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DAV Class 8 Hindi Chapter 6 Question Answer

DAV class 8 Hindi Gyan Sagar Book Question Answer chapter 6 aashram ke atithi aur sansmaran is given below. Here class 8 Hindi question answer is provided with great explanation.

Highlights

  1. पाठ में से
  2. बातचीत के लिए
  3. अनुमान और कल्पना
  4. भाषा की बात
  5. जीवन मूल्य

पाठ में से

1. गाँधी जी ने सिला हुआ कपड़ा पहनना क्यों छोड़ दिया?

उत्तर: गाँधीजी ने सिला हुआ कपड़ा पहनना इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वे स्वदेशी आंदोलन के पुरोधा थे और उस समय ‘सुई’ भी हिंदुस्तान में नहीं बनती थी, न सिलाई की मशीन, न कैंची।

2. गाँधी जी ने नौजवान को क्या समझाया?

उत्तर: गाँधीजी ने नास्तिक नौजवान को समझाया कि भगवान को लेकर अलग-अलग मान्यताएँ हैं पर सच तो यह है कि हर मनुष्य में ईश्वर हैं, यह मानना ही ईश्वर पर सच्चा विश्वास रखना है। प्रेम या अहिंसा में ही भगवान है। उन्होंने युवक से कहा कि जब तक यह पूरा विश्वास पैदा न हो, वह आश्रम में रहे।

3. गाँधी जी कागज़ का अपव्यय किस प्रकार रोकते थे?

उत्तर: गाँधीजी किसी भी चीज के अधिकतम उपयोग पर बल देते थे। इसलिए बापूजी, जो चिट्ठियाँ आती थीं, उनके लिफ़ाफ़े तार के कागज़, चिट्ठियों के एक तरफ़ से कोरे काग़ज़ या बचे हुए काग़ज़ को भी सँभालकर, काटकर रखते थे। वे सोचते थे कि काग़ज़ का अपव्यय हमें नहीं करना चाहिए। इस तरह वे कागज का अपव्यय रोकते थे।

4. आत्मशुद्धि के लिए लेख लिखने का क्या कारण था?

उत्तर: आत्मशुद्धि के लिए लेख लिखने का कारण यह था कि गाँधीजी यह मानते थे कि पहले आचरण फिर उपदेश अर्थात् वे आश्रम में किसी भी भूल के लिए सबसे पहले खुद को जिम्मेदार ठहराते थे और प्रायश्चित स्वरूप उपवास रखते और लेख के रूप में अपने अनुभव लिखा करते थे।

5. रिक्त स्थान भरिए-

उत्तर:

क. हिंदुस्तान प्रचार सभा

ख. राखदानी

ग. पूनियाँ लपेटने का डोरा

घ. चार रुपए

6. उचित उत्तर पर सही का निशान लगाइए-

उत्तर:

क. मणि बहन

ख. औज़ार

ग. सरोजिनी नायडू

घ. जमीन

बातचीत के लिए

1. ‘गाँधी जी केवल उपदेशक नहीं थे, कर्मयोगी थे’ चर्चा कीजिए।

उत्तर: गाँधीजी जो कहा करते थे उसे अपने जीवन में भी अपनाते थे। वे अपने आश्रम के साथ-साथ देश के सभी लोगों को ध्यान में रखकर उनके विकास के लिए काम किया करते थे। इसलिए उन्हें केवल उपदेशक नहीं कर्मयोगी भी कहा जाता है।

2. भ्रष्टाचार हमारे जीवन को किस प्रकार नष्ट करता है? तर्क सम्मत विचार प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: जब कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के कीचड़ में पैर रखता है तो उसके गुनाह लाख कोशिश करने के बावजूद भी नहीं मिटते जिसके कारण वह अपने व्यक्तिगत जीवन में भी परेशान रहने लगता है और उससे जुड़े लोगों को भी अनेक प्रकार की समस्याएँ का सामना करना पड़ता हैं । ऐसे लोग कभी भी जेल जा सकते हैं । इस प्रकार भ्रष्टाचार हमारे जीवन को नष्ट कर देता है।

3. ‘प्रेम या अहिंसा में ही भगवान है। इस कथन के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: गाँधीजी का यह मानना था कि आप आस्तिक बनें या नास्तिक परंतु कोई शक्ति तो ज़रूर है जो इस दुनिया को चला रही है और अगर आप उस शक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा रखना चाहते हैं तो इस दुनिया के सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और अहिंसा की भावना रखनी चाहिए। प्रेम और अहिंसा में ही भगवान है क्योंकि इसी मार्ग का अनुसरण कर हम देवलोक पहुँच सकते हैं।

अनुमान और कल्पना

1. यदि गाँधी जी सब्जी में बधार लगाने की अनुमति न देते, तो क्या होता?

उत्तर: यदि गाँधीजी आश्रम में रहने वाली बहनों को बघार लगाकर और मसाला डालकर सब्ज़ी खाने की अनुमति न देते तो उबले हुए कद्दू खा-खा कर और किसी बहन को बादी हो जाती, चक्कर आने लगते तथा बहुतों को डकारों के मारे चैन नहीं मिलता।

2. यदि आपके घर अचानक मेहमान आ जाएँ, तो आप उनकी सुविधा का ध्यान कैसे रखेंगे?

उत्तर: यदि मेरे घर में अचानक मेहमान आ जाएँ तो मैं पूरे उत्साह के साथ उनका आदर सत्कार करूँगा। उनके रुचि-अरुचि के अनुसार उनके लिए सारे प्रबंध करूँगा। ऐसा करने के पीछे मेरा उद्देश्य हमारी संस्कृति की समृद्धि है क्योंकि हमारी संस्कृति में अतिथि को देवतुल्य कहा गया है।

3. कल्पना कीजिए कि आप गाँधी जी के आश्रम में हैं। आप अपना वहाँ का अनुभव बताइए।

उत्तर: यदि मैं गाँधीजी के आश्रम में होने की कल्पना करूँ तो मैं उत्साहित होजाऊँगा क्योंकि मुझे भारत के राष्ट्रपिता को देखने का सौभाग्य मिलेगा साथी ही साथ मुझे अनुशासन में रहने का अनुभव प्राप्त होगा।

भाषा की बात

1. कोष्ठक में दिए गए शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए-

उत्तर:

क. प्रबंध

ख. भेट

ग. माफ

2. निम्नलिखित वाक्यों में मोटे काले शब्दों के उचित लिंग भेद पर घेरा लगाइए

(क) गाँधी जी एक कुटी में रहते थे।

(ख) उन्होंने एक मिट्टी का सकोरा रख दिया।

(ग) वह पुराने ढंग की धोती और चादर पहनते थे।

(घ) गाँधी जी के आश्रम का नाम सेवाग्राम था।

उत्तर:

क. स्त्रीलिंग

ख. पुल्लिंग

ग. स्त्रीलिंग

घ. पुल्लिंग

3. नीचे दिए गए वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए

(क) जिसे बहुत थोड़ा ज्ञान हो

(ख) किसी के पीछे चलने वाला

(ग) जो कहा जा सके

(घ) जिसका कोई आकार हो

(ङ) ईश्वर में विश्वास रखने वाला

(च) जो किए गए उपकार को मानता हो

उत्तर: (क) अल्पज्ञ, (ख) अनुचर, (ग) अकथनीय, (घ) आस्तिक, (ड) कृतज्ञ

जीवन मूल्य

गाँधी जी का जीवन सादा जीवन उच्च विचार‘ का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण रहा है।

1. आप अपने जीवन में सादगी को किस प्रकार अपनाते हैं?

उत्तर: मैं अपने जीवन में सादगी को एक आवश्यक तत्त्व की तरह अपनाता हूँ और इसके सुखद परिणाम मुझे निरंतर मिलते रहते हैं।

2. सादा जीवन सुदृढ़ चरित्र को आधार प्रदान करता है। कैसे?

उत्तर: सादा जीवन सुदृढ़ चरित्र को आधार प्रदान करता है क्योंकि जब हम सादगी को अपनाते हैं तो हमें न धन की भूख रहती हैं और न ही चीज़ों को बटोरने की स्पृहा इन दोनों से मुक्ता हो जाने के बाद हमारे जीवन का उद्देश्य केवल गौरव गिरि पर चढ़ना ही है।

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