DAV Class 5 Hindi Chapter 3 पेड़ Solutions

DAV Board Class 5 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions

DAV Class 5 Hindi Chapter 3 पेड़ Solutions

Complete authentic solutions for DAV Class 5 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 3: पेड़ (Ped – कविता by विजय गुप्त). This comprehensive study guide features the detailed poem summary and central idea (कविता का भावार्थ व सार), word meanings (कठिन शब्दों के अर्थ), textbook question answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), discussion questions (बातचीत के लिए), imagination questions (अनुमान और कल्पना), grammar exercises (भाषा की बात: क्रिया शब्द, युग्म शब्द, पर्यायवाची), and life values (जीवन मूल्य) solved strictly according to DAV Education Board standards.

कक्षा (Class)विषय (Subject)पाठ्यपुस्तक (Textbook)पाठ (Chapter)कवि (Poet)
कक्षा 5 (Class 5)हिंदी (Hindi)भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri)पाठ 3: पेड़विजय गुप्त

1. कविता का विस्तृत सार एवं भावार्थ (Poem Summary & Meaning)

कवि विजय गुप्त द्वारा रचित कविता ‘पेड़’ में पेड़ों की दैनिक दिनचर्या का अत्यंत सजीव, रोचक और मानवीय चित्रण किया गया है:

  • प्रातःकाल (सुप्तावस्था से जागना): हज़ारों बीज आँखें मींचे नम मिट्टी की चादर ओढ़कर अपने बिस्तर (धरती की गोद) में सोए हुए हैं। जब सुबह की सुनहरी धूप और सूरज की किरणें उन्हें हौले से जगाती हैं, तो वे हड़बड़ाकर उठते हैं, दाँत मंजन कर चाय पीते हैं और धरती के रोशनदानों से बाहर निकलकर इस नई, अचरज भरी दुनिया को कौतूहल से झाँकते हैं।
  • दिनचर्या और क्रीड़ा: हरे पत्तों का सुंदर सूट पहने पेड़ ठंडी हवा के झोंकों में रुमझुम-रुमझुम झूमकर नाचते हैं। दोपहर की चिलचिलाती धूप में वे अपनी हरी-भरी पत्तियों की थाली से भोजन ग्रहण करते हैं। वे डालियों पर बैठी चिड़ियों और तोतों से चोंच लड़ाते हैं, चरने आई गायों की पीठ खुजाते हैं और खेलने आए बच्चों को अपनी शीतल, घनी छाया प्रदान करते हैं।
  • संध्याकाल और रात्रि: शाम ढलते ही जब दिनभर के थके पंछी अपने घोंसलों में लौटते हैं, तो पेड़ उनके साथ बैठकर सुख-दुख के किस्से बतियाते हैं। रात के सन्नाटे में चाँद और तारों की शीतल रोशनी तथा जुगनुओं की जगमगाहट के बीच पेड़ चादर तानकर गहरी नींद में सो जाते हैं और हरी-भरी धरती के सुंदर सपनों में खो जाते हैं।

2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

कठिन शब्दअर्थ (Meaning in Hindi)
महटियाएमिट्टी से ढके हुए / धूल-धूसरित
रोशनदानकमरे या दीवार में रोशनी और हवा आने के लिए बना छोटा जंगला / झरोखा
भौंचक्केहैरान / आश्चर्यचकित / चकित
चादर ताननानिश्चिंत होकर गहरी नींद में सो जाना
लपर-झपरजुगनू का टिमटिमाना / चमकना और बुझना
धकियाएगाहल्का धक्का देगा

3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Textbook Solutions)

प्रश्न 1. कविता में किसकी दिनचर्या का वर्णन किया गया है? सही (✓) का निशान लगाइए:
(i) बच्चे
(ii) पेड़ [✓]
(iii) चिड़िया
उत्तर: पेड़

प्रश्न 2. हज़ारों बीज आँखें मींचकर क्या कर रहे हैं?
उत्तर: हज़ारों बीज आँखें मींचकर नम मिट्टी की चादर ओढ़े महटियाए से अपनी मिट्टी के बिस्तर में निश्चिंत सोए हुए हैं।

प्रश्न 3. पेड़ किस समय और कैसे खाना खाएँगे?
उत्तर: पेड़ भरी दोपहर की धूप में अपनी हरी-हरी पत्तियों की थाली से भोजन खाएँगे (प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन ग्रहण करेंगे)।

प्रश्न 4. शाम होने पर पक्षी क्या करते हैं?
उत्तर: शाम होने पर पक्षी पेड़ों पर बने अपने घोंसलों में लौट आते हैं और पेड़ों के संग एक-दूसरे से दिनभर के अपने सुख-दुख के किस्से बतियाते हैं।

प्रश्न 5. रात को सोते समय पेड़ कौन-से सपनों में खो जाएँगे?
उत्तर: रात को निश्चिंत होकर सोते समय पेड़ हरी-भरी, खुशहाल धरती के सुंदर और प्यारे सपनों में खो जाएँगे।

रिक्त स्थान पूर्ति (कविता की पंक्तियाँ)

प्रश्न 6. रिक्त स्थान भरिए :

कान पकड़कर
सूरज जब
हौले-से धकियाएगा
हड़बड़ करते भागेंगे।
मंजन कर
चाय पिएँगे
धरती के रोशनदानों से
चोरी-चोरी झाँकेंगे
हरे सूट में
भौंचक्के से
एक नई दुनिया
पहचानेंगे।

शब्दों का विशिष्ट अर्थ

प्रश्न 7. कविता में इन शब्दों का क्या मतलब है?

  • (क) चादर तानना : बिना किसी चिंता के गहरी नींद में सो जाना।
  • (ख) महटियाए से : मिट्टी से लिपटे हुए या मिट्टी से ढके हुए।
  • (ग) जुगनू की लपर-झपर : अंधेरी रात में जुगनुओं का टिमटिमाना और जगमगाना।
  • (घ) पत्तों की थाली से खाना खाना : सूर्य के प्रकाश, हवा और जल की सहायता से हरी पत्तियों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण से अपना भोजन तैयार करना और पोषण प्राप्त करना।

4. बातचीत के लिए (Discussion Questions)

प्रश्न 1. पक्षी कहते हैं कि हम शाम को अपने सुख-दुख की बातें एक-दूसरे से कहते हैं। आप अपने मन की बातें किसे बताते हैं?
उत्तर: मैं अपने मन की सभी सुख-दुख की बातें अपनी माँ, पिताजी और अपने विश्वासपात्र मित्रों को बताता/बताती हूँ।

प्रश्न 2. पेड़ अपना खाना कैसे बनाते हैं? पता कीजिए और फिर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: पेड़-पौधे अपनी हरी पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल की सहायता से सूर्य के प्रकाश, वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड और जड़ों द्वारा अवशोषित जल व खनिज लवणों का उपयोग करके प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया द्वारा अपना भोजन तैयार करते हैं।

प्रश्न 3. पेड़ों की तरह आप भी तो सपने ज़रूर देखते होंगे। अपने किसी ऐसे सपने के बारे में बताइए जो आपको बहुत अच्छा लगा हो।
उत्तर: एक बार मैंने सपना देखा कि हमारे विद्यालय के प्रांगण में लगे सभी पेड़ रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहे हैं और सभी पक्षी मधुर संगीत गा रहे हैं। वह सपना मुझे बहुत अद्भुत और सुखद लगा।

प्रश्न 4. पेड़ हमारे मित्र हैं – चर्चा कीजिए।
उत्तर: पेड़ हमारे सबसे निःस्वार्थ और सच्चे मित्र हैं क्योंकि वे हमें जीवनदायिनी प्राणवायु (ऑक्सीजन), मीठे फल, सुगन्धित फूल, छाया, लकड़ी और औषधियाँ प्रदान करते हैं तथा पृथ्वी के तापमान और वर्षा चक्र को नियंत्रित रखते हैं।

5. अनुमान और कल्पना (Imagination & Thinking)

प्रश्न 1. यदि धरती पर पेड़ न हों तो क्या होगा?
उत्तर: यदि पृथ्वी से पेड़ों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, तो समस्त जीव-जगत नष्ट हो जाएगा। हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, भीषण सूखा और बाढ़ आएगी, उपजाऊ मिट्टी बह जाएगी और धरती एक बंजर रेगिस्तान बन जाएगी।

प्रश्न 2. यदि पेड़ बोल सकते तो वे बच्चों से क्या-क्या बातें करते?
उत्तर: यदि पेड़ बोल सकते तो वे बच्चों को प्यार से अपनी ठंडी छाँव में बुलाते, उनके साथ खेल-कूद करते, उन्हें मीठे फल देते और बच्चों से यह प्रार्थना करते कि कोई भी इंसान उन्हें कुल्हाड़ी से न काटे और अधिक से अधिक नए पौधे लगाए।

6. भाषा की बात (Grammar Exercises)

प्रश्न 1. भागेंगे, पिएँगे, झाँकेंगे, नाचेंगे, जाएँगे – काम वाले शब्द अर्थात् ‘क्रिया’ शब्द हैं। इन क्रिया शब्दों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए :

  • (क) भागेंगे : खेल की घंटी बजते ही मैदान में सभी बच्चे भागेंगे।
  • (ख) पिएँगे : गर्मी के मौसम में सभी लोग ठंडा जल पिएँगे।
  • (ग) झाँकेंगे : चिड़िया के नन्हे बच्चे घोंसले से बाहर झाँकेंगे।
  • (घ) नाचेंगे : सावन की पहली फुहार पड़ते ही बागों में मोर नाचेंगे।
  • (ङ) जाएँगे : शाम ढलते ही सभी चरवाहे अपने घर जाएँगे।

प्रश्न 2. पाठ में आए कोई छह युग्म-शब्द (जोड़ी वाले शब्द) लिखिए :

  1. चोरी-चोरी
  2. झूम-झूम
  3. रुमझुम-रुमझुम
  4. धीरे-धीरे
  5. सुख-दुख
  6. हरी-भरी

प्रश्न 3. नीचे लिखे शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द (पर्यायवाची शब्द) पाठ में से ढूँढकर लिखिए :

दिए गए शब्दपाठ से पर्यायवाची शब्द
(क) संसारदुनिया
(ख) वायुहवा
(ग) जलपानी
(घ) सूर्यसूरज

7. जीवन मूल्य (Life Values)

प्रश्न: “पेड़ों का जीवन दूसरों की भलाई के लिए होता है, क्योंकि वे धरती को हरा-भरा रखते हैं। छाया, फल, फूल, शुद्ध वायु आदि देते हैं। उनमें पक्षी अपना घोंसला बनाकर रहते हैं। पेड़ों की तरह हमें भी परोपकारी बनना चाहिए, क्यों?”
उत्तर: हमें पेड़ों की तरह परोपकारी और दयालु बनना चाहिए क्योंकि:
1. निःस्वार्थ सेवा: परोपकार से ही मानव जीवन सार्थक बनता है। दूसरों के काम आने और उनका दुख दूर करने से समाज में परस्पर सौहार्द और प्रेम बढ़ता है।
2. आत्मिक संतोष: दूसरों की भलाई करने से मनुष्य को सच्चा आत्म-संतोष और मानसिक शांति मिलती है, जो भौतिक सुखों से कहीं अधिक मूल्यवान है।


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