Class 6 Sanskrit Chapter 1, वयं वर्णमालां पठामः, opens Deepakam, NCERT’s current Class 6 Sanskrit textbook that replaced Ruchira Bhag 1. It teaches the Sanskrit alphabet: vowels, consonants and how they combine.
Class 6 Sanskrit Chapter 1 (वयं वर्णमालां पठामः): पाठ-सार और मुख्य बिंदु
स्वर वर्ण दो प्रकार के हैं—स्वर और व्यञ्जन। स्वर भी दो प्रकार के: समानाक्षर (अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ) और सन्ध्यक्षर (ए ऐ ओ औ), जो दो स्वरों की सन्धि से बनते हैं। ‘ऌ’ का दीर्घ नहीं होता और सन्ध्यक्षरों का ह्रस्व नहीं होता। मुख के साथ नासिका से बोले जाने वाले स्वर अनुनासिक कहलाते हैं (अँ, आँ…)।
व्यञ्जन और गुणिताक्षर व्यञ्जन बोलने के लिए ‘अ’ जोड़ा जाता है (क् + अ = क)। व्यञ्जन के चार भेद: स्पर्श (क-वर्ग से प-वर्ग, पाँच वर्ग), अन्तःस्थ (य र ल व, ‘अर्धस्वर’), ऊष्म (श ष स ह) और अयोगवाह (अनुस्वार, विसर्ग)। व्यञ्जन के साथ स्वरों के योग से गुणिताक्षर (बारहखड़ी) बनते हैं—क, का, कि, की…
Chapter 1 Exercises (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- चित्र देखकर नाम बोलें और लिखें
- पट्टिका से वर्णसमूह चुनकर रिक्त स्थान
- दिए गए वर्ण से शुरू होने वाले पद
- अपने परिवार के सदस्यों के पूरे नाम संस्कृत में
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FAQ
संस्कृत में स्वर कितने प्रकार के होते हैं?
दो प्रकार के—समानाक्षर (अ, इ, उ, ऋ, ऌ और उनके दीर्घ) और सन्ध्यक्षर (ए, ऐ, ओ, औ)।
अन्तःस्थ वर्णों को ‘अर्धस्वर’ क्यों कहते हैं?
क्योंकि य, र, ल, व कई बार स्वरों के स्थान पर आते हैं, जैसे यदि + अपि = यद्यपि, सु + आगतम् = स्वागतम्।