कक्षा 4 हिंदी वीणा का तीसरा पाठ कवि हरीश निगम की सुंदर कविता नीम (Neem) है, जो नीम के पेड़ के औषधीय गुणों, वायु-शुद्धिकरण और निस्वार्थ परोपकार का गान करती है; साथ ही पूरक पाठ भाँति-भाँति की पत्तियाँ विभिन्न पेड़-पौधों की पत्तियों के अनोखे आकारों से परिचित कराता है।
What Class 4 Hindi Chapter 3 Covers
नीम — बिना डॉक्टर के रोग भगाने वाला परोपकारी वृक्ष लहराता-बलखाता नीम चिड़िया, कौआ और तोते से स्नेह जताता है, प्रदूषित वायु को शुद्ध बनाता है, अनेक रोगों को दूर करता है और स्वयं कड़वा होकर भी हमें मन को मीठा रखने तथा बिना कुछ लिए सबको बाँटने की सीख देता है।
पूरक पठन — ‘भाँति-भाँति की पत्तियाँ’ विविध पत्तियों का परिचय: छह फीट लंबी हाथीकान (कोलोकेसिया) पत्ती, नाखून से भी छोटी इमली की पत्ती, तारे जैसी पपीते की पत्ती, हृदय के आकार की पीपल की पत्ती, पंखे जैसी नारियल की पत्ती, पंजे जैसी सेमल की पत्ती, ऊँट के खुर जैसी कचनार की पत्ती और थाली जैसे केले के पत्ते।
Exercises in Chapter 3
- बातचीत के लिए, पाठ के भीतर / सोचिए और लिखिए बोध प्रश्न।
- भाषा की बात, अनुमान और कल्पना एवं रचनात्मक गतिविधियाँ।
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FAQ
‘नीम’ कविता के कवि कौन हैं और नीम हमें क्या सिखाता है?
‘नीम’ कविता के कवि हरीश निगम हैं। नीम हमें सिखाता है कि भले ही बाहर से कड़वाहट हो, हमें अपना मन मीठा रखना चाहिए और बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की भलाई करनी चाहिए।
पीपल, पपीते और कचनार की पत्तियों का आकार कैसा होता है?
पीपल की पत्तियाँ मनुष्य के हृदय (दिल) के आकार की, पपीते की पत्तियाँ तारे के आकार की और कचनार की पत्तियाँ ऊँट के पैरों के समान होती हैं।