कक्षा 6 समाज का अध्ययन अध्याय 6, भारतीय सभ्यता का प्रारंभ: यह अध्याय भारत की सबसे प्राचीन सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता के विकास, नगर-नियोजन, व्यापार और सामाजिक जीवन का वर्णन करता है। इसमें बी.बी. लाल का कथन, धौलावीरा के चट्टान काटकर बनाए गए जलाशय, मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार, लोथल का बंदरगाह, बनावली का मिट्टी का हल तथा ‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा जैसे उदाहरण शामिल हैं।
कक्षा 6 समाज का अध्ययन अध्याय 6 (भारतीय सभ्यता का प्रारंभ): मुख्य बिंदु
गाँव से नगर लगभग 3500 सा.सं.पू. से सिंधु और सरस्वती नदी के उपजाऊ मैदानों में गाँव नगरों में बदलने लगे और 2600 सा.सं.पू. में व्यापार बढ़ने से ये महानगर बन गए। 1920-21 में खोजा गया हड़प्पा पहला उत्खनित नगर था, जिसके आधार पर पुरातत्ववेत्ताओं ने इसे हड़प्पा सभ्यता नाम दिया।
नगर-नियोजन और जल प्रबंधन हड़प्पा के नगरों में चौड़ी सड़कें, सुरक्षात्मक किलेबंदी, शासकों/अभिजात वर्ग के लिए ऊपरी नगर तथा साधारण लोगों के लिए निचला नगर पाया जाता है। मोहनजो-दड़ो में 12×7 मीटर का डामर (बिटुमेन) परतयुक्त महास्नानागार मिला है तथा धौलावीरा में चट्टान काटकर बनाए गए 73 मीटर व 33 मीटर लंबे विशाल जलाशय मिले हैं।
कृषि, भोजन और सक्रिय व्यापार हड़प्पावासी गेहूँ, जौ, दालें और कपास उगाते थे, जिनके लिए बनावली से मिट्टी का हल तथा लोथल से 217 मीटर लंबा बंदरगाह मिला है। वे गुजरात के लाल कार्नेलियन मनकों, शंख की चूड़ियों और कपास का निर्यात करते थे तथा ओमान से हाथी दाँत का कंघा और सूसा (ईरान) में मनके पाए गए हैं।
प्राचीन कला और सभ्यता का ह्रास मोहनजो-दड़ो से 10.8 सेमी ऊँची ‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा, ‘पुरोहित राजा’ की मूर्ति तथा लोथल से प्यासे कौए का चित्रयुक्त पात्र मिला है। लगभग 2200 सा.सं.पू. से वर्षा में कमी, शुष्कता और सरस्वती नदी के सूखने से 1900 सा.सं.पू. के आसपास लोग नगर छोड़कर पुनः ग्रामीण जीवन-शैली की ओर लौट गए।
अध्याय 6 के अभ्यास
- विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के मानचित्र में दिए गए हड़प्पाकालीन नगरों (धौलावीरा, हड़प्पा, कालीबंगा, मोहनजो-दड़ो, राखीगढ़ी) का उनके आधुनिक राज्यों व प्रदेशों से मिलान करते हैं।
- विद्यार्थी फीते (मेजरिंग टेप) से अपनी कक्षा या खेल के मैदान की लंबाई मापकर उसकी तुलना धौलावीरा के 73 मीटर लंबे विशाल जलाशय से करते हैं।
- विद्यार्थी लोथल के पात्र पर चित्रित प्यासे कौए की कहानी को पूरा करते हैं और 4000 वर्षों से इसे याद रखे जाने के कारणों पर चर्चा करते हैं।
कक्षा 6 समाज का अध्ययन अध्याय 6 के प्रश्न-उत्तर (हल)
प्रश्न 1. सभ्यता क्या है?
उत्तर: सामान्यतः 'सभ्यता' शब्द का प्रयोग मानव समाज के उस उन्नत चरण के लिए किया जाता है जिसमें शासन और प्रशासन, नगरीकरण, विविध शिल्प, व्यापार, लेखन प्रणाली, सांस्कृतिक विचार तथा उच्च कृषि उत्पादकता जैसी विशेषताएँ पाई जाती हैं।
प्रश्न 2. भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता कौन-सी थी?
उत्तर: भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता सिंधु-सरस्वती सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) थी।
प्रश्न 3. वर्तमान में इस सभ्यता के निवासियों को ‘हड़प्पा-ई या हड़प्पावासी’ क्यों कहते हैं?
उत्तर: लगभग एक शताब्दी पहले 1920–21 में हड़प्पा (आज के पाकिस्तान का पंजाब) इस सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर था, इसलिए इसके निवासियों को हड़प्पावासी कहते हैं।
प्रश्न 4. निम्नलिखित हड़प्पाकालीन नगरों को उनके आधुनिक राज्य या प्रदेश से सुमेलित कीजिए — धौलावीरा, हड़प्पा, कालीबंगा, मोहनजो-दड़ो, राखीगढ़ी
उत्तर: धौलावीरा — गुजरात
हड़प्पा — पंजाब (पाकिस्तान)
कालीबंगा — राजस्थान
मोहनजो-दड़ो — सिंध (पाकिस्तान)
राखीगढ़ी — हरियाणा।
प्रश्न 5. मोहनजो-दड़ो के 'महासनानागार' का आकार कितना है और इसे जलरोधी बनाने के लिए किसका प्रयोग किया गया था?
उत्तर: मोहनजो-दड़ो के महासनानागार का आकार 12×7 मीटर है तथा इसे जलरोधी बनाने के लिए ईंटों पर प्राकृतिक बिटुमेन (डामर) की परत चढ़ाई गई थी।
प्रश्न 6. धौलावीरा में पाया गया सबसे बड़ा जलाशय कितना लंबा था?
उत्तर: धौलावीरा में पत्थरों व चट्टानों को काटकर बनाया गया सबसे बड़ा जलाशय 73 मीटर लंबा था।
प्रश्न 7. लोथल में प्राप्त विशाल बेसिन (बंदरगाह) की लंबाई और चौड़ाई कितनी है?
उत्तर: लोथल में प्राप्त विशाल बेसिन की लंबाई 217 मीटर और चौड़ाई 36 मीटर है।
प्रश्न 8. मोहनजो-दड़ो से प्राप्त नर्तकी की कांस्य प्रतिमा की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर: मोहनजो-दड़ो से प्राप्त नर्तकी की लघु कांस्य प्रतिमा की ऊँचाई 10.8 सेंटीमीटर है।
प्रश्न 9. बनावली (हरियाणा) से कृषि से संबंधित कौन-सा पुरातात्विक अवशेष मिला है?
उत्तर: बनावली (हरियाणा) से मिट्टी से निर्मित हल का लघु प्रतिरूप मिला है।
प्रश्न 10. 1900 सा.सं.पू. के आसपास सिंधु-सरस्वती सभ्यता के ह्रास के दो प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर: पहला कारण 2200 सा.सं.पू. के आसपास जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा में कमी व शुष्कता का आना है, तथा दूसरा कारण सरस्वती नदी के मध्य बेसिन का सूख जाना है।
प्रश्न 11. इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के अनेक नाम (हड़प्पा सभ्यता, सिंधु सभ्यता, सिंधु-सरस्वती सभ्यता) क्यों हैं?
उत्तर: प्रथम उत्खनित नगर हड़प्पा होने से इसे 'हड़प्पा सभ्यता', आरंभ में सिंधु नदी के मैदानी भाग में स्थल मिलने से 'सिंधु सभ्यता', तथा सिंधु व सरस्वती नदियों के विस्तृत क्षेत्र में पाए जाने से 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' कहा जाता है।
प्रश्न 12. मोहनजो-दड़ो में ईंटों से निर्मित कितने कुओं की गणना की गई है?
उत्तर: मोहनजो-दड़ो में ईंटों से निर्मित लगभग 700 कुओं की गणना की गई है।
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FAQ
हड़प्पा सभ्यता को ‘सिंधु-सरस्वती सभ्यता’ भी क्यों कहा जाता है?
सिंधु नदी और प्राचीन सरस्वती नदी (वर्तमान घग्गर-हाकरा) की द्रोणी में अनेक पुरास्थल मिलने के कारण इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाता है। इसके बेसिन में राखीगढ़ी, गँवेरीवाला, कालीबंगा और बनावली जैसे प्रमुख नगर विकसित हुए थे।
धौलावीरा का जल प्रबंधन हड़प्पा सभ्यता के अन्य नगरों से किस प्रकार भिन्न था?
धौलावीरा में पत्थरों और चट्टानों को काटकर कम से कम छह विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया था, जिनमें सबसे बड़ा जलाशय 73 मीटर लंबा था। इन्हें कुशल जल संचयन और वितरण के लिए भूमिगत नालियों से जोड़ा गया था।
1900 सा.सं.पू. के आसपास हड़प्पा सभ्यता का पतन किन मुख्य कारणों से हुआ?
जलवायु संबंधी परिवर्तनों से वर्षा में कमी आने और सरस्वती नदी का मध्य बेसिन सूखने से कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके कारण नगरों में खाद्य आपूर्ति घटी और लोग नगर छोड़कर छोटी-छोटी ग्रामीण बस्तियों में बस गए।
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