Sharada Class 9 Sanskrit Chapter 14 (Appendix 3, ihsh114.pdf), वाच्यम् (Vachyam – परिशिष्टम् ३), explains active, passive and impersonal voice in Sanskrit grammar: Kartrivachya (कर्तरि प्रयोगः), Karmavachya (कर्मणि प्रयोगः) and Bhavavachya (भावे प्रयोगः).
Sharada Class 9 Chapter 14 (वाच्यम् (परिशिष्टम् ३)): पाठ-सार और मुख्य बिंदु
कर्तृवाच्यम् (Kartrivachya – Active Voice) कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रथमा विभक्ति में, कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है और क्रिया कर्ता के पुरुष व वचन के अनुसार चलती है (यथा—बालः फलं खादति)।
कर्मवाच्यम् और भाववाच्यम् (Passive & Impersonal Voice) कर्मणि प्रयोग में कर्ता तृतीया विभक्ति में, कर्म प्रथमा विभक्ति में और क्रिया कर्म के अनुसार यक् + आत्मनेपद में होती है; अकर्मक धातुओं से भाववाच्य बनता है जहाँ क्रिया सदैव प्रथम पुरुष एकवचन में रहती है।
कर्तृवाच्य के नियम कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रथमा विभक्ति में और कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है, और क्रिया कर्ता के वचन के अनुसार बदलती है, कर्म के अनुसार नहीं: बालः चित्रं पश्यति, बालौ चित्रं पश्यतः, बालाः चित्रं पश्यन्ति। पर ‘बालः फलं / फले / फलानि खादति’ में कर्म बदलने पर भी क्रिया ‘खादति’ ही रहती है। वाच्य के तीन प्रकार हैं: कर्तरि, कर्मणि और भावे प्रयोग।
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FAQ
संस्कृत में वाच्य कितने प्रकार के होते हैं?
तीन प्रकार के—१. कर्तृवाच्यम् (कर्तरि प्रयोगः), २. कर्मवाच्यम् (कर्मणि प्रयोगः), और ३. भाववाच्यम् (भावे प्रयोगः)।
कर्तृवाच्य में क्रिया किसके अनुसार बदलती है?
कर्तृवाच्य में क्रिया सदैव कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है।
कर्तृवाच्य में क्रिया किसके अनुसार बदलती है?
कर्ता के वचन के अनुसार; कर्म बदलने से क्रिया नहीं बदलती।