Sharada Class 9 Chapter 13 PDF: समासः (परिशिष्टम् २) (व्याकरण-परिशिष्टम् २)

Sharada Class 9 Sanskrit Chapter 13 (Appendix 2, ihsh113.pdf), समासः (Samasah – परिशिष्टम् २), covers Sanskrit compound formation (samasanam samāsah), explaining how two or more syntactically related subanta words combine into a single compound word.

Sharada Class 9 Chapter 13 (समासः (परिशिष्टम् २)): पाठ-सार और मुख्य बिंदु

समास की परिभाषा ‘समसनं समासः’: समसन का अर्थ है संक्षेपण। दो, तीन या अधिक अर्थयुक्त पद मिलकर एक पद बन जाते हैं, जैसे ‘महा’ और ‘पुरुष’ से ‘महापुरुषः’।

समास की शर्तें समास सुबन्त पदों में होता है, सामान्यतः एक साथ दो पदों में (सीतायाः पतिः = सीतापतिः), पर द्वन्द्व में अनेक पदों में भी (हरिश्च हरश्च गुरुश्च = हरिहरगुरवः)। समास तभी होता है जब पद परस्पर अन्वित हों: ‘सः राज्ञः पुत्रः गच्छति’ में राजपुत्रः बनता है, पर ‘भवति दर्शनं राज्ञः, पुत्रः कृषकस्य गच्छति’ में नहीं बनता।

पूर्वपद, उत्तरपद और प्रातिपदिक पहले आने वाला पद पूर्वपद और बाद वाला उत्तरपद है। समास में दोनों की विभक्ति हट जाती है (सीता + ङस् + पति + सु = सीतापति) और फिर पूरे समस्तपद से विभक्ति जुड़ती है: सीतापतिः।

विग्रह-वाक्य समस्तपद का अर्थ समझाने वाला वाक्य विग्रह कहलाता है, जैसे सीतापतिः का विग्रह ‘सीतायाः पतिः’।

समास के भेद केवल-समास और विशेष-समास; विशेष-समास के अन्तर्गत तत्पुरुष (कर्मधारय और द्विगु सहित), बहुव्रीहि, अव्ययीभाव और द्वन्द्व, सबके नियम और विग्रह के अभ्यास के साथ।

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FAQ

संस्कृत व्याकरण में ‘समासः’ का क्या अर्थ है?
‘समसनं समासः’, अर्थात् अनेक अर्थयुक्त पदों का संक्षिप्त होकर एक पद बन जाना।

विग्रह-वाक्य किसे कहते हैं?
समस्तपद का अर्थ बताने वाले वाक्य को, जैसे सीतापतिः का विग्रह ‘सीतायाः पतिः’।

क्या बिना परस्पर अन्वय वाले पदों में समास हो सकता है?
नहीं, केवल परस्पर अन्वित (सम्बद्ध) सुबन्त पदों में ही समास होता है।