Ganga Class 9 Chapter 10 PDF: भारति, जय, विजयकरे! – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (काव्य खंड)

Ganga Class 9 Hindi Chapter 10, भारति, जय, विजयकरे! (Bharati, Jay, Vijaykare!) by Chhayavad poet सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, is a stirring patriotic invocation depicting Mother India crowned by the snowy Himalayas, garlanded by the Ganga, and having her feet washed by the roaring ocean.

Ganga Class 9 Chapter 10 (भारति, जय, विजयकरे!): पाठ का सार और मुख्य बिंदु

भारतमाता का विराट प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप कविता में भारतमाता को सुनहरी फसलों और कमल को धारण करने वाली (‘कनक-शस्य-कमलधरे’), लंका रूपी शतदल कमल पर चरण रखने वाली, वन-लताओं के वस्त्र पहनने वाली और हिम-तुषार का मुकुट धारण करने वाली देवी के रूप में चित्रित किया गया है।

प्रणव ओंकार की ध्वनि कवि भारतमाता के प्राणों में प्रणव ‘ओंकार’ की गूँज और ज्ञान व विजय की कामना करता है; पाठ में सह-पठन के रूप में मैथिलीशरण गुप्त की ‘जय जय भारतमाता’ कविता भी दी गई है।

कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (1899–1961) अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते निराला की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं।

Read Ganga Class 9 Chapter 10 PDF Online

More Chapters

FAQ

‘भारति, जय, विजयकरे!’ कविता में भारतमाता का मुकुट और हार किसे बताया गया है?
शुभ्र बर्फ से ढके हिमालय को भारतमाता का मुकुट और गंगा की उज्ज्वल जलधारा को उनके गले का हार बताया गया है।

इस पाठ में सह-पठन के रूप में कौन-सी कविता दी गई है?
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘जय जय भारतमाता’।