Class 6 Hindi Chapter 7 PDF: जलाते चलो (Jalate Chalo) (Malhar)

Class 6 Hindi (Malhar) Chapter 7, जलाते चलो (Jalate Chalo), सुप्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (Dwarika Prasad Maheshwari) की प्रेरणादायी कविता है, जो विज्ञान की चकाचौंध के बीच मानवीय प्रेम, करुणा और आशा के ‘स्नेह-भरे दिये’ निरंतर जलाए रखने का संदेश देती है।

What Class 6 Hindi Chapter 7 Covers

स्नेह के दिये बनाम बिना स्नेह के विद्युत-दिये (Lamps of Love vs Loveless Electric Lights) कवि कहते हैं कि आज विज्ञान में इतनी शक्ति है कि वह अमावस को पूर्णिमा-सा चमका दे, फिर भी विश्व में नफ़रत और स्वार्थ का अँधेरा छाया है क्योंकि बिजली के दियों में ‘स्नेह’ (तेल/प्रेम) नहीं है—केवल प्रेम और करुणा के दिये ही मानवता को सच्चा पथ दिखा सकते हैं।

तिमिर की चुनौती तथा दिये और तूफ़ान की शाश्वत कहानी (Overcoming Darkness) प्रथम बार मिट्टी का दीप जलाकर मनुष्य ने अंधकार (तिमिर) की चुनौती स्वीकार की थी; भले ही तूफ़ानों ने अनगिनत दीप बुझाए हों, किंतु जब तक धरती पर स्नेह का एक भी दिया जलता रहेगा, तब तक निशा को सवेरा अवश्य मिलेगा।

Exercises in Chapter 7

  • मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा और सोच-विचार के लिए।
  • अनुमान या कल्पना से, शब्दों के रूप / भाषा की बात, आज की पहेली और पाठ से आगे।

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FAQ

What are the two meanings of the word ‘Sneh’ (स्नेह) in the poem ‘Jalate Chalo’?
‘Sneh’ means both oil (तेल) needed to keep an earthen lamp burning and love/affection (प्रेम व अपनापन) needed in human hearts to remove hatred from the world.

Why does the poet say that electric lamps cannot show the true path?
Because electric lamps burn without ‘sneh’ (oil/love); scientific progress without human compassion, empathy and brotherhood cannot dispel moral darkness from society.