Ganga Class 9 Hindi Chapter 11, झाँसी की रानी (Jhansi Ki Rani) by freedom fighter and poet सुभद्रा कुमारी चौहान, is Hindi literature’s most iconic heroic ballad (वीररस की कविता) recounting Rani Lakshmibai’s childhood as Manu/Chhabili, her resistance against Dalhousie’s Doctrine of Lapse, and her valorous battle in the 1857 uprising.
Ganga Class 9 Chapter 11 (झाँसी की रानी): पाठ का सार और मुख्य बिंदु
बचपन से सन् सत्तावन की क्रांति तक कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ के बरछी, ढाल और कृपाण से खेलने से लेकर झाँसी की रानी बनने, राजा गंगाधर राव के निधन और लॉर्ड डलहौजी द्वारा झाँसी को हड़पने के विरुद्ध सन् 1857 में पुरानी तलवार के चमक उठने का ओजस्वी वर्णन है।
बुंदेले हरबोलों के मुँह सुनी कहानी तेईस वर्ष की आयु में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से युद्ध करते हुए झाँसी, कालपी और ग्वालियर में अद्भुत पराक्रम दिखाया और देश की स्वाधीनता के लिए वीरगति प्राप्त की।
कवयित्री परिचय: सुभद्रा कुमारी चौहान (1904–1948) प्रयागराज में जन्मीं सुभद्रा कुमारी चौहान को उनके कविता-संग्रह ‘मुकुल’ और कहानी-संग्रह ‘बिखरे मोती’ के लिए दो बार सेकसरिया पुरस्कार मिला।
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FAQ
रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम क्या था और उनके प्रिय खेल क्या थे?
बचपन में उन्हें मनु और ‘छबीली’ कहा जाता था; नकली युद्ध, व्यूह की रचना, शिकार खेलना, सैन्य घेरना और दुर्ग तोड़ना उनके प्रिय खेल थे।
‘बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी’ पंक्ति किस कविता की है?
सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित प्रसिद्ध वीररस कविता ‘झाँसी की रानी’ की।