DAV Board Class 5 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions
DAV Class 5 Hindi Chapter 6 नदी यहाँ पर Solutions
Complete authentic solutions for DAV Class 5 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 6: नदी यहाँ पर (Nadi Yahan Par – कविता by डॉ. श्रीप्रसाद). This comprehensive guide provides the detailed poem summary and central idea (कविता का भावार्थ व सार), word meanings (कठिन शब्दों के अर्थ), textbook question answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), discussion questions (बातचीत के लिए), imagination questions (अनुमान और कल्पना), grammar exercises (भाषा की बात: क्रिया शब्द, शब्दकोश क्रम, वचन बदलो), and life values (जीवन मूल्य) solved strictly according to DAV Education Board standards.
| कक्षा (Class) | विषय (Subject) | पाठ्यपुस्तक (Textbook) | पाठ (Chapter) | कवि (Poet) |
|---|---|---|---|---|
| कक्षा 5 (Class 5) | हिंदी (Hindi) | भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri) | पाठ 6: नदी यहाँ पर | डॉ. श्रीप्रसाद |
1. कविता का विस्तृत सार एवं भावार्थ (Poem Summary)
कवि डॉ. श्रीप्रसाद द्वारा रचित कविता ‘नदी यहाँ पर’ में नदी की निरंतर गतिशीलता, उसकी विविध गतियों और उसके परोपकारी स्वभाव का अत्यंत सजीव व प्रेरणादायी चित्रण किया गया है:
- नदी का मार्ग और चाल: नदी पर्वतों के ऊँचे शिखरों से निकलती है, जहाँ ढलान अधिक होने के कारण उसकी गति अत्यधिक तीव्र और उद्दाम होती है। जब वह नीचे मैदानी भागों में आती है, तो उसकी चाल धीमी-धीमी हो जाती है, मानो वह लंबी यात्रा के बाद थककर विश्राम कर रही हो। नदी कहीं बिल्कुल सीधी बहती है, तो कहीं टेढ़ी-मेढ़ी बलखाती हुई आगे बढ़ती है; वह चट्टानों और करारों में छिपती तथा मैदानों में लुका-छिपी का खेल खेलती हुई बहती है।
- परोपकारी और समतावादी स्वभाव: नदी बिना थके रात-दिन निरंतर बहती रहती है। वह अपने शीतल व निर्मल जल से खेतों की सिंचाई करती है, जिससे खेत लहलहाते हैं और धानी (हरी-भरी) फसलें उत्पन्न होती हैं। नदी बिना किसी भेदभाव के सभी प्राणियों को पीने का पानी देती है; चाहे कोई उससे कितना भी जल ग्रहण कर ले, वह कभी मन में संकोच या बुरा भाव नहीं लाती।
- सदा जलता दीया और सागर में विलय: जिस प्रकार एक दीपक अंधकार को मिटाने के लिए निरंतर जलकर जगमगाता रहता है, उसी प्रकार नदी भी जीवन भर कर्मपथ पर गतिमान रहती है। अपने लंबे और दुर्गम मार्ग को पार करने के बाद वह अंत में विशाल सागर में समाहित हो जाती है और स्वयं सागर का ही रूप धारण कर लेती है।
2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
| कठिन शब्द | अर्थ (Meaning in Hindi) |
|---|---|
| धानी | हल्की हरी / नई फसलों की हरियाली |
| करार | नदी का ऊँचा तट / टीलेदार किनारा |
| सुस्ताई | आराम किया / विश्राम किया |
| जगर-मगर | जगमगाना / चमकना |
| राह | मार्ग / रास्ता |
| सागर | समुद्र / सिंधु |
3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Textbook Solutions)
प्रश्न 1. नदी चलते-चलते कैसे-कैसे आकार बदलती है?
उत्तर: नदी चलते-चलते किसी स्थान पर बिल्कुल सीधी बहती है, तो कहीं टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है; कहीं वह ऊँचे करारों के पीछे छिप जाती है, तो कहीं मैदानों में आकर लुका-छिपी का खेल खेलती हुई दिखाई देती है।
प्रश्न 2. नदी का बहाव पर्वत पर कैसा होता है और नीचे आने पर कैसा हो जाता है?
उत्तर: पर्वत की तीव्र ढलान पर नदी का बहाव अत्यधिक तेज़ होता है, परंतु नीचे समतल मैदान में आते ही उसकी चाल धीमी-धीमी हो जाती है, मानो वह थककर सुस्ता रही हो।
प्रश्न 3. नदी हमारे लिए क्या-क्या करती है?
उत्तर: नदी हमारे लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य करती है:
1. वह अपने मीठे व शीतल जल से सभी प्राणियों की प्यास बुझाती है।
2. वह खेतों को सींचकर लहलहाती हरी-भरी धानी फसलें तैयार करती है।
3. वह चारों ओर जल फैलाकर संपूर्ण प्रकृति में हरियाली और खुशहाली लाती है।
कविता की पंक्तियाँ पूरी कीजिए
प्रश्न 4. कविता की पंक्तियाँ पूरी कीजिए :
- (क) चलते-चलते सागर को आखिर में वह पाती है।
- (ख) सींच-सींचकर खेतों को फसल बनाती है धानी।
- (ग) खेल खेलती लुका-छिपी बिल्कुल ही खो जाती है।
- (घ) एक दीए-सी जगर-मगर सदा रहेगी जलती ही।
सही विकल्प का चयन
प्रश्न 5. कविता की पंक्तियों को पढ़कर उचित उत्तर पर सही (✓) का निशान लगाइए :
“बहुत तेज़ थी पर्वत पर / लेकिन नीचे जब आई / धीमी-धीमी चाल हुई / जैसे थककर सुस्ताई”
(क) नदी की चाल कहाँ धीमी हो जाती है?
(i) सागर में
(ii) पर्वत पर
(iii) मैदानी भाग में [✓]
उत्तर: मैदानी भाग में
(ख) पर्वत पर नदी की गति तेज़ कैसे हो जाती है?
(i) जब नदी सुस्त नहीं चुस्त होती है।
(ii) जब नदी ऊपर से नीचे की ओर आती है। [✓]
(iii) जब नदी जल्दी सागर में मिलना चाहती है।
उत्तर: जब नदी ऊपर से नीचे की ओर आती है।
4. बातचीत के लिए (Discussion Questions)
प्रश्न 1. बताइए तालाब, नदी, नहर, सागर, महासागर में क्या अंतर है?
उत्तर:
• तालाब: चारों ओर से ज़मीन से घिरा पानी का एक छोटा और शांत प्राकृतिक या कृत्रिम जलाशय।
• नदी: पर्वतों से निकलकर प्राकृतिक ढलान पर निरंतर बहने वाली और अंत में सागर में मिलने वाली मीठे पानी की धारा।
• नहर: कृषि सिंचाई अथवा जलापूर्ति हेतु नदियों या बाँधों से निकाली गई कृत्रिम (मानव-निर्मित) जलधारा।
• सागर: बड़े भू-भाग में फैला खारे पानी का विशाल जलाशय जिसमें नदियाँ समाती हैं।
• महासागर: पृथ्वी के विशालतम जल-खंड जो महाद्वीपों को एक-दूसरे से अलग करते हैं।
प्रश्न 2. नदी की शुरुआत कहाँ से होती है और नदी में पानी कहाँ-कहाँ से आता है?
उत्तर: नदी का उद्गम प्रायः ऊँचे पर्वतों पर हिमनदों (ग्लेशियरों) के पिघलने अथवा प्राकृतिक झरनों व झीलों से होता है। नदी में जल वर्षा के पानी, पिघलती बर्फ़ और छोटी सहायक धाराओं व नालों से आता है।
प्रश्न 3. आज-कल नदियों का पानी गंदा और कम क्यों होता जा रहा है?
उत्तर:
• प्रदूषण का कारण: औद्योगिक कारखानों का विषैला रासायनिक अपशिष्ट, नगरों का गंदा सीवेज और प्लास्टिक कचरा सीधे नदियों में बहाना।
• जल की कमी का कारण: वनों की अंधाधुंध कटाई, भूजल का अनियंत्रित दोहन तथा जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की अनियमितता।
5. अनुमान और कल्पना (Imagination Questions)
प्रश्न 1. विचार कीजिए अगर नदी में जल की जगह दूध होता तो क्या होता?
उत्तर: यदि नदी में जल की जगह दूध बहता, तो फसलों की सिंचाई संभव नहीं होती और वनस्पतियाँ नष्ट हो जातीं। साफ़ पेयजल का विकराल संकट उत्पन्न हो जाता, दूध धूप और हवा में सड़कर दुर्गंध फैलाने लगता तथा जल में रहने वाले सभी जीव-जंतु मर जाते।
प्रश्न 2. अगर नदी अपने बारे में स्वयं बताती तो वह कैसे बताती?
उत्तर (नदी की आत्मकथा): “मैं नदी हूँ। मेरे जीवन का सफ़र अनोखा और प्रेरणादायी है। मेरी शुरुआत हिमाच्छादित ऊँचे पर्वतों की गोद से होती है। वहाँ से मैं उछलती-कूदती तीव्र गति से नीचे मैदानों की ओर दौड़ती हूँ। रास्ते में आने वाले खेतों को सींचकर हरा-भरा बनाती हूँ और प्यासे जीवों की प्यास बुझाती हूँ। मैं कभी थकती नहीं और निरंतर आगे बढ़ती हुई अंत में विशाल सागर में समाकर उसी का हिस्सा बन जाती हूँ।”
6. भाषा की बात (Grammar Exercises)
प्रश्न 1. नीचे लिखे शब्दों के अर्थ का अंतर वाक्य प्रयोग करके स्पष्ट कीजिए :
- (क) चाल (अर्थ: गति / चलने की रफ्तार)
वाक्य: समतल मैदान में पहुँचते ही नदी की चाल धीमी हो जाती है। - (ख) चलती (अर्थ: निरंतर आगे बढ़ना)
वाक्य: नदी दिन और रात बिना रुके निरंतर चलती रहती है। - (ग) चलते-चलते (अर्थ: लगातार प्रवाह करते हुए)
वाक्य: नदी चलते-चलते अंत में विशाल सागर को पा लेती है।
प्रश्न 2. पाठ में आए दस क्रिया शब्द छाँटकर शब्दकोश के क्रमानुसार (Alphabetical Order) लिखिए :
- आती
- उठती
- छिपती
- जलती
- देती
- फैलाती
- मुड़ती
- सींचती
- सुस्ताई
- होती
प्रश्न 3. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के वचन बदलकर वाक्य दोबारा लिखिए :
- (क) मैंने अपने खेत में पानी दिया। → मैंने अपने खेतों में पानी दिया।
- (ख) बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। → बच्चा मैदान में खेल रहा है।
- (ग) नदी सबको पानी देती है। → नदियाँ सबको पानी देती हैं।
- (घ) सागर में लहरें उठ रही थीं। → सागर में लहर उठ रही थी।
- (ङ) मैंने दीपावली पर दीया खरीदा। → मैंने दीपावली पर दीये खरीदे।
- (च) रीमा ने फूल उठाया। → रीमा ने फूल उठाए।
7. जीवन मूल्य (Values and Life Skills)
प्रश्न 1. ऊपर लिखी पंक्तियों के माध्यम से नदी हमें क्या-क्या सिखाती है?
उत्तर: नदी हमें सिखाती है कि :
1. सतत कर्मशीलता: बिना थके और बिना रुके निरंतर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
2. निःस्वार्थ परोपकार: बिना किसी भेद-भाव या बदले की आशा के दूसरों की सेवा करनी चाहिए।
3. उदारता और सहनशीलता: दूसरों के अवगुणों को भुलाकर दीपक के समान दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाना चाहिए।
प्रश्न 2. क्या नदी के इन गुणों को अपनाने से हमारे व्यवहार में अंतर आएगा? कैसे?
उत्तर: हाँ, नदी के इन आदर्श गुणों को अपनाने से हमारे जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन आएगा। हम आलस्य और अहंकार को त्यागकर कर्मठ बनेंगे, सहनशील बनेंगे और समाज में प्रेम, शांति व सहयोग की भावना का संचार करेंगे।
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