Sharada Class 9 Sanskrit Chapter 10, णमो अरिहन्ताणम् (Namo Arihantanam), tells the story of King Nabhi, Queen Marudevi and their wise son Rishabhadeva (राजा ऋषभदेवः), who established law, agriculture, crafts and social harmony before taking the path of renunciation and non-violence.
Sharada Class 9 Chapter 10 (णमो अरिहन्ताणम्): पाठ-सार और मुख्य बिंदु
महाराज नाभि और ऋषभ का राज्याभिषेक जब समाज में दुर्भिक्ष और परस्पर कलह उत्पन्न हुए, तब महाराज नाभि ने सर्वगुणसम्पन्न राजकुमार ऋषभ को राज्यभार सौंपा; ऋषभदेव ने कौशलपूर्वक विनिता (अयोध्या) नगरी का निर्माण और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित की।
अहिंसा, तप और अरिहन्त पद प्रजा को कृषि, शिल्प और जीवन-विद्या सिखाने के पश्चात ऋषभदेव ने राज्य का त्याग कर कठोर तप किया और ‘अरिहन्त’ (आंतरिक शत्रुओं—राग, द्वेष, मोह—को जीतने वाले) कहलाए।
ऋषभ का राज्य महाराज नाभि और रानी मरुदेवी के पुत्र ऋषभ को अकाल और आपसी द्वेष के समय राज्य मिलता है। वे समस्या की जड़, आलस्य और कृषि की कमी, पहचानकर लोगों को खेती, तरह-तरह के भोजन बनाना और वस्त्र बुनना जैसे काम सिखाते हैं। बाद में वे ‘विनीता’ राज्य भरत को और तक्षशिला बाहुबली को सौंपकर तप के मार्ग पर चले जाते हैं।
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FAQ
राजा ऋषभदेव के माता-पिता का नाम क्या था?
उनके पिता का नाम महाराज नाभि और माता का नाम मरुदेवी था।
‘णमो अरिहन्ताणम्’ में ‘अरिहन्त’ शब्द का क्या अर्थ है?
जो काम, क्रोध, लोभ और मोह रूपी आंतरिक शत्रुओं (अरि) का नाश कर चुके हैं, उन्हें ‘अरिहन्त’ कहा जाता है।
ऋषभ ने अपने पुत्रों को कौन-से राज्य सौंपे?
भरत को ‘विनीता’ और बाहुबली को तक्षशिला।