Class 10 Sanskrit Chapter 10 Hindi Translation (भूकम्पविभीषिका – भूकम्प की त्रासदी): यहाँ एनसीईआरटी कक्षा 10 संस्कृत (शेमुषी भाग 2) के पाठ 10 ‘भूकम्पविभीषिका’ (Chapter 9 (Old Ch 10)) के सभी श्लोकों एवं गद्यांशों का शब्दार्थ, अन्वय, प्रसंग और सरल हिंदी अनुवाद (सरलार्थ / भावार्थ) दिया गया है।
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कक्षा 10 संस्कृत पाठ 10: भूकम्पविभीषिका – हिंदी अनुवाद (श्लोक, शब्दार्थ और सरलार्थ)
Class 10 Sanskrit Chapter 10 Hindi Translation
उत्सवे, व्यसने, दुर्भिक्षे, राष्ट्रविप्लवे, दैनन्दिनव्यवहारे च यः सहायतां करोति सः बन्धुः भवति। यदि विश्वे सर्वत्र एतादृशः भावः भवेत् तदा विश्वबन्धुत्वं सम्भवति। परन्तु अधुना निखिले संसारे कलहस्य अशान्तेः च वातावरणम् अस्ति। मानवा: परस्परं न विश्वसन्ति। ते परस्य कष्टं स्वकीयं कष्टं न गणयन्ति। अपि च समर्थाः देशाः असमर्थान् देशान् प्रति उपेक्षाभावं प्रदर्शयन्ति, तेषाम् उपरि स्वकीयं प्रभुत्वं स्थापयन्ति। संसारे सर्वत्र विद्वेषस्य, शत्रुतायाः, हिंसायाः च भावना दृश्यते। देशानां विकासः अपि अवरुद्धः भवति।
Hindi Translation:
उत्सव पर, समस्या में, आकाल में, राष्ट्र पर विपदा आने पर और प्रतिदिन के व्यवहार में जो सहायता करता है, वह दोस्त होता है। यदि विश्व में सर्वत्र इस प्रकार का भाव हो जाए तब विश्व-भाईचारा सम्भव है। परन्तु अब पूरे संसार में कलह और अशान्ति का वातावरण है। मानव आपस में विश्वास नहीं करते हैं। वे दूसरों के दुःख को अपना दुःख नहीं गिनते हैं। और समर्थ देश असमर्थ देश के प्रति अनादर भाव प्रस्तुत करते हैं, उनके ऊपर अपना प्रभुत्वं स्थापित करते हैं। संसार में सर्वत्र झगड़े की, शत्रुता की, और हिंसा की दिखती है। (इन सभी कारणों से) देशों का विकास भी अवरुद्धः होता है।
English Translation:
A friend is someone who helps in times of celebration, trouble, calamity, calamity on the nation, and in everyday life. If this kind of feeling prevails everywhere in the world, then universal brotherhood is possible. However, there is now a general sense of discord and unrest throughout the world. Humans do not trust each other. They do not count the suffering of others as their own. And the capable countries show disrespect towards the incapable countries, establish their dominion over them. There is conflict, enmity, and violence everywhere in the world. Due to all these reasons, the development of the countries is also stunted.
इयम् महती आवश्यकता वर्तते यत् एकः देश: अपरेण देशेन सह निर्मलेन हृदयेन बन्धुतायाः व्यवहारं कुर्यात्। विश्वस्य जनेषु इयं भावना आवश्यकी। ततः विकसिताविकसितयोः देशयोः मध्ये स्वस्था स्पर्धा भविष्यति। सर्वे देशाः ज्ञानविज्ञानयोः क्षेत्रे मैत्रीभावनया सहयोगेन च समृद्धिं प्राप्तुं समर्थाः भविष्यन्ति। सूर्यस्य चन्द्रस्य च प्रकाशः सर्वत्र समानरूपेण प्रसरति। प्रकृतिः अपि सर्वेषु समत्वेन व्यवहरति। तस्मात् अस्माभिः सर्वैः परस्परं वैरभावम् अपहाय विश्वबन्धुत्वं स्थापनीयम्। अतः विश्वस्य कल्याणाय एतादृशी भावना भवेत्-
Hindi Translation:
यह बड़ी आवश्यकता है कि एक देश दूसरे देश के साथ निर्मल हृदय से बन्धुता का व्यवहार करे। विश्व के लोगों में यह भावना आवश्यक है। उससे विकसित और अविकसित देशों के बीच में स्वस्थ स्पर्धा होगी। सभी देश ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में मित्रता की भावना और सहयोग के द्वारा समृद्धि को करने में समर्थ हो जाएँगे। सूर्य का और चंद्र का प्रकाश सभी जगह समानरूप से फैलता है। प्रकृति भी सभी के साथ समान रूप से व्यवहार करती है। उससे हम सभी को आपस में वैरभाव को त्याग कर विश्वबन्धुत्व की स्थापना करनी चाहिए। अतः विश्व का कल्याण के लिए ऐसी भावना होनी चाहिए-
English Translation:
There is a great need that a country should treat another country with a pure heart of fraternity. This feeling is necessary among the people of the world. This will lead to healthy competition between developed and underdeveloped countries. All countries will be able to prosper in the field of knowledge and science through the spirit of friendship and cooperation. The light of the Sun and the Moon spreads equally everywhere. Nature also treats everyone equally. With this, all of us should renounce enmity amongst ourselves and establish a universal brotherhood. Therefore, for the welfare of the world, there should be such a feeling-
शेमुषी भाग 2 के सभी पाठों का हिंदी अनुवाद (All Chapters)
| पाठ संख्या | संस्कृत पाठ का नाम (अर्थ) | हिंदी अनुवाद (Hindi Translation) | NCERT PDF |
|---|---|---|---|
| पाठ 1 (Chapter 1) | शुचिपर्यावरणम् (पवित्र पर्यावरण) | अध्याय 1: शुचिपर्यावरणम् हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 2 (Chapter 2) | बुद्धिर्बलवती सदा (बुद्धि सदैव बलवती होती है) | अध्याय 2: बुद्धिर्बलवती सदा हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 3 (Old Ch 3 (Rationalised)) | व्यायामः सर्वदा पथ्यः (व्यायाम सदा हितकारी है) | अध्याय 3: व्यायामः सर्वदा पथ्यः हिंदी अनुवाद | Book PDF |
| पाठ 4 (Chapter 3 (Old Ch 4)) | शिशुलालनम् (शिशु का दुलार / वात्सल्य) | अध्याय 4: शिशुलालनम् हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 5 (Chapter 4 (Old Ch 5)) | जननी तुल्यवत्सला (माता समान रूप से स्नेह करने वाली होती है) | अध्याय 5: जननी तुल्यवत्सला हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 6 (Chapter 5 (Old Ch 6)) | सुभाषितानि (सुन्दर वचन / मधुर वचन) | अध्याय 6: सुभाषितानि हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 7 (Chapter 6 (Old Ch 7)) | सौहार्दं प्रकृतेः शोभा (आपसी सौहार्द ही प्रकृति की शोभा है) | अध्याय 7: सौहार्दं प्रकृतेः शोभा हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 8 (Chapter 7 (Old Ch 8)) | विचित्रः साक्षी (अनोखा गवाह) | अध्याय 8: विचित्रः साक्षी हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 9 (Chapter 8 (Old Ch 9)) | सूक्तयः (सुन्दर उक्तियाँ) | अध्याय 9: सूक्तयः हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 10 (Chapter 9 (Old Ch 10)) | भूकम्पविभीषिका (भूकम्प की त्रासदी) | अध्याय 10: भूकम्पविभीषिका हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
| पाठ 11 (Old Ch 11 (Rationalised)) | प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् (प्राणों से भी प्रिय मित्र) | अध्याय 11: प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् हिंदी अनुवाद | Book PDF |
| पाठ 12 (Chapter 10 (Old Ch 12)) | अन्योक्तयः (अन्योक्तियाँ (प्रतीकात्मक उक्तियाँ)) | अध्याय 12: अन्योक्तयः हिंदी अनुवाद | NCERT PDF |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: पाठ 10 भूकम्पविभीषिका
कक्षा 10 संस्कृत पाठ 10 (भूकम्पविभीषिका) का मुख्य भाव क्या है?
कक्षा 10 संस्कृत शेमुषी भाग 2 के पाठ 'भूकम्पविभीषिका' का अर्थ है 'भूकम्प की त्रासदी'। ऊपर प्रत्येक श्लोक और गद्यांश का शब्दार्थ, अन्वय, प्रसंग तथा सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है, जो बोर्ड परीक्षा में सप्रसंग व्याख्या और प्रश्नोत्तर के लिए उपयोगी है।
कक्षा 10 संस्कृत के अन्य पाठों का हिंदी अनुवाद और PDF कहाँ मिलेगा?
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Class 10 Sanskrit Book (Hindi Medium): Shemushi 10 chapters
- Chapter 1: शुचिपर्यावरणम् — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 2: बुद्धिर्बलवती सदा — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 3: शिशुलालनम् — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 4: जननी तुल्यवत्सला — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 5: सुभाषितानि — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 6: सौहार्दं प्रकृतेः शोभा — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 7: विचित्रः साक्षी — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 8: सूक्तयः — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 9: भूकम्पविभीषिका — Read Online & Notes | Hindi Translation
- Chapter 10: अन्योक्तयः — Read Online & Notes | Hindi Translation