Ganga Class 9 Hindi Chapter 2, क्या लिखूँ? (Kya Likhun?) by पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, is a witty and thoughtful personal essay (ललित निबंध) on the art of essay writing, contrasting youthful optimism with the nostalgia of old age through two topics: ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ and ‘समाज-सुधार’.
Ganga Class 9 Chapter 2 (क्या लिखूँ?): पाठ का सार और मुख्य बिंदु
निबंध-रचना का रहस्य और ए.जी. गार्डिनर का प्रसंग लेखक अंग्रेजी निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के कथन (‘असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं—उसी तरह मन के भाव ही यथार्थ वस्तु हैं, विषय नहीं’) से बात शुरू करते हैं और नमिता व अमिता के लिए दो आदर्श निबंध लिखने की प्रक्रिया का रोचक वर्णन करते हैं।
दूर के ढोल सुहावने और समाज-सुधार निबंध में यह दिखाया गया है कि तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल होता है और वृद्धों के लिए अतीत गौरवमय, इसलिए दोनों को ‘दूर के ढोल सुहावने’ लगते हैं और समाज-सुधार की चर्चा हर युग में चलती रहती है।
लेखक परिचय: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (1894–1971) छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में जन्मे बख्शी जी ने ‘सरस्वती’ और ‘छाया’ पत्रिकाओं का संपादन किया; ‘पंच-पात्र’, ‘पद्म-वन’ और ‘प्रबंध पारिजात’ उनके प्रसिद्ध निबंध-संग्रह हैं।
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FAQ
‘क्या लिखूँ?’ पाठ की विधा क्या है और इसके लेखक कौन हैं?
यह एक ललित एवं विचारात्मक निबंध है, जिसके लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।
नमिता और अमिता ने लेखक से किन दो विषयों पर निबंध लिखने को कहा?
नमिता ने ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और अमिता ने ‘समाज-सुधार’ विषय पर आदर्श निबंध लिखने का आग्रह किया।