कक्षा 5 हिंदी वीणा का सातवाँ पाठ मेरा बचपन (Mera Bachpan) कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद के बचपन की मधुर यादों पर आधारित एक आत्मीय संस्मरण है। इसमें गाँव का सादा जीवन, चचेरे भाई हलधर के साथ मटर-जौ का चबेना खाते हुए पढ़ने जाना, रामलीला के पात्रों की सजावट और भारतीय खेल ‘गुल्ली-डंडा’ का अद्भुत आकर्षण जीवंत हो उठा है।
What Class 5 Hindi Chapter 7 Covers
गाँव की सादगी और मौलवी साहब की पाठशाला — लेखक अपने आठ वर्ष की आयु के दिनों को याद करते हैं—कच्चा घर, पुआल का बिछौना, आम के पेड़ों पर चढ़ना, और सुबह मटर व जौ का चबेना लेकर दो साल बड़े चचेरे भाई हलधर के साथ पास के गाँव में पढ़ने जाना।
रामलीला का उल्लास — घर के पास ही रामलीला मैदान था और पात्रों का मेकअप (रूप-रंग) पड़ोस के मकान में होता था। लेखक दोपहर दो बजे से ही वहाँ बैठ जाते और दौड़-दौड़कर उत्साह से पात्रों की सेवा व छोटे-मोटे काम करते थे।
गुल्ली-डंडा — सब खेलों का राजा — लेखक गुल्ली-डंडा को सब खेलों का राजा मानते हैं। महँगे विलायती खेलों (जैसे क्रिकेट या टेनिस) के विपरीत गुल्ली-डंडा में न लॉन की जरूरत होती है, न कोर्ट या महँगे बल्ले की—बस पेड़ की टहनी से गुल्ली-डंडा बनाया और अमीर-गरीब का भेद भुलाकर मित्रों के साथ खेल शुरू हो गया।
भाषा की बात — संस्मरण विधा, देशी खेल और खान-पान — चबेना, पयाल, थापी, विलायती जैसे शब्दों का परिचय, पारंपरिक भारतीय खेलों का महत्व और प्राथमिक चिकित्सा पेटी (First-Aid Box) की जानकारी।
Exercises in Chapter 7
- बातचीत के लिए एवं पाठ से: लेखक और हलधर सुबह नाश्ते में क्या खाते थे? लेखक को रामलीला में क्या काम करने में आनंद आता था? लेखक ने गुल्ली-डंडा को ‘सब खेलों का राजा’ क्यों कहा है?
- समझ और अनुभव व भाषा की बात: पारंपरिक भारतीय खेलों और आधुनिक महँगे खेलों की तुलना कीजिए, पाठ में आए मुहावरों का अर्थ लिखिए और अपने बचपन की किसी यादगार घटना का वर्णन कीजिए।
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FAQ
‘मेरा बचपन’ पाठ में लेखक ने गुल्ली-डंडा को सब खेलों का राजा क्यों बताया है?
क्योंकि गुल्ली-डंडा खेलने के लिए किसी महँगे मैदान, कोर्ट या सामान की आवश्यकता नहीं होती; पेड़ की टहनी से बिना पैसे खर्च किए गुल्ली-डंडा बन जाता है और इसमें अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं रहता।
बचपन में लेखक अपने किस भाई के साथ पढ़ने जाते थे?
लेखक अपने से दो वर्ष बड़े चचेरे भाई ‘हलधर’ के साथ दूसरे गाँव में मौलवी साहब के पास पढ़ने जाते थे।