Class 5 Hindi Veena Chapter 2 PDF: न्याय की कुर्सी (Nyay Ki Kursi)

कक्षा 5 हिंदी वीणा का दूसरा पाठ न्याय की कुर्सी (Nyay Ki Kursi) ऐतिहासिक नगरी उज्जैन की प्रसिद्ध लोककथा पर आधारित है। मैदान के एक टीले पर बैठकर खेल-खेल में अचूक न्याय करने वाले बालक से लेकर भूमि के नीचे दबे राजा विक्रमादित्य के चमत्कारी सिंहासन और देवदूतों की परीक्षा तक यह कहानी निष्पक्ष न्याय और निर्मल हृदय का संदेश देती है।

What Class 5 Hindi Chapter 2 Covers

उज्जैन के टीले पर बालक का अद्भुत न्याय — उज्जैन के बाहर मैदान में खेलते हुए एक लड़का टीले की चिकनी शिला पर बैठकर राजा बनता है और साथियों की फरियाद सुनकर इतना सटीक फैसला सुनाता है कि गाँव के किसान भी अपने असली झगड़े सुलझाने उसी के पास आने लगते हैं।

राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की खोज — जब उज्जैन का राजा स्वयं मैदान में आकर देखता है कि बीमार लड़के की जगह बैठा दूसरा बालक भी वैसा ही बुद्धिमानी भरा न्याय कर रहा है, तो टीले की खुदाई कराई जाती है। वहाँ से चार देवदूतों की मूर्तियों वाला प्राचीन सम्राट विक्रमादित्य का सिंहासन निकलता है।

देवदूतों की चेतावनी और आत्मपरीक्षण — जब राजा दरबार में उस सिंहासन पर बैठने लगता है, तो सिंहासन के देवदूत उसे रोककर पूछते हैं कि क्या वह मन, वचन और कर्म से विक्रमादित्य जैसा निष्पक्ष, निर्लोभी और बच्चों जैसा निष्कपट है? अंततः देवदूत सिंहासन को लेकर आकाश में उड़ जाते हैं।

भाषा की बात — मुहावरे, विशेषण और शब्द-युग्म — पाठ में प्रयुक्त मुहावरों (दंग रह जाना, लोहा मानना, होश उड़ना), शब्द-युग्मों (इधर-उधर, लंबा-चौड़ा, लाव-लश्कर) और विशेषण-विशेष्य का अभ्यास।

Exercises in Chapter 2

  • बातचीत के लिए एवं पाठ से: दोनों किसानों ने अपना झगड़ा सुलझाने के लिए दरबार के बजाय लड़के को क्यों चुना? राजा को कैसे पता चला कि चमत्कार लड़के में नहीं बल्कि पत्थर की कुर्सी में था?
  • सोचिए और लिखिए व भाषा की बात: राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की विशेषताएँ लिखिए, मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए और सच्चे न्यायकर्ता के गुणों पर चर्चा कीजिए।

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FAQ

टीले की खुदाई करने पर उसके नीचे से क्या निकला?
टीले की खुदाई करने पर उसके नीचे से चार देवदूतों की सुंदर मूर्तियों से सजा सम्राट विक्रमादित्य का प्राचीन सिंहासन निकला।

राजा विक्रमादित्य के सिंहासन पर उज्जैन का राजा क्यों नहीं बैठ पाया?
क्योंकि उस सिंहासन पर केवल वही व्यक्ति बैठने का अधिकारी था जिसका मन टीले पर खेलने वाले बालक की तरह पूरी तरह निष्कपट, न्यायप्रिय और अहंकार-रहित हो।