Class 5 Hindi Veena Chapter 9 PDF: न्याय (Nyay)

कक्षा 5 हिंदी वीणा का नौवाँ पाठ न्याय (Nyay) कपिलवस्तु के दयालु राजकुमार सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) के जीवन की प्रसिद्ध घटना पर आधारित एक प्रभावशाली एकांकी नाटक है। जब चचेरा भाई देवदत्त बाण मारकर एक निर्दोष हंस को घायल कर देता है और सिद्धार्थ उसकी प्राण-रक्षा करते हैं, तब महाराजा शुद्धोदन के दरबार में यह अमर न्याय होता है कि ‘मारने वाले से बचाने वाले का अधिकार बड़ा होता है।’

What Class 5 Hindi Chapter 9 Covers

राज-उद्यान का शांत वातावरण और घायल हंस — संध्या समय कपिलवस्तु के राज-उद्यान में राजकुमार सिद्धार्थ अपने सखा से पशु-पक्षियों के वात्सल्य की चर्चा कर रहे होते हैं, तभी देवदत्त के बाण से बिंधा एक लहूलुहान हंस आकाश से गिरता है। सिद्धार्थ तुरंत कोमलता से बाण निकालकर उसके घाव धोते हैं और उसे अपने हृदय से लगा लेते हैं।

देवदत्त और सिद्धार्थ का विवाद — देवदत्त धनुष लिए वहाँ आता है और दावा करता है कि हंस उसका शिकार है क्योंकि उसने उसे बाण से गिराया है। सिद्धार्थ शांत किंतु दृढ़ स्वर में कहते हैं कि यह जीवित हंस उनकी शरण में आया है और उन्होंने इसके प्राण बचाए हैं, इसलिए वे इसे किसी कीमत पर नहीं सौंपेंगे।

महाराजा शुद्धोदन के दरबार में न्याय — विवाद बढ़ने पर मामला महाराजा शुद्धोदन के राजदरबार में पहुँचता है। मंत्री और सभासद दोनों पक्षों के तर्क सुनते हैं। अंततः जब हंस को आसन पर रखा जाता है, तो वह देवदत्त से डरकर करुणामयी सिद्धार्थ की गोद में चला जाता है, और दरबार निर्णय सुनाता है कि जीव पर प्राण बचाने वाले रक्षक का ही अधिकार होता है।

भाषा की बात — नाट्य-संवाद, विराम-चिह्न और विलोम शब्द — एकांकी के रंगमंच निर्देश, पात्र-परिचय, संवाद-अभिनय तथा दया/क्रूरता, रक्षक/भक्षक जैसे विलोम शब्दों का अभ्यास।

Exercises in Chapter 9

  • बातचीत के लिए एवं सोचिए और लिखिए: देवदत्त और सिद्धार्थ ने हंस पर अपना-अपना अधिकार जताने के लिए क्या तर्क दिए? अंत में हंस सिद्धार्थ को क्यों मिला?
  • अनुमान और कल्पना व भाषा की बात: यदि आप महाराजा शुद्धोदन के स्थान पर होते तो क्या निर्णय देते? नाटक का कक्षा में मंचन कीजिए और पेयजल व पक्षी-संरक्षण गतिविधि पूरी कीजिए।

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FAQ

‘न्याय’ एकांकी में हंस को किसने घायल किया था और किसने बचाया?
हंस को सिद्धार्थ के चचेरे भाई देवदत्त ने बाण मारकर घायल किया था और राजकुमार सिद्धार्थ ने बाण निकालकर व औषधि लगाकर उसके प्राण बचाए थे।

राजदरबार में हंस के विवाद का क्या निर्णय हुआ?
दरबार में यह न्याय हुआ कि किसी जीव को मारने वाले की अपेक्षा उसके प्राण बचाने वाले रक्षक का अधिकार अधिक होता है, इसलिए हंस राजकुमार सिद्धार्थ को दिया गया।