DAV Board Class 3 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions
DAV Class 3 Hindi Chapter 2 Solutions चतुर कौवा
Complete authentic, textbook-accurate solutions for DAV Class 3 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 2: चतुर कौवा (Chatur Kauwa). This guide includes the poem summary, word meanings (कठिन शब्दार्थ), textbook questions & answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), discussion questions (बातचीत के लिए), grammar practice (भाषा की बात – तुकांत शब्द, विलोम शब्द, पर्यायवाची), and value-based questions (जीवन मूल्य) strictly adhering to the DAV Education Board curriculum.
| कक्षा (Class) | विषय (Subject) | पाठ्यपुस्तक (Textbook) | पाठ (Chapter) | विधा / कवि (Genre / Poet) |
|---|---|---|---|---|
| कक्षा 3 (Class 3) | हिंदी (Hindi) | भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri) | पाठ 2: चतुर कौवा | कविता (शशि पाल शर्मा) |
1. कविता का विस्तृत सार (Poem Summary)
प्रस्तुत कविता ‘चतुर कौवा’ कवि शशि पाल शर्मा द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक और रोचक बाल कविता है:
- कौवे की प्यास और बेचैनी: भीषण गर्मी के दिन एक कौवे को बहुत तेज़ प्यास लगी थी। वह पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था, लेकिन दूर-दूर तक उसे कहीं पानी नहीं मिल रहा था।
- घड़े में थोड़ा पानी: भटकते-भटकते उसकी नज़र एक बाग में रखे मिट्टी के घड़े पर पड़ी। वह खुशी-खुशी घड़े के पास पहुँचा, परंतु घड़े में पानी बहुत नीचे (पेंदे में) था। कौवे की चोंच पानी तक नहीं पहुँच सकी।
- कौवे की सूझ-बूझ और मेहनत: कौवा निराश होकर बैठा नहीं रहा और न ही उसने हिम्मत हारी। उसने अपनी अक्ल लगाई और आसपास बिखरे छोटे-छोटे कंकड़ अपनी चोंच में उठा-उठाकर घड़े में डालने शुरू किए।
- सफलता: जैसे-जैसे कंकड़ घड़े के तले में भरते गए, पानी धीरे-धीरे ऊपर आ गया। कौवे ने छककर (भरपेट) पानी पिया और अपनी प्यास बुझाकर खुशी से उड़ गया।
- निष्कर्ष (सीख): ‘मेहनत से ही काम बनते हैं, केवल सोचने या रोने से नहीं।’ कौवे ने अपनी समझदारी और परिश्रम से असम्भव काम को भी सम्भव कर दिखाया।
2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
| कठिन शब्द | अर्थ (Meaning in Hindi) |
|---|---|
| भटकना | इधर-उधर घूमना / रास्ता न मिलना |
| घड़ा | मिट्टी का मटका |
| निज | अपना / स्वयं का |
| कंकड़ | छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़े |
| युक्ति | उपाय / तरकीब / उपाय सूझना |
| छककर | भरपेट / पूरी तरह संतुष्ट होकर |
| चतुर | चालाक / होशियार / समझदार |
3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Textbook Questions and Answers)
प्रश्न 1. कौवा इधर-उधर क्यों भटक रहा था?
उत्तर: कौवा बहुत प्यासा था, इसलिए वह अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की खोज में इधर-उधर भटक रहा था।
प्रश्न 2. कौवे ने घड़े में क्या देखा?
उत्तर: कौवे ने देखा कि घड़े में बहुत थोड़ा-सा पानी था, जो घड़े के पेंदे में होने के कारण उसकी चोंच की पहुँच से बहुत दूर था।
प्रश्न 3. पानी तक पहुँचने के लिए कौवे ने क्या उपाय (तरकीब) निकाला?
उत्तर: पानी तक पहुँचने के लिए चतुर कौवे ने आसपास से छोटे-छोटे कंकड़ अपनी चोंच में उठाकर घड़े में डाले, जिससे पानी ऊपर आ गया।
प्रश्न 4. ‘चतुर कौवा’ कविता से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस कविता से हमें यह महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य, समझदारी और कठिन परिश्रम से समस्या का हल निकालना चाहिए।
4. बातचीत के लिए (Discussion Questions)
प्रश्न 1. यदि कौवे को घड़े के आसपास कंकड़ न मिलते, तो वह पानी पीने के लिए क्या करता?
उत्तर: यदि कौवे को कंकड़ न मिलते, तो वह किसी नली (स्ट्रॉ), सूखी लकड़ी या पत्ते की सहायता लेने का प्रयास करता, अथवा किसी अन्य स्थान पर जलस्रोत की तलाश करता।
प्रश्न 2. क्या आपने कभी किसी पक्षी या पशु की समझदारी देखी है? अपनी कक्षा में बताइए।
उत्तर: हाँ, मैंने एक बार बंदर को नल की टोंटी घुमाकर पानी पीते और पानी पीने के बाद नल बंद करते देखा है। इसी प्रकार पक्षी भी धूप से बचने के लिए घने पेड़ों की छाँव में घोंसला बनाते हैं।
5. भाषा की बात (Grammar Practice)
प्रश्न 1. समान तुक वाले शब्द (Rhyming Words) लिखिए:
- (क) घड़ा → खड़ा / बड़ा
- (ख) पानी → नानी / रानी
- (ग) दूर → चूर / नूर
- (घ) लाया → पाया / खाया
प्रश्न 2. उल्टे अर्थ वाले शब्द (विलोम शब्द) लिखिए:
| शब्द | विलोम शब्द (Opposite) |
|---|---|
| दूर | पास |
| थोड़ा | बहुत |
| ऊपर | नीचे |
| चतुर | मूर्ख |
प्रश्न 3. दो-दो पर्यायवाची शब्द (समानार्थी शब्द) लिखिए:
- (क) कौवा: काग, काक
- (ख) पानी: जल, नीर
- (ग) पेड़: तरु, वृक्ष
- (घ) बाग: उपवन, बगीचा
6. जीवन मूल्य (Values and Life Skills)
प्रश्न: “परिश्रम और बुद्धि के बल पर हम कठिन से कठिन कार्य में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। अपने जीवन का कोई उदाहरण दीजिए जब आपने समझदारी से किसी समस्या को हल किया हो।”
उत्तर: बुद्धि और मेहनत से हर मुश्किल हल हो जाती है। एक बार मेरी गेंद सोफे के पीछे संकरी जगह में गिर गई थी जहाँ मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा था। मैंने रोने या परेशान होने के बजाय एक लंबी झाड़ू के डंडे से गेंद को धीरे-धीरे आगे खिसकाया और बाहर निकाल लिया। इसी प्रकार हमें भी शांत मन से उपाय सोचना चाहिए।
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