Class 8 Sanskrit Chapter 3, सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु, from NCERT Deepakam (दीपकम्), begins with a grandmother offering her granddaughter nīti-shlokas instead of a story, and then explains each subhashita with पदच्छेद, अन्वय and भावार्थ.
Class 8 Sanskrit Chapter 3 (सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु): पाठ-सार और मुख्य बिंदु
भारतभूमि और गुण-ग्राहकता ‘गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे’—देवता भी भारत में मनुष्य रूप में जन्म लेना चाहते हैं। ‘गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः’—कोयल वसन्त का गुण जानती है, कौआ नहीं; हाथी सिंह का बल जानता है, चूहा नहीं।
परोपकारियों का स्वभाव ‘भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः’—फल आने पर पेड़ झुक जाते हैं, नए जल से भरे बादल नीचे आते हैं और समृद्धि पाकर भी सज्जन उद्धत नहीं होते। अभ्यास में ‘केन समं सख्यं न करणीयम्’ और ‘केन विना दैवं न सिध्यति’ जैसे प्रश्न भी हैं।
Chapter 3 Exercises (अभ्यासात् जायते सिद्धिः)
- एक पद में उत्तर: कः वसन्तस्य गुणं वेत्ति? मूषकः कस्य बलं न वेत्ति? फलोद्गमैः के नम्राः भवन्ति?
- पूर्ण वाक्य में उत्तर: तरवः कदा नम्राः भवन्ति? सत्पुरुषाणां स्वभावः कीदृशः भवति?
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FAQ
‘सुभाषित’ का अर्थ क्या है?
सुष्ठु भाषितानि—अच्छी तरह कहे गए, सुन्दर और हितकारी वचन। पाठ के अनुसार ये कर्तव्य-अकर्तव्य का स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं।
‘गुणी गुणं वेत्ति’ श्लोक का भाव?
गुणवान व्यक्ति ही दूसरों के गुण पहचानता है, गुणहीन नहीं; जैसे बलवान ही बल को पहचानता है।
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