Class 10 Hindi Kshitij Chapter 16 नौबतखाने में इबादत: प्रश्न उत्तर एवं पाठ का सार

NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapter 16 नौबतखाने में इबादत (पाठ का सार और अभ्यास प्रश्न उत्तर): प्रसिद्ध लेखक यतींद्र मिश्र द्वारा रचित यह व्यक्तिचित्र भारत रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, संगीत साधना, सादगी और गंगा-जमुनी तहज़ीब पर आधारित है। नीचे आपको पाठ का संपूर्ण सार, मुख्य बिंदु, NCERT पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्न-उत्तर और बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अति-लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न मिलेंगे।

💬 📲 Share with Classmates & Study Groups:

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज पाठ 16 (नौबतखाने में इबादत) PDF पढ़ें और डाउनलोड करें

📥 आधिकारिक NCERT कक्षा 10 हिंदी क्षितिज पाठ 16 PDF

नवीनतम शैक्षणिक सत्र 2026–27 NCERT संस्करण • सीधे 1-क्लिक डाउनलोड • मोबाइल फ्रेंडली

1. पाठ का सार: नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र)

‘नौबतखाने में इबादत’ प्रसिद्ध संगीतप्रेमी एवं कवि यतींद्र मिश्र द्वारा लिखा गया एक आत्मीय व्यक्तिचित्र है, जिसमें शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के सादगीपूर्ण जीवन और उनकी अद्वितीय संगीत-तपस्या का सजीव चित्रण किया गया है:

1. जन्म और डुमराँव का संबंध: बिस्मिल्ला खाँ का जन्म बिहार के डुमराँव के एक प्रतिष्ठित संगीत प्रेमी मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम ‘अमीरुद्दीन’ था। डुमराँव का शहनाई से अटूट नाता है, क्योंकि शहनाई बजाने के लिए जिस ‘नरकट’ (reed) की आवश्यकता होती है, वह डुमराँव में सोन नदी के कछारों में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। उनके परदादा उस्ताद सलार हुसैन खाँ डुमराँव के निवासी थे।

2. काशी आगमन और संगीत की दीक्षा: अमीरुद्दीन छह वर्ष की उम्र में अपने ननिहाल काशी (वाराणसी) आ गए। उनके मामा सादिक हुसैन तथा अलीबख्श खाँ जाने-माने शहनाई वादक थे, जो काशी के प्रतिष्ठित बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर रियाज़ और वादन करते थे। मामाओं को शहनाई बजाते देखकर बालक अमीरुद्दीन के मन में संगीत के प्रति गहरा आकर्षण उत्पन्न हुआ। रसूलनबाई और बतूलनबाई की गायकी ने उन्हें संगीत की ओर और अधिक प्रेरित किया।

3. सादगी, सच्ची इबादत और सुर की प्रार्थना: भारत रत्न जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान और विश्वव्यापी ख्याति प्राप्त करने के बावजूद खाँ साहब जीवन भर फकीराना सादगी में रहे। वे पाँचों वक्त की नमाज़ में सजदा करके खुदा से केवल एक ही चीज़ माँगते थे—“सच्चा सुर”। उनका कहना था: “मालिक! फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सिल जाएगी, पर फटा सुर कभी नहीं सुधरता।”

4. सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी संस्कृति: बिस्मिल्ला खाँ भारत की मिली-जुली साझी संस्कृति के सबसे बड़े प्रतीक थे। वे एक सच्चे मुसलमान थे जो मुहर्रम के दस दिनों में शोक मनाते हुए आठ किलोमीटर पैदल चलकर रोते हुए शहनाई बजाते थे, वहीं दूसरी ओर काशी विश्वनाथ और संकटमोचन मंदिर में भी उसी अगाध श्रद्धा और निष्ठा से शहनाई की मंगलध्वनि गूँजाते थे। काशी और गंगा मैया उनके लिए साक्षात स्वर्ग थे।

2. NCERT पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Class 10 Kshitij)

प्रश्न 1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
उत्तर: शहनाई की दुनिया में डुमराँव को दो प्रमुख कारणों से याद किया जाता है:
1. शहनाई के महान जादूगर एवं भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में ही हुआ था।
2. शहनाई बजाने के लिए जिस ‘नरकट’ (एक प्रकार की घास/रीड) की आवश्यकता होती है, वह डुमराँव में बहने वाली सोन नदी के किनारों पर ही पाई जाती है। बिना नरकट के शहनाई की ध्वनि उत्पन्न नहीं हो सकती।

प्रश्न 2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की ‘मंगलध्वनि का नायक’ क्यों कहा गया है?
उत्तर: भारतीय परंपरा में शहनाई को मांगलिक अवसरों (जैसे विवाह, उत्सव, मंदिर पूजन) पर बजाया जाने वाला सर्वप्रमुख वाद्य माना जाता है, इसलिए इसे ‘मंगलध्वनि का वाद्य’ कहते हैं। बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई वादन में जो महारत, भाव-प्रवणता और शास्त्रीय गरिमा स्थापित की, वैसी किसी अन्य वादक ने नहीं की। उन्होंने शहनाई को लोक-वाद्य से उठाकर शास्त्रीय संगीत के सर्वोच्च मंचों पर प्रतिष्ठित किया। अतः उन्हें शहनाई की ‘मंगलध्वनि का निर्विवाद नायक’ कहा गया है।

प्रश्न 3. सुशिर-वाद्यों से क्या तात्पर्य है? शहनाई को ‘सुशिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि क्यों दी गई होगी?
उत्तर: फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों, जिनमें वायु प्रवाह के लिए छिद्र (सुरंग) होते हैं, उन्हें ‘सुशिर-वाद्य’ कहा जाता है (जैसे—बांसुरी, शहनाई, शंख, हारमोनियम आदि)।
अरब देशों में फूँककर बजाए जाने वाले वाद्यों को ‘नय’ कहा जाता है। शहनाई की सुरीली, मधुर, गंभीर और मनमोहक ध्वनि अन्य सभी फूँक वाले वाद्यों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ होती है। इसकी इसी कर्णप्रियता और मांगलिक प्रतिष्ठा के कारण इसे ‘सुशिर वाद्यों का शाह’ अर्थात ‘शाह-ने’ (शहनाई) कहा गया।

प्रश्न 4. आशय स्पष्ट कीजिए:
(क) “फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सिल जाएगी।”
उत्तर: खाँ साहब के लिए सांसारिक चमक-दमक और वस्त्राभूषण का कोई मूल्य नहीं था। उनका जीवन केवल सुर और संगीत की साधना के प्रति समर्पित था। वे ईश्वर से प्रार्थना करते थे कि उनकी लुंगी भले ही फटी रहे (जिसे सुई-धागे से सिला जा सकता है), लेकिन उनका सुर कभी फटना या बिगड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि सुर की त्रुटि को किसी भी भौतिक साधन से सुधारा नहीं जा सकता। यह कथन उनके संगीत के प्रति अद्वितीय समर्पण और निस्वार्थ निष्ठा को दर्शाता है।

(ख) “काशी में संगीत का आयोजन एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है…”
उत्तर: काशी भारतीय सनातन संस्कृति, धर्म, दर्शन और संगीत की प्राचीन नगरी है। यहाँ संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर शास्त्रीय संगीत का भव्य समारोह आयोजित होता है, जिसमें देश के शीर्ष संगीतकार अपनी कला अर्पित करते हैं। बिस्मिल्ला खाँ काशी के इस सांस्कृतिक परिवेश के अभिन्न अंग थे। यह परंपरा दर्शाती है कि काशी में कला और भक्ति परस्पर एकाकार हैं।

प्रश्न 5. काशी ने संगीत को क्या दिया और संगीत ने काशी को क्या दिया?
उत्तर: काशी ने संगीत को एक पवित्र, आध्यात्मिक वातावरण, श्रोताओं की समझ और रसूलनबाई, बतूलनबाई तथा बिस्मिल्ला खाँ जैसे अमर साधक दिए। वहीं संगीत ने काशी को अपनी मधुर तानों से अलौकिक दिव्यता, गंगा-जमुनी सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक ख्याति प्रदान की।

3. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ

चारित्रिक विशेषतापाठ से उदाहरण / प्रमाण
असीम सादगी एवं निरभिमानभारत रत्न मिलने पर भी फटी लुंगी पहनना और साधारण जीवन शैली में सहज रहना।
संगीत के प्रति अखंड साधनाअस्सी वर्ष की आयु में भी एक सच्चे शिष्य की तरह रोज़ाना घंटों रियाज़ करना और खुदा से सुर माँगना।
सच्चा धार्मिक सौहार्दमुहर्रम में शोक और आँसू बहाना तथा काशी विश्वनाथ के प्रति अटूट नमन व शहनाई वादन।
मातृभूमि व काशी से अगाध प्रेमअमेरिका में बसने के प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा देना कि “वहाँ आप गंगा मैया को कहाँ से लाओगे?”

4. बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न (High-Yield Questions)

प्रश्न 1. बिस्मिल्ला खाँ ने अपने शिष्य द्वारा फटी लुंगी पर टोकने पर क्या जवाब दिया था?
उत्तर: जब उनकी एक शिष्या ने उनसे कहा कि भारत रत्न मिलने के बाद उन्हें फटी तहमद (लुंगी) नहीं पहननी चाहिए, तो खाँ साहब हँसकर बोले—“धत्! पगली, ई भारत रत्न हमको शहनैया पे मिला है, लुंगिया पे नहीं!”

प्रश्न 2. बिस्मिल्ला खाँ के अनुसार काशी को छोड़कर कहीं और क्यों नहीं जाया जा सकता?
उत्तर: खाँ साहब का मानना था कि काशी में बाबा विश्वनाथ हैं, गंगा मैया हैं और उनके पूर्वजों का रियाज़ है। जहाँ संस्कृति और अध्यात्म का ऐसा संगम हो, उस पवित्र भूमि को छोड़कर दुनिया में कहीं भी स्वर्ग की कल्पना नहीं की जा सकती।

कक्षा 10 की अन्य महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री: NCERT Books Class 10 PDF (2026–27) · NCERT Books in Hindi Medium Hub · NCERT Solutions Class 1 to 12 · CBSE Class 10 Sample Papers.

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नौबतखाने में इबादत पाठ के लेखक कौन हैं?

नौबतखाने में इबादत पाठ के लेखक प्रसिद्ध कवि एवं कलाप्रेमी यतींद्र मिश्र हैं।

उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का वास्तविक नाम क्या था?

उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का नाम अमीरुद्दीन था, जबकि उनके बड़े भाई का नाम शमसुद्दीन था।

बिस्मिल्ला खाँ को कौन-सा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला था?

उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया गया था।

नौबतखाना किसे कहते हैं?

प्राचीन राजमहलों या धार्मिक स्थलों के मुख्य द्वार के ऊपर बने उस स्थान को नौबतखाना कहा जाता है, जहाँ मांगलिक अवसरों पर मंगल वाद्य बजाए जाते हैं।
💬 🌟 Helping a friend? Share these answers:

Leave a Reply

✅ Link copied to clipboard!
📚 Share with Classmates
WhatsApp

📑 Chapter Navigation Directory

Add as a preferred source on Google
See ncertbookspdf.com first in Google Search