Sharada Class 9 Chapter 16 PDF: धातुरूपाणि (परिशिष्टम् ५) (व्याकरण-परिशिष्टम् ५)

Sharada Class 9 Sanskrit Chapter 16 (Appendix 5, ihsh116.pdf), धातुरूपाणि (Dhaturupani – परिशिष्टम् ५), gives the verb conjugation tables for Parasmaipada, Atmanepada and Ubhayapada roots across the five major lakaras along with causative (ṇic) forms.

Sharada Class 9 Chapter 16 (धातुरूपाणि (परिशिष्टम् ५)): पाठ-सार और मुख्य बिंदु

णिच्-प्रत्ययान्त (प्रेरणार्थक) प्रयोग धातु में णिच् जोड़ने से प्रेरणा का अर्थ आता है: पठ् + णिच् = पाठयति (पढ़ाता है)। लट् लकार में पाठयति, पाठयतः, पाठयन्ति; पाठयसि; पाठयामि। इसी प्रकार लेखयति, खादयति, हासयति, चालयति, स्मारयति, पाययति, नाययति, दर्शयति, गमयति, भोजयति, श्रावयति और ज्ञापयति।

परस्मैपदी धातु: पठ् के पाँच लकार लट्: पठति, पठतः, पठन्ति। लृट्: पठिष्यति, पठिष्यतः, पठिष्यन्ति। लोट्: पठतु/पठतात्, पठताम्, पठन्तु। लङ्: अपठत्, अपठताम्, अपठन्। विधिलिङ्: पठेत्, पठेताम्, पठेयुः। तीनों पुरुषों और वचनों के पूरे रूप तालिका में हैं।

आत्मनेपदी धातु वृध् (वर्धते, वर्धेते, वर्धन्ते) और लभ् जैसी आत्मनेपदी धातुओं के भी इन्हीं पाँच लकारों में रूप दिए गए हैं।

लकारों का अर्थ लट् वर्तमान काल, लृट् भविष्यत् काल, लङ् भूतकाल, लोट् आज्ञा और विधिलिङ् ‘चाहिए’ या विधि के अर्थ में प्रयुक्त होता है।

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FAQ

‘पठ्’ धातु में ‘णिच्’ प्रत्यय जोड़ने पर लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में क्या रूप बनता है?
‘पाठयति’ (पढ़ाता है)।

‘पठ्’ धातु का लङ् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन रूप क्या है?
अपठन्।

इस परिशिष्ट में धातुओं के रूप किन पाँच लकारों में दिए गए हैं?
लट्, लृट्, लोट्, लङ् और विधिलिङ्।