Class 6 Social Science Chapter 4 in Hindi PDF: इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत (समाज का अध्ययन)

कक्षा 6 समाज का अध्ययन अध्याय 4, इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत: यह अध्याय इतिहास में समय की गणना करने की प्रणालियों, समय-रेखा और अतीत के अध्ययन हेतु पुरातात्विक व साहित्यिक स्रोतों के महत्व को समझाता है । इसमें राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली, ई.एच. कार के कथन, ग्रिगेरियन कैलेंडर, पंचांग, महात्मा बुद्ध की जन्म तिथि (560 सा.सं.पू.) और शैल-चित्रों जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया गया है ।

कक्षा 6 समाज का अध्ययन अध्याय 4 (इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत): मुख्य बिंदु

समय की गणना और कैलेंडर इतिहास में ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के समय को सामान्य संवत पूर्व (सा.सं.पू.) तथा बाद के समय को सामान्य संवत (सा.सं.) कहा जाता है । विश्व-भर में 365 दिनों का ग्रिगेरियन कैलेंडर प्रचलित है, जबकि भारत में खगोलीय गणनाओं और त्योहारों की तिथियों के लिए पंचांग का उपयोग होता है ।

इतिहास के स्रोत और वैज्ञानिक अध्ययन इतिहासकार, पुरातत्वविद, पुरालेखशास्त्री और मानव वैज्ञानिक अतीत के पुनर्निर्माण के लिए सिक्कों, शिलालेखों, पांडुलिपियों व मृदभांडों का अध्ययन करते हैं । इसके अतिरिक्त प्राचीन जलवायु के अध्ययन और मानव आनुवंशिकी (जीनेटिक्स) जैसे वैज्ञानिक तरीकों ने इतिहास समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।

मानव इतिहास का प्रारंभ और हिम युग होमो सेपियंस (मानव) लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व पृथ्वी पर आए और टोलियों में रहकर आखेटक व खाद्य संग्राहक का जीवन व्यतीत करते थे । लगभग 1,00,000 से 12,00,00 वर्ष पूर्व तक चले हिम युग के समाप्त होने पर मानव ने अनाज उगाना तथा गाय और बकरी जैसे जानवरों का घरेलूकरण शुरू किया ।

पली से कस्बों का विकास कालक्रम में छोटे उप-ग्राम (पली) बड़े गाँवों में परिवर्तित हुए जहाँ निजी स्वामित्व के बिना भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी । मृदभांड बनाने की तकनीक तथा तांबे व लोहे के प्रयोग से टिकाऊ उपकरण और आभूषण बनना प्रारंभ हुए, जिससे व्यापार और कस्बों का विकास हुआ ।

अध्याय 4 के अभ्यास

  • विद्यार्थी 1900 सा.सं. से आज तक की समय-रेखा बनाकर उस पर अपने दादा-दादी, माता-पिता और स्वयं की जन्म-तिथियों को अंकित करते हैं ।
  • विद्यार्थी अपने परिवार की तीन पीढ़ियों की वंशावली तालिका बनाकर परिजनों के नाम, व्यवसाय, जन्म-स्थान तथा सूचना के स्रोतों का विवरण दर्ज करते हैं ।
  • विद्यार्थी सम्राट चंद्रगुप्त (320 सा.सं.पू.) और रानी झाँसी (1828 सा.सं.) के जन्म-वर्षों के आधार पर उनकी शताब्दी तथा स्वतंत्रता वर्ष से समयांतराल की गणना करते हैं ।

कक्षा 6 समाज का अध्ययन अध्याय 4 के प्रश्न-उत्तर (हल)

प्रश्न 1. 560 सा.सं.पू. महात्मा बुद्ध की जन्म तिथि है। मान लीजिए हम आज 2024 सा.सं. में हैं, तो उनका जन्म कितने वर्ष पूर्व हुआ था?
उत्तर: किसी सा.सं.पू. और सा.सं. की तिथि के बीच वर्षों की गणना के लिए दोनों को जोड़कर 1 घटाया जाता है (क्योंकि कैलेंडर में शून्य वर्ष नहीं होता)
बुद्ध का जन्म = 560 + 2024 – 1 = 2583 वर्ष पूर्व हुआ था।

प्रश्न 2. वर्ष 2 सा.सं.पू. से लेकर 2 सा.सं. तक के समय-रेखा कालखंड में कुल कितने वर्ष होंगे?
उत्तर: ग्रेगोरियन तिथि-पत्र में 'शून्य वर्ष' न होने के कारण वर्ष 1 सा.सं. सीधे 1 सा.सं.पू. के बाद आता है
अतः 2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. के मध्य कुल 2 + 2 – 1 = 3 वर्ष होंगे।

प्रश्न 3. निम्नलिखित तिथियों को कालक्रमानुसार (सबसे पुरानी से सबसे नई तिथि के क्रम में) लगाइए — 323 सा.सं., 323 सा.सं.पू., 100 सा.सं., 100 सा.सं.पू., 1900 सा.सं.पू., 1090 सा.सं., 2024 सा.सं.
उत्तर: सा.सं.पू. तिथियाँ घटने के क्रम में तथा सा.सं. तिथियाँ बढ़ने के क्रम में व्यवस्थित की जाती हैं
सही कालक्रम है: 1900 सा.सं.पू., 323 सा.सं.पू., 100 सा.सं.पू., 100 सा.सं., 323 सा.सं., 1090 सा.सं., 2024 सा.सं.।

प्रश्न 4. यदि सम्राट चंद्रगुप्त का जन्म 320 सा.सं.पू. में हुआ तो बताइए उनका संबंध किस शताब्दी से था? उनका जन्म बुद्ध के जन्म (560 सा.सं.पू.) से कितने वर्ष पश्चात् हुआ?
उत्तर: 320 सा.सं.पू. का संबंध चौथी शताब्दी सा.सं.पू. से था
बुद्ध का जन्म 560 सा.सं.पू. में हुआ था, अतः अंतर = 560 – 320 = 240 वर्ष (चंद्रगुप्त का जन्म बुद्ध के जन्म के 240 वर्ष पश्चात् हुआ)।

प्रश्न 5. झाँसी की रानी का जन्म 1828 सा.सं. में हुआ। उनका संबंध किस शताब्दी से है? उनका जन्म भारत की स्वतंत्रता (1947 सा.सं.) से कितने वर्ष पूर्व हुआ?
उत्तर: 1828 सा.सं. का संबंध 19वीं शताब्दी सा.सं. से है
भारत 1947 सा.सं. में स्वतंत्र हुआ, अतः अंतर = 1947 – 1828 = 119 वर्ष (उनका जन्म स्वतंत्रता से 119 वर्ष पूर्व हुआ था)।

प्रश्न 6. ‘12,000 वर्ष पूर्व’ को तिथि (सा.सं.पू.) के रूप में बदलिए।
उत्तर: वर्तमान कालखंड (2000 सा.सं.) के संदर्भ में 12,000 वर्ष पूर्व को तिथि के रूप में व्यक्त करने पर 12000 – 2000 = 10,000 सा.सं.पू. (अथवा वर्ष 2024 के अनुसार 12000 – 2024 + 1 = 9977 सा.सं.पू.) लिखा जाता है।

प्रश्न 7. क्या हम इतिहासकारों की तुलना जासूसों से कर सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।
उत्तर: हाँ, इतिहासकारों की तुलना जासूसों से की जा सकती है क्योंकि वे भी अतीत की घटनाओं की गुत्थी सुलझाने के लिए सिक्कों, शिलालेखों, पांडुलिपियों व पुरातात्विक अवशेषों रूपी सुरागों को एकत्रित करते हैं तथा साक्ष्यों का परीक्षण करके इतिहास का पुनर्निर्माण करते हैं।

प्रश्न 8. 'शताब्दी' और 'सहस्त्राब्दी' में क्या अंतर है?
उत्तर: शताब्दी 100 वर्षों का कालखंड होता है (जैसे 2001 से 2100 सा.सं. तक 21वीं शताब्दी)
जबकि सहस्त्राब्दी 1000 वर्षों का कालखंड होता है (जैसे 2001 से 3000 सा.सं. तक तीसरी सहस्त्राब्दी)।

प्रश्न 9. 'पंचांग' क्या है और इसका उपयोग किन कार्यों के लिए किया जाता है?
उत्तर: पंचांग तालिकाओं की एक पुस्तक है जिसमें प्रत्येक माह के दिनों के साथ खगोलीय आँकड़े सूचीबद्ध होते हैं
इसका उपयोग सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, सूर्योदय, सूर्यास्त, मौसम के पूर्वानुमान और त्योहारों की तिथियाँ निर्धारित करने में होता है।

प्रश्न 10. भू-विज्ञानी, जीवाश्म विज्ञानी, मानव विज्ञानी और पुरातत्व विज्ञानी के अध्ययन क्षेत्रों में क्या अंतर है?
उत्तर: भू-विज्ञानी मृदा व पत्थरों जैसे भौतिक स्वरूपों का अध्ययन करते हैं, जीवाश्म विज्ञानी पौधों व जीवों के जीवाश्मों का अध्ययन करते हैं, मानव विज्ञानी समाजों व संस्कृतियों का अध्ययन करते हैं, तथा पुरातत्व विज्ञानी उत्खनन से मिले भौतिक अवशेषों का अध्ययन करते हैं।

प्रश्न 11. पृथ्वी पर होमो सेपियंस (मानव) का आगमन कब हुआ और हिम युग की अवधि क्या थी?
उत्तर: पृथ्वी पर मानव (होमो सेपियंस) का आगमन लगभग 3,00,000 (तीन लाख) वर्ष पूर्व हुआ था
तथा हिम युग लगभग 1,00,000 (एक लाख) वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।

प्रश्न 12. प्राचीन काल में 'पली' क्या थी और इसका विकास कस्बों के रूप में कैसे हुआ?
उत्तर: पली एक छोटी बस्ती या उप-ग्राम को कहते थे
कालक्रम में पली बड़े गाँवों में बदले जहाँ वस्तुओं का आदान-प्रदान होता था, और तांबे व लोहे जैसी धातुओं के उपयोग व तकनीक के आने से वे छोटे कस्बों में परिवर्तित हो गए।

कक्षा 6 अध्याय 4 PDF ऑनलाइन पढ़ें

अन्य अध्याय

FAQ

सामान्य संवत पूर्व (सा.सं.पू.) और सामान्य संवत (सा.सं.) में वर्षों की गणना कैसे की जाती है?
सा.सं.पू. की तिथियों की गणना अवरोही (उलटे) क्रम में की जाती है, जबकि सा.सं. की तिथियों की गणना सीधे क्रम में होती है । सा.सं.पू. और सा.सं. की दो तिथियों के बीच के वर्षों की गणना के लिए दोनों को जोड़कर 1 घटाया जाता है क्योंकि कैलेंडर में शून्य वर्ष नहीं होता ।

पुरातत्वविद् और इतिहासकार अतीत के अध्ययन के लिए किन प्रमुख स्रोतों का उपयोग करते हैं?
वे पुरातात्विक स्रोतों (सिक्के, औजार, मृदभांड, शिलालेख, स्मारक) और साहित्यिक स्रोतों (पांडुलिपियाँ, यात्रा वृत्तांत, पंचांग) का उपयोग करते हैं । हाल के वर्षों में प्राचीन जलवायु और मानव आनुवंशिकी (जीनेटिक्स) के वैज्ञानिक अध्ययन भी इसमें सहायक बने हैं ।

हिम युग क्या था और इसके समाप्त होने पर मानव जीवन में क्या परिवर्तन आया?
हिम युग (1,00,000 से 12,000 वर्ष पूर्व) वह अवधि थी जब पृथ्वी का एक बड़ा भाग बर्फ से ढका हुआ था । इसके समाप्त होने और जलवायु गरम होने पर मानव ने नदियों के किनारे रहकर अनाज उगाना तथा गाय और बकरी का पशुपालन आरंभ किया ।

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