Class 5 Hindi Veena Chapter 10 PDF: तीन मछलियाँ (Teen Machhliyan)

कक्षा 5 हिंदी वीणा का दसवाँ पाठ तीन मछलियाँ (Teen Machhliyan) पंचतंत्र की प्रसिद्ध नीति-कथा है। एक सरोवर में रहने वाली तीन मित्र मछलियों — अनागतविधाता (भविष्य की समस्या का पहले ही हल निकालने वाली), प्रत्युत्पन्नमति (संकट आने पर तुरंत बुद्धि चलाने वाली) और यद्भविष्य (आलस्य में सब कुछ भाग्य पर छोड़ने वाली) — के माध्यम से यह कहानी समय पर सही निर्णय लेने और कर्मठ बनने की सीख देती है।

What Class 5 Hindi Chapter 10 Covers

तीनों मछलियों का स्वभाव और नाम का अर्थ — अनागतविधाता दूरदर्शी थी जो आने वाले संकट का उपाय पहले ही कर लेती थी; प्रत्युत्पन्नमति तीक्ष्ण बुद्धि वाली थी जो समय पड़ने पर क्षण भर में उलझन सुलझा लेती थी; जबकि यद्भविष्य आलसी थी और ‘जो भाग्य में होगा सो होगा’ कहकर प्रयास करने से बचती थी।

मछुआरों की योजना और अनागतविधाता की दूरदर्शिता — शाम को दो मछुआरों को यह कहते सुनकर कि ‘कल सुबह हम बड़ा जाल लाकर इस सरोवर की सारी मछलियाँ पकड़ेंगे’, अनागतविधाता ने तुरंत सभा बुलाई और रात में ही अन्य समझदार मछलियों के साथ सुरक्षित दूसरे सरोवर में चली गई।

प्रत्युत्पन्नमति की सूझ-बूझ और यद्भविष्य का अंत — सुबह मछुआरों के जाल में प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य दोनों फँस गईं। प्रत्युत्पन्नमति ने तुरंत शरीर सिकोड़कर और आँखें बंद करके मरी हुई मछली का अभिनय किया; मछुआरों ने उसे मरा समझकर वापस सरोवर में फेंक दिया और उसकी जान बच गई, किंतु भाग्य के भरोसे बैठी यद्भविष्य मारी गई।

भाषा की बात — संधि/समासयुक्त नाम, मुहावरे और पहेलियाँ — संस्कृतनिष्ठ नामों का अर्थ-विश्लेषण, उपसर्ग-प्रत्यय और ‘बूझो तो जानें’ की रोचक पहेलियाँ।

Exercises in Chapter 10

  • बातचीत के लिए एवं पाठ से: तीनों मछलियों के नाम क्या थे और उनके स्वभाव में क्या अंतर था? मछुआरों की बात सुनकर अनागतविधाता ने क्या किया और प्रत्युत्पन्नमति ने जाल में फँसने पर अपनी जान कैसे बचाई?
  • सोचिए और लिखिए व भाषा की बात: यद्भविष्य की जान क्यों नहीं बच सकी? इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है—अपने शब्दों में लिखिए।

Read Class 5 Hindi Chapter 10 Online

More Chapters

FAQ

तीन मछलियों के नाम क्या थे और उनके नामों का क्या अर्थ है?
पहली मछली ‘अनागतविधाता’ (आने वाले संकट का पहले से उपाय करने वाली), दूसरी ‘प्रत्युत्पन्नमति’ (मौके पर तुरंत बुद्धि से काम लेने वाली) और तीसरी ‘यद्भविष्य’ (जो होगा देखा जाएगा मानकर भाग्य के भरोसे बैठने वाली) थी।

प्रत्युत्पन्नमति ने मछुआरों के जाल से अपनी जान कैसे बचाई?
यह समझकर कि मछुआरों को केवल जीवित मछलियाँ चाहिए, प्रत्युत्पन्नमति ने अपना शरीर सिकोड़ लिया और आँखें बंद करके निर्जीव (मरी हुई) जैसी पड़ गई, जिससे मछुआरों ने उसे सरोवर में वापस फेंक दिया।