कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 3, संख्याओं की कहानी: यह अध्याय संख्याओं और उनकी निरूपण पद्धतियों के ऐतिहासिक विकास के बारे में है, जिसकी शुरुआत रीमा द्वारा पुरानी पुस्तक से उड़कर गिरे एक पन्ने पर बने अजीब प्रतीकों को देखकर उठने वाली जिज्ञासा और उसके पिताजी द्वारा लगभग 4000 वर्ष पूर्व मेसोपोटेमिया (इराक) में अंक लिखने के तरीके की कहानी से होती है। इसमें पत्थरों, छड़ियों, शरीर के अंगों, पापुआ न्यू गिनी की जनजातियों, मिस्र के प्रतीकों, रोमन, माया, चीनी तथा हिंदू-अरबी संख्या पद्धति के ऐतिहासिक उदाहरणों के ज़रिए गणना के विकास को समझाया गया है।
कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 3 (संख्याओं की कहानी): मुख्य बिंदु
3.1 रीमा की जिज्ञासा और गणना की क्रियाविधि लगभग 4000 वर्ष पूर्व मेसोपोटेमिया (इराक) के लोग विशेष प्रतीकों का प्रयोग करते थे, तथा प्राचीन काल में भेड़ों की गिनती के लिए एक-एक छड़ी या कंकड़ रखने की एकैकी प्रतिचित्रण विधि अपनाई जाती थी। यूरोप में लंबे समय तक रोमन संख्या पद्धति (जैसे I, V, X) प्रचलित रही, परंतु बड़ी संख्याओं के लिए इसमें अत्यधिक प्रतीकों की आवश्यकता पड़ती थी।
3.2 कुछ प्रारंभिक संख्या पद्धतियाँ पापुआ न्यू गिनी के जनसमुदाय गिनती के लिए शरीर के अंगों का उपयोग करते हैं तथा ऑस्ट्रेलिया के गुमेलगुल आदिवासी केवल दो शब्दों ‘उरापोन’ (1) और ‘उकासर’ (2) के संयोजन से 2 की बारी-बारी गणना करते थे। इसके अलावा गणना को सुगम बनाने के लिए 5 या उससे अधिक वस्तुओं के समूह को एक नए प्रतीक से निरूपित करने की परंपरा शुरू हुई।
3.3 आधार की अवधारणा और मिस्र की संख्या पद्धति मिस्रवासियों ने लगभग 3000 सामान्य संवत पूर्व आधार-10 (दशमलव) सांकेतिक संख्या पद्धति विकसित की, जिसमें अगली सांकेतिक संख्या n से गुणा करके प्राप्त की जाती है। 11वीं शताब्दी में रोमन अंकों का उपयोग करने वाले लोग दशमलव पद्धति पर आधारित अबेकस (रेखाओं वाले बोर्ड) का प्रयोग गणना और 10 की घातों में समूहन के लिए करते थे।
3.4 स्थानीय मान निरूपण प्राचीन मेसोपोटेमिया में आधार-60 (षष्टिक) पद्धति और मध्य अमेरिका की माया सभ्यता में आधार-20 की स्थानीय मान पद्धति के साथ ‘0’ के लिए सीप जैसे प्रतीक का प्रयोग किया जाता था। चीनी छड़ संख्यांकों में ‘जोंग’ और ‘हेंग’ प्रतीकों का उपयोग होता था, जबकि हिंदू संख्या पद्धति में 0 से 9 तक के 10 अंकों और एकल अंक स्थानीय मान के कारण कोई अस्पष्टता नहीं रहती।
अध्याय 3 के अभ्यास
- विद्यार्थी छड़ियों या वर्णों की श्रृंखला (जैसे 27 के लिए ‘aa’) का उपयोग करके बिना अंकों के जोड़, घटाव, गुणा, भाग करने और अपनी स्वयं की संख्या पद्धति बनाने का अभ्यास करते हैं।
- छात्र मिस्र की संख्या पद्धति में 10458 और 1023 जैसी संख्याओं को लिखने तथा आधार-5 व आधार-7 पद्धति के प्रतीकों में संख्याओं (जैसे 15, 50, 137) को निरूपित करने का अभ्यास करते हैं।
- छात्र चीन के जोंग और हेंग प्रतीकों के एकांतर प्रयोग, उकासर-उरापोन से आधार-2 पद्धति बनाने, तथा 10 की जगह 8 उँगलियाँ होने पर आधार-8 में संख्या 25 को लिखने का अभ्यास करते हैं।
कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 3 के प्रश्न-उत्तर (हल)
प्रश्न 1. गुमेलगुल संख्या प्रणाली में 'उरापोन' = 1 और 'उकासर' = 2 का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए: (i) (उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उरापोन) + (उकासर – उकासर – उकासर – उरापोन) (ii) (उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उरापोन) – (उकासर – उकासर – उकासर)
उत्तर: (i) (2+2+2+2+1) + (2+2+2+1) = 9 + 7 = 16 (गुमेलगुल में: 8 बार उकासर)
(ii) (2+2+2+2+1) – (2+2+2) = 9 – 6 = 3 (गुमेलगुल में: उकासर – उरापोन)
उत्तर: (i) 16, (ii) 3।
प्रश्न 2. गुमेलगुल संख्या प्रणाली के आधार पर निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए: (i) (उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उरापोन) × (उकासर – उकासर) (ii) (उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उकासर – उकासर) ÷ (उकासर – उकासर)
उत्तर: (i) (2+2+2+2+1) × (2+2) = 9 × 4 = 36
(ii) (2+2+2+2+2+2+2+2) ÷ (2+2) = 16 ÷ 4 = 4 (गुमेलगुल में: उकासर – उकासर)
उत्तर: (i) 36, (ii) 4।
प्रश्न 3. संख्या 143 को आधार-5 की संख्या पद्धति के घातांक समूहों में व्यक्त कीजिए और इसका संख्यांक बताइए।
उत्तर: 143 में आधार-5 की सबसे बड़ी संभव घात 5^3 = 125 है
143 = 125 + 18 = 125 + (3 × 5) + (3 × 1) = 1 × 5^3 + 0 × 5^2 + 3 × 5^1 + 3 × 5^0
आधार-5 में संख्यांक = (1033)_5
उत्तर: 1 × 5^3 + 0 × 5^2 + 3 × 5^1 + 3 × 5^0 अर्थात (1033)_5।
प्रश्न 4. निम्नलिखित दशमलव (आधार-10) संख्याओं को आधार-5 पद्धति में व्यक्त कीजिए: (i) 15 (ii) 50 (iii) 137
उत्तर: (i) 15 = 3 × 5^1 + 0 × 5^0 = (30)_5
(ii) 50 = 2 × 5^2 + 0 × 5^1 + 0 × 5^0 = (200)_5
(iii) 137 = 1 × 5^3 + 0 × 5^2 + 2 × 5^1 + 2 × 5^0 = (1022)_5
उत्तर: (i) (30)_5, (ii) (200)_5, (iii) (1022)_5।
प्रश्न 5. आधार-10 वाले हिंदू संख्यांक 25 को क्रमशः आधार-8, आधार-5 और आधार-2 वाले संख्यांकों के रूप में लिखिए।
उत्तर: (i) आधार-8 में: 25 = 3 × 8^1 + 1 × 8^0 = (31)_8
(ii) आधार-5 में: 25 = 1 × 5^2 + 0 × 5^1 + 0 × 5^0 = (100)_5
(iii) आधार-2 में: 25 = 16 + 8 + 1 = 1 × 2^4 + 1 × 2^3 + 0 × 2^2 + 0 × 2^1 + 1 × 2^0 = (11001)_2
उत्तर: आधार-8 में (31)_8, आधार-5 में (100)_5, आधार-2 में (11001)_2।
प्रश्न 6. मिस्र की संख्या पद्धति में निम्नलिखित संख्याओं को दर्शाने के लिए 10 की घातों के कितने प्रतीकों की आवश्यकता होगी: (i) 1023 (ii) 2660 (iii) 1111
उत्तर: मिस्र पद्धति आधार-10 पर आधारित है
(i) 1023 = 1000 का 1 प्रतीक, 100 का 0, 10 के 2 प्रतीक, 1 के 3 प्रतीक
(ii) 2660 = 1000 के 2 प्रतीक, 100 के 6 प्रतीक, 10 के 6 प्रतीक, 1 का 0 प्रतीक
(iii) 1111 = 1000 का 1 प्रतीक, 100 का 1 प्रतीक, 10 का 1 प्रतीक, 1 का 1 प्रतीक
उत्तर: उपरोक्तानुसार प्रतीकों के समूह।
प्रश्न 7. मेसोपोटेमिया की आधार-60 पद्धति में निम्नलिखित संख्याओं को समूहों में व्यक्त कीजिए: (i) 63 (ii) 132 (iii) 200 (iv) 3605
उत्तर: (i) 63 = 1 × 60 + 3 (60 का 1 समूह और 3 इकाइयाँ)
(ii) 132 = 2 × 60 + 12 (60 के 2 समूह और 12 इकाइयाँ)
(iii) 200 = 3 × 60 + 20 (60 के 3 समूह और 20 इकाइयाँ)
(iv) 3605 = 1 × 3600 + 0 × 60 + 5 = 1 × 60^2 + 0 × 60^1 + 5 × 60^0
उत्तर: (i) 1 × 60 + 3, (ii) 2 × 60 + 12, (iii) 3 × 60 + 20, (iv) 1 × 60^2 + 0 × 60 + 5।
प्रश्न 8. चीनी छड़ संख्यांक में संख्या 2634 का मान हेंग और जोंग प्रतीकों के स्थानों के अनुसार कैसे ज्ञात किया जाता है?
उत्तर: चीनी छड़ संख्यांक में 10^3 (हेंग), 10^2 (जोंग), 10^1 (हेंग) और 10^0 (जोंग) का एकांतर प्रयोग होता है
2 (हेंग) × 10^3 + 6 (जोंग) × 10^2 + 3 (हेंग) × 10^1 + 4 (जोंग) × 1 = 2000 + 600 + 30 + 4 = 2634
उत्तर: 2634।
प्रश्न 9. ऑस्ट्रेलिया की गुमेलगुल जनजाति की संख्या पद्धति में 'उरापोन' (1) और 'उकासर' (2) का उपयोग करके संख्या 3 और 6 को किस प्रकार निरूपित किया जाता है?
उत्तर: गुमेलगुल जनजाति 2 की बारी-बारी गणना करती है
3 = 2 + 1 = उकासर – उरापोन
6 = 2 + 2 + 2 = उकासर – उकासर – उकासर
उत्तर: 3 के लिए 'उकासर-उरापोन' तथा 6 के लिए 'उकासर-उकासर-उकासर'।
प्रश्न 10. मेसोपोटेमिया की आधार-60 पद्धति में संख्या 640 को सांकेतिक संख्याओं में कैसे समूहीकृत किया जाता है?
उत्तर: 640 ÷ 60 = 10 भागफल तथा 40 शेषफल
640 = (10) × 60 + 40
अतः 640 को 60 की आवृत्ति दर्शाने वाले 10 के 1 प्रतीक और 40 की इकाइयों से दर्शाया जाता है
उत्तर: (10) × 60 + 40।
प्रश्न 11. हिंदू संख्या पद्धति में संख्या 375 को 10 की घातों के स्थानीय मान के अनुसार विस्तारित रूप में लिखिए।
उत्तर: 375 = (3 × 10^2) + (7 × 10^1) + (5 × 10^0) = 300 + 70 + 5 = 375
उत्तर: (3 × 10^2) + (7 × 10^1) + (5 × 10^0)।
प्रश्न 12. आधार-n संख्या पद्धति की सांकेतिक संख्याएँ किस घातांक क्रम में प्रारंभ और विकसित होती हैं?
उत्तर: आधार-n संख्या पद्धति में प्रथम सांकेतिक संख्या n^0 = 1 से आरंभ होकर n की घातों n^1, n^2, n^3, …….. के रूप में बढ़ती हैं
उत्तर: n^0 = 1, n^1, n^2, n^3, ……..।
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FAQ
मिस्र की संख्या पद्धति और आधार-n संख्या पद्धति में क्या अंतर है?
मिस्र की संख्या पद्धति आधार-10 पर आधारित एक सांकेतिक प्रणाली थी जिसमें प्रत्येक अगली सांकेतिक संख्या 10 से गुणा करके प्राप्त की जाती है। आधार-n पद्धति में सांकेतिक संख्याएँ n^0 = 1 से प्रारंभ होकर n की घातों (1, n, n^2, n^3) के रूप में बढ़ती हैं।
माया संख्या पद्धति में ‘0’ और स्थानीय मान का क्या महत्व था?
माया सभ्यता ने मध्य अमेरिका में आधार-20 वाली स्थानीय मान पद्धति विकसित की थी, जिसमें उन्होंने शून्य (0) के लिए सीप जैसे प्रतीक का उपयोग किया था। यह स्थानधारक प्रतीक बड़ी संख्याओं को बिना किसी अस्पष्टता के प्रदर्शित करने में सहायक था।
हिंदू संख्या पद्धति को विश्व भर में क्यों अपनाया गया?
हिंदू संख्या पद्धति में 0 से 9 तक के केवल 10 अंकों और स्थानीय मान प्रणाली का उपयोग होता है। प्रत्येक स्थान पर एकल अंक और शून्य का प्रयोग होने के कारण संख्याओं को पढ़ने, लिखने और गणनाएँ करने में कोई अस्पष्टता नहीं रहती।
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