कक्षा 5 हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8, वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं?: इस अध्याय में वस्त्रों के निर्माण, कताई और बुनाई की प्रक्रियाओं का बया पक्षी, फुदकी पक्षी, रेशमकीट और हथकरघा बुनकरों के उदाहरणों से वर्णन किया गया है । इसमें कागज़ की पट्टियों से बुनाई, रूई से सूत कातने, सुई-धागे से कच्चा टांका लगाने और लद्दाख की पश्मीना ऊन व विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कढ़ाई कलाओं के बारे में समझाया गया है ।
कक्षा 5 हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8 (वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं?): मुख्य बिंदु
धागों से बने प्रतिरूप और बुनाई बया पक्षी घास और तंतुओं को आपस में बुनकर टहनी से लटकता हुआ बैग जैसा सुंदर घोंसला बनाती है । भारत में 4000 वर्ष पहले से हथकरघा पर बुनाई की परंपरा रही है तथा प्राचीन भारतीय मलमल इतनी बारीक होती थी कि उसे ‘बुनी हुई हवा’ कहा जाता था और पूरी साड़ी अंगूठी से निकल सकती थी ।
कताई और प्राकृतिक व कृत्रिम रेशे सूती रेशों को खींचकर व बांटकर धागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं, जिसमें चरखे का उपयोग किया जाता है । कपास, जूट, ऊन व रेशम प्राकृतिक रेशे हैं (जैसे लद्दाख की चंगाथांगी बकरियों से पश्मीना ऊन मिलती है), जबकि नायलॉन, रेयॉन व पॉलिएस्टर मानव निर्मित कृत्रिम रेशे हैं ।
सिलाई कला और फुदकी पक्षी फुदकी (टेलरबर्ड) पक्षी अपनी चोंच से चौड़े पत्तों के किनारों में छेद करके पौधों के रेशों या मकड़ी के जाले से सिलकर घोंसला बनाती है । विद्यार्थी सुई और धागे की सहायता से कपड़े में क, ख, ग, घ बिंदुओं का अनुसरण करते हुए सीधी रेखा में कच्चा टांका (रनिंग स्टिच) लगाना सीखते हैं ।
पारंपरिक कढ़ाई और कपड़ों का पुनर्चक्रण भारत में लखनऊ की चिकनकारी, राजस्थान की बांधनी व गोटा, पंजाब की फुलकारी और कश्मीर की कश्मीरी कढ़ाई जैसी विविध पारंपरिक कलाएँ प्रसिद्ध हैं । पुराने कपड़ों के टुकड़ों को जोड़कर रजाई या मेज़पोश बनाना तथा बिना बिजली के चलने वाला हथकरघा उद्योग पर्यावरण-अनुकूल आजीविका का साधन है ।
अध्याय 8 के अभ्यास
- विद्यार्थी नीले और पीले रंग के कागज़ की पट्टियों को एक-दूसरे के ऊपर-नीचे पिरोकर चटाई या टोकरी बुनने की गतिविधि करते हैं ।
- विद्यार्थी रूई के गोले से रेशे को धीरे-धीरे खींचकर और पेंसिल पर लपेटकर सूती धागा कातने का अभ्यास करते हैं ।
- विद्यार्थी दर्जी की दुकान से बचे हुए कपड़े के टुकड़ों को एकत्र करके सुई-धागे से कच्चा टांका लगाकर आपस में जोड़ते हैं ।
कक्षा 5 हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8 के प्रश्न-उत्तर (हल)
प्रश्न 1. नीचे दिए गए रेशमकीट के जीवन-चक्र के चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर: 1. रेशमकीट अंडे देता है
2. अंडों से छोटे-छोटे रेशमकीट (लावा) निकलते हैं
3. रेशमकीट (लावा) शहतूत के पत्ते खाते हैं और बड़े हो जाते हैं
4. रेशमकीट (लावा) अपने चारों ओर कृमिकोष (कोकून) बुनते हैं
5. वयस्क रेशमकीट कोकून से बाहर आता है
6. चक्र पुनः आरंभ होता है।
प्रश्न 2. बया पक्षी अपना घोंसला किस प्रकार बनाता है?
उत्तर: बया पक्षी घास के तंतुओं को ऊपर-नीचे बुनकर वृक्ष की टहनियों से लटकता हुआ थैली जैसा सुंदर और मजबूत घोंसला बनाता है।
प्रश्न 3. फुदकी (टेलरबर्ड) पक्षी अपना घोंसला किस प्रकार सिलता है?
उत्तर: फुदकी पक्षी पौधे के रेशों या मकड़ी के रेशम का उपयोग करके अपनी चोंच से बड़े पत्ते के किनारों में छेद करके धागा पिरोता है और घोंसला सिलता है।
प्रश्न 4. प्राचीन भारतीय मलमल की क्या विशेषता थी?
उत्तर: भारतीय मलमल इतनी बारीक होती थी कि उसे 'बुनी हुई हवा' कहा जाता था और इससे बनी पूरी साड़ी को एक अंगूठी के बीच से निकाला जा सकता था।
प्रश्न 5. सूती धागा बनाने की प्रक्रिया (कताई) किसे कहते हैं?
उत्तर: सूती रेशों को एक साथ खींचकर और ऐंठकर (लपेटकर) धागा या सूत बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।
प्रश्न 6. रेशम का धागा कृमिकोष (कोकून) से कैसे तैयार किया जाता है?
उत्तर: रेशमकीट के कृमिकोष (कोकून) को गर्म पानी में डालकर रेशम के रेशों को धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है और फिर उनसे धागा बनाया जाता है।
प्रश्न 7. पश्मीना ऊन किस जीव से प्राप्त होती है और यह कहाँ पाई जाती है?
उत्तर: पश्मीना ऊन लद्दाख के ऊँचे और ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'चंगाथांगी' नाम की विशेष बकरी से प्राप्त होती है।
प्रश्न 8. बांधनी वस्त्र रंगाई किस प्रकार की जाती है?
उत्तर: बांधनी वस्त्र रंगाई में कपड़े के छोटे-छोटे भागों को उँगलियों और धागों से बाँधकर रंगा जाता है, जिससे वस्त्र पर बिंदु और वृत्त के सुंदर डिज़ाइन बन जाते हैं।
प्रश्न 9. हथकरघा उद्योग को पर्यावरण अनुकूल और संधारणीय क्यों माना जाता है?
उत्तर: हथकरघा उद्योग में विद्युत का उपयोग नहीं होता है, जिससे यह ऊर्जा की बचत करता है और पर्यावरण अनुकूल तथा संधारणीय बनता है।
प्रश्न 10. यदि सिले हुए कपड़े या बुनी हुई संरचना में से एक धागा टूट जाए तो क्या होगा?
उत्तर: एक धागा टूटने या खिंचने पर उससे जुड़ी पूरी बुनाई या सिलाई ढीली होकर उधड़ने लगती है, जिससे वस्त्र का प्रतिरूप खराब हो सकता है।
प्रश्न 11. खादी वस्त्र का स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता में क्या महत्व था?
उत्तर: गांधी जी के अनुसार स्वयं कपास से धागा कातना और कपड़ा बुनना आत्मनिर्भरता का संदेश देता है, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख प्रतीक बना।
प्रश्न 12. पुराने कपड़ों का पुनरुप्रयोग या पुनर्चक्रण किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर: पुराने कपड़ों को ज़रूरतमंदों या छोटे भाई-बहनों को पहनने के लिए दिया जा सकता है, अथवा उनके टुकड़ों को आपस में सिलकर रज़ाई, मेज़पोश या चटाई बनाई जा सकती है।
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अन्य अध्याय
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FAQ
बया पक्षी और फुदकी (टेलरबर्ड) अपने घोंसले किस प्रकार बनाते हैं?
बया पक्षी घास के तंतुओं को आपस में बुनकर लटकता हुआ थैली जैसा घोंसला बनाती है । फुदकी पक्षी अपनी चोंच से चौड़े पत्ते के किनारों में छेद करके रेशों से सिलती है और सुरक्षित घोंसला तैयार करती है ।
पश्मीना ऊन कहाँ से प्राप्त होती है और इसकी क्या विशेषता है?
पश्मीना ऊन लद्दाख के ऊँचे व ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली ‘चंगाथांगी’ बकरियों से प्राप्त होती है । इसे हाथ से कातकर व बुनकर अत्यंत कोमल, हल्की और गरम शाल बनाई जाती है ।
सूती धागा कैसे बनाया जाता है और इसे क्या कहते हैं?
सूती रेशों को खींचकर और उँगलियों से धीरे-धीरे बांटकर (ऐंठकर) धागा बनाया जाता है, और इस प्रक्रिया को कताई कहते हैं । इस कार्य में चरखा या तकली अत्यंत सहायक होती है ।
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- Chapter 2: एक नदी की यात्रा
- Chapter 3: भोजन का रहस्य
- Chapter 4: हमारा विद्यालय — एक आनंदमय स्थान
- Chapter 5: हमारा जीवंत देश
- Chapter 6: कुछ अनूठे स्थान
- Chapter 7: ऊर्जा — वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?
- Chapter 8: वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं?
- Chapter 9: प्रकृति की लय
- Chapter 10: पृथ्वी — हम सबका घर