): कविता में आए तुक वाले शब्द छाँटकर लिखिए।

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FAQ

तालाब के पानी में वास्तव में क्या दिखाई दे रहा था?
तालाब के शांत पानी में आकाश के चंदा मामा की परछाईं (प्रतिबिंब) दिखाई दे रही थी।

मछुआरे के जाल फेंकने पर चंदा मामा क्यों नहीं पकड़े गए?
क्योंकि पानी में असली चाँद नहीं बल्कि उसकी परछाईं थी, जो पानी के हिलते ही बिखर गई।