Class 8 Sanskrit Chapter 11, सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः), from NCERT Deepakam (दीपकम्), completes the Viravara story: to save King Shudraka, Viravara’s family offers what he loves most to the goddess Sarvamangala.
Class 8 Sanskrit Chapter 11 (सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)): पाठ-सार और मुख्य बिंदु
त्याग राजलक्ष्मी बताती है कि वीरवर अपना सबसे प्रिय वस्तु देवी सर्वमङ्गला को अर्पित करे तो राजा सौ वर्ष जिएगा। पुत्र शक्तिधर स्वयं को अर्पित करने को तैयार होता है—‘धनानि जीवितञ्चैव परार्थे प्राज्ञ उत्सृजेत्। सन्निमित्ते वरं त्यागो विनाशे नियते सति॥’ फिर वीरवर, पत्नी और पुत्री भी स्वयं को अर्पित कर देते हैं।
राजा का प्रत्युत्तर छिपकर सब देख रहा शूद्रक अपना राज्य और जीवन भी देवी को देने लगता है। प्रसन्न देवी सबको जीवित कर देती है; बाद में राजा वीरवर को समग्र कर्णाट प्रदेश देता है।
Chapter 11 Exercises (अभ्यासात् जायते सिद्धिः)
- रेखाङ्कित पदों पर प्रश्न-निर्माण
- उत्तर लिखें: प्राज्ञः धनानि जीवितञ्च केभ्यः उत्सृजेत्? केन सदृशः लोके न भूतो न भविष्यति?
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FAQ
‘सन्निमित्ते वरं त्यागः’ का अर्थ?
जब विनाश निश्चित हो, तब किसी श्रेष्ठ उद्देश्य के लिए त्याग करना ही उत्तम है।
कथा का अन्त कैसे होता है?
देवी सर्वमङ्गला राजा के त्याग से प्रसन्न होकर वीरवर के परिवार को जीवित कर देती हैं और राजा वीरवर को कर्णाट प्रदेश देता है।
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