Class 8 Maths Chapter 6 in Hindi PDF: जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा (गणित प्रकाश)

कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 6, जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा: यह अध्याय बीजीय व्यंजकों के गुणन, वितरण गुणधर्म तथा सर्वसमिकाओं की गणितीय अवधारणाओं के बारे में है। इसमें ब्रह्मगुप्त के ‘खंड गुणनम्’ और ‘इष्टगुणन’ का ऐतिहासिक संदर्भ, तडांग और युसुफ द्वारा वर्गाकार छायांकित क्षेत्र का क्षेत्रफल निकालने की विधि, धौली में पार्क के टाइल्स वाले पैदल मार्ग तथा 10 सिक्कों के त्रिभुज को पलटने की गतिविधि का वर्णन किया गया है।

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कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 6 (जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा): मुख्य बिंदु

6.1 गुणन के कुछ गुणधर्म जब दो संख्याओं 23 और 27 प्रत्येक में 1 की वृद्धि की जाती है तो नए गुणनफल (23 + 1)(27 + 1) में 23 + 27 + 1 = 51 की वृद्धि होती है। इस वितरण गुणधर्म को व्यापक रूप से (a + m)(b + n) = ab + mb + an + mn के रूप में व्यक्त किया जाता है जहाँ an + bm + mn गुणनफल में कुल वृद्धि दर्शाती है।

वितरण नियम का इतिहास और ‘इष्टगुणन’ प्राचीन भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त (628 सामान्य संवत) ने अपने ग्रंथ ‘ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त’ (श्लोक 12.55) में वितरण गुणधर्म का वर्णन करते हुए इसे ‘खंड गुणनम्’ कहा था। आगे चलकर ब्रह्मगुप्त, श्रीधराचार्य (750 संवत) और भास्कराचार्य (लीलावती, 1150 संवत) ने वितरण नियम से शीघ्र गुणा करने की विधियों को ‘इष्टगुणन’ नाम दिया।

6.2 वितरण गुणधर्म की विशेष स्थितियाँ (सर्वसमिकाएँ) 60 इकाई भुजा वाले वर्ग और 5 इकाई वाले छोटे वर्ग के क्षेत्रफल से 65 इकाई भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल (60 + 5)^2 = 3600 + 25 + 600 = 4225 वर्ग इकाई निकाला जाता है। इसी ज्यामितीय विभाजन से सर्वसमिकाएँ (a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2, (a – b)^2 = a^2 – 2ab + b^2 तथा (a + b)(a – b) = a^2 – b^2 सिद्ध होती हैं।

6.3 व 6.4 बीजीय प्रतिरूप और तडांग-युसुफ विधि छायांकित वर्गाकार भाग का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए ‘तडांग की विधि’ व्यंजक (m + n)^2 – 4mn तथा ‘युसुफ की विधि’ (n – m)^2 का प्रयोग करती है जो दोनों समान परिणाम देते हैं। चरण k वाली वर्गाकार टाइल्स या वृत्तों की आकृति में कुल इकाइयों की संख्या के लिए बीजीय व्यंजक k^2 + 2k प्राप्त होता है।

अध्याय 6 के अभ्यास

  • विद्यार्थी वितरण गुणधर्म का उपयोग करके 3874 × 11, 89 × 101 और 23478 × 999 जैसी संख्याओं का शीघ्र गुणन एक पंक्ति में करने का अभ्यास करते हैं।
  • छात्र सर्वसमिकाओं का प्रयोग करके 46^2, 91^2 और 397 × 403 के मान ज्ञात करने तथा बीजीय व्यंजकों के सरलीकरण में त्रुटियों को पहचानकर सुधारने का अभ्यास करते हैं।
  • छात्र ‘तडांग की विधि’ व ‘युसुफ की विधि’ से (m + n)^2 – 4mn = (n – m)^2 की सत्यता जाँचते हैं तथा 10 सिक्कों के त्रिभुज को न्यूनतम 3 चालों में पलटने का अभ्यास करते हैं।

कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 6 के प्रश्न-उत्तर (हल)

प्रश्न 1. गणना कीजिए: (i) 3874 × 11 (ii) 5678 × 11
उत्तर: वितरण गुणधर्म a(b + c) = ab + ac से
(i) 3874 × 11 = 3874 × (10 + 1) = 38740 + 3874 = 42614
(ii) 5678 × 11 = 5678 × (10 + 1) = 56780 + 5678 = 62458
उत्तर: (i) 42614, (ii) 62458।

प्रश्न 2. उपयुक्त नियम का प्रयोग करके निम्नलिखित का गुणनफल ज्ञात कीजिए: (i) 89 × 101 (ii) 9734 × 99 (iii) 23478 × 999
उत्तर: (i) 89 × 101 = 89 × (100 + 1) = 8900 + 89 = 8989
(ii) 9734 × 99 = 9734 × (100 – 1) = 973400 – 9734 = 963666
(iii) 23478 × 999 = 23478 × (1000 – 1) = 23478000 – 23478 = 23454522
उत्तर: (i) 8989, (ii) 963666, (iii) 23454522।

प्रश्न 3. सर्वसमिका (a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2 का उपयोग करके (6x + 5)^2 का विस्तार कीजिए।
उत्तर: यहाँ a = 6x तथा b = 5 है
(6x + 5)^2 = (6x)^2 + 2 × (6x) × 5 + (5)^2 = 36x^2 + 60x + 25
उत्तर: 36x^2 + 60x + 25।

प्रश्न 4. सर्वसमिका (a – b)^2 = a^2 – 2ab + b^2 का उपयोग करके 99^2 और 58^2 का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: (i) 99^2 = (100 – 1)^2 = 100^2 – 2 × 100 × 1 + 1^2 = 10000 – 200 + 1 = 9801
(ii) 58^2 = (60 – 2)^2 = 60^2 – 2 × 60 × 2 + 2^2 = 3600 – 240 + 4 = 3364
उत्तर: (i) 9801, (ii) 3364।

प्रश्न 5. सर्वसमिका (a + b)(a – b) = a^2 – b^2 का उपयोग करके 98 × 102 और 45 × 55 की गणना कीजिए।
उत्तर: (i) 98 × 102 = (100 – 2)(100 + 2) = 100^2 – 2^2 = 10000 – 4 = 9996
(ii) 45 × 55 = (50 – 5)(50 + 5) = 50^2 – 5^2 = 2500 – 25 = 2475
उत्तर: (i) 9996, (ii) 2475।

प्रश्न 6. सर्वसमिका 1A (a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2 का उपयोग करके 46^2 का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 46 को (40 + 6) के रूप में लिखने पर
46^2 = (40 + 6)^2 = 40^2 + 2 × 40 × 6 + 6^2 = 1600 + 480 + 36 = 2116
उत्तर: 2116।

प्रश्न 7. सर्वसमिका 1C (a + b)(a – b) = a^2 – b^2 का उपयोग करके 397 × 403 का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 397 × 403 = (400 – 3)(400 + 3) = 400^2 – 3^2 = 160000 – 9 = 159991
उत्तर: 159991।

प्रश्न 8. सर्वसमिका 1B (a – b)^2 = a^2 – 2ab + b^2 का उपयोग करके 91^2 का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 91 को (100 – 9) के रूप में लिखने पर
91^2 = (100 – 9)^2 = 100^2 – 2 × 100 × 9 + 9^2 = 10000 – 1800 + 81 = 8281
उत्तर: 8281।

प्रश्न 9. उपयुक्त सर्वसमिका का उपयोग करके गुणनफल (3a – 9b)(3a + 9b) का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: सर्वसमिका (x – y)(x + y) = x^2 – y^2 का प्रयोग करने पर यहाँ x = 3a तथा y = 9b है
(3a – 9b)(3a + 9b) = (3a)^2 – (9b)^2 = 9a^2 – 81b^2
उत्तर: 9a^2 – 81b^2।

प्रश्न 10. 100 को दो वर्गों के अंतर के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर: सर्वसमिका a^2 – b^2 = (a + b)(a – b) से, यदि a = 26 और b = 24 चुनें तो (26 + 24)(26 – 24) = 50 × 2 = 100 प्राप्त होता है
अतः 100 = 26^2 – 24^2 (जहाँ 26^2 = 676 और 24^2 = 576, 676 – 576 = 100)
उत्तर: 26^2 – 24^2।

प्रश्न 11. कौन-सा व्यंजक बड़ा है? गुणनफल की पूर्व गणना किए बिना ज्ञात कीजिए: (i) 14 × 26 या 16 × 24 (ii) 25 × 75 या 26 × 74
उत्तर: सर्वसमिका (m – x)(m + x) = m^2 – x^2 का प्रयोग करने पर:
(i) 14 × 26 = (20 – 6)(20 + 6) = 20^2 – 6^2 = 400 – 36 = 364
16 × 24 = (20 – 4)(20 + 4) = 20^2 – 4^2 = 400 – 16 = 384
चूँकि 4^2 < 6^2, अतः 400 – 16 > 400 – 36, इसलिए 16 × 24 बड़ा है
(ii) 25 × 75 = (50 – 25)(50 + 25) = 50^2 – 25^2 = 2500 – 625 = 1875
26 × 74 = (50 – 24)(50 + 24) = 50^2 – 24^2 = 2500 – 576 = 1924
चूँकि 24^2 < 25^2, अतः 50^2 – 24^2 > 50^2 – 25^2, इसलिए 26 × 74 बड़ा है
उत्तर: (i) 16 × 24, (ii) 26 × 74।

प्रश्न 12. एक संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है और दूसरी संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 5 प्राप्त होता है। इनके योग, अंतर और गुणनफल को 7 से भाग देने पर शेषफल क्या प्राप्त होगा?
उत्तर: माना पहली संख्या a = 7k_1 + 3 तथा दूसरी संख्या b = 7k_2 + 5 है
(i) योग: a + b = 7(k_1 + k_2) + 8 = 7(k_1 + k_2 + 1) + 1, अतः 7 से भाग देने पर शेषफल 1 होगा
(ii) अंतर: b – a = 7(k_2 – k_1) + 2, अतः 7 से भाग देने पर शेषफल 2 होगा
(iii) गुणनफल: a × b = (7k_1 + 3)(7k_2 + 5) = 49k_1 k_2 + 35k_1 + 21k_2 + 15 = 7(7k_1 k_2 + 5k_1 + 3k_2 + 2) + 1, अतः 7 से भाग देने पर शेषफल 1 होगा
उत्तर: योग का शेषफल = 1, अंतर का शेषफल = 2, गुणनफल का शेषफल = 1।

कक्षा 8 अध्याय 6 PDF ऑनलाइन पढ़ें

अन्य अध्याय

FAQ

जब गुणा की जाने वाली दो संख्याओं a और b प्रत्येक में 1 की वृद्धि की जाती है तो गुणनफल में क्या परिवर्तन होता है?
जब दोनों संख्याओं में 1 की वृद्धि की जाती है तो नया गुणनफल (a + 1)(b + 1) = ab + a + b + 1 होता है। इसका अर्थ है कि मूल गुणनफल ab में a + b + 1 की वृद्धि हो जाती है।

‘खंड गुणनम्’ और ‘इष्टगुणन’ क्या हैं और इनका उल्लेख किन ग्रंथों में मिलता है?
ब्रह्मगुप्त ने ‘ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त’ में गुण्य को अलग-अलग खंडों में बाँटकर गुणा करने की विधि को ‘खंड गुणनम्’ कहा था। वितरण गुणधर्म से तेजी से गुणा करने की इन प्राचीन तकनीकों को ‘इष्टगुणन’ कहा जाता है जिसका वर्णन भास्कराचार्य की ‘लीलावती’ में भी है।

सर्वसमिका (a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2 को ज्यामितीय रूप से कैसे समझा जा सकता है?
(a + b) भुजा वाले वर्ग को a भुजा वाले वर्ग (a^2), b भुजा वाले वर्ग (b^2) और a तथा b भुजाओं वाले दो आयतों (प्रत्येक ab) में बाँटा जाता है। इन चारों भागों के क्षेत्रफलों को जोड़ने पर कुल क्षेत्रफल a^2 + 2ab + b^2 प्राप्त होता है।

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