Ganga Class 9 Chapter 8 PDF: पद – रैदास (काव्य खंड)

Ganga Class 9 Hindi Chapter 8, पद (Pad) by Sant रैदास (Ravidas), opens the Kavya Khand of the new Class 9 Hindi book with two devotional Brajbhasha padas celebrating unbreakable devotion, inner purity and human equality.

Ganga Class 9 Chapter 8 (पद): पाठ का सार और मुख्य बिंदु

प्रथम पद: ‘अब कैसे छूटै राम रट लागी’ पहले पद में कवि ने ईश्वर और भक्त के अभिन्न संबंध को छह सुंदर उपमाओं से स्पष्ट किया है: प्रभु चंदन हैं तो भक्त पानी, प्रभु घन (बादल) तो भक्त मोर, प्रभु चंद्रमा तो भक्त चकोर, प्रभु दीपक तो भक्त बाती, प्रभु मोती तो भक्त धागा, और प्रभु स्वामी तो भक्त दास।

द्वितीय पद: ‘जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ’ दूसरे पद में रैदास बाह्य आडंबर, तीर्थ और व्रत से ऊपर उठकर प्रभु के चरण-कमलों में अनन्य विश्वास व्यक्त करते हैं—‘तुम सौ तोरि कवन सौं जोरौ’।

कवि परिचय: संत रैदास (1388–1518) काशी में जन्मे संत रविदास (रैदास) की रचनाएँ ‘रैदास बानी’ तथा ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ में संकलित हैं।

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FAQ

रैदास ने पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना किन-किन वस्तुओं से की है?
चंदन-पानी, बादल-मोर, चाँद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा और सोना-सुहागा से।

रैदास की काव्य-भाषा की क्या विशेषता है?
उनकी भाषा सरल व व्यावहारिक ब्रजभाषा है जिसमें अवधी, राजस्थानी और खड़ी बोली के शब्दों का सहज मेल है।