DAV Class 5 Hindi Chapter 11 बिरसा मुंडा Solutions

DAV Board Class 5 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions

DAV Class 5 Hindi Chapter 11 बिरसा मुंडा Solutions

Complete authentic solutions for DAV Class 5 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 11: बिरसा मुंडा (Birsa Munda – जीवनी). This comprehensive guide features the detailed biographical summary (पाठ का विस्तृत सार), word meanings (कठिन शब्दों के अर्थ), textbook question answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), discussion questions (बातचीत के लिए – काला पानी व असहयोग), imagination questions (अनुमान और कल्पना – पर्यावरण व वन संरक्षण), grammar exercises (भाषा की बात: नुक्ता, संयुक्त क्रिया, ‘र्’ के रूप), and life values (जीवन मूल्य) solved strictly according to DAV Education Board curriculum.

कक्षा (Class)विषय (Subject)पाठ्यपुस्तक (Textbook)पाठ (Chapter)विधा (Genre)
कक्षा 5 (Class 5)हिंदी (Hindi)भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri)पाठ 11: बिरसा मुंडाजीवनी (Biography / Freedom Struggle)

1. पाठ का विस्तृत सार (Detailed Story Summary)

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडे द्वारा छेड़े गए स्वाधीनता महासंग्राम के बाद भारत की स्वतंत्रता और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर क्रांतिकारियों में भगवान बिरसा मुंडा का नाम अत्यंत आदर व गर्व से लिया जाता है।
  • मुंडा जनजाति और ‘सरदारी लड़ाई’: मुंडा आदिवासी मुख्य रूप से तत्कालीन बिहार (वर्तमान झारखंड) के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते थे। शोषक ज़मींदारों और साहूकारों ने छल-कपट और बलपूर्वक मुंडाओं की वह पैतृक उपजाऊ भूमि छीन ली, जिस पर वे कई पीढ़ियों से परंपरागत रूप से खेती करते आ रहे थे। इसके विरोध में स्वाभिमानी मुंडाओं ने राँची से लेकर सिंहभूम जिले तक एक व्यापक संगठित आंदोलन छेड़ा, जिसे इतिहास में ‘सरदारी लड़ाई’ के नाम से जाना जाता है।
  • अंग्रेज़ों के शोषणकारी वन-नियम: ब्रिटिश हुकूमत के आने से पूर्व सामाजिक परंपरा के अनुसार वनों और उनकी संपूर्ण उपज पर केवल आदिवासियों का नैसर्गिक अधिकार था तथा वे स्वयं वनों के रक्षक थे। जब अंग्रेज़ों की नज़र भारतीय वनों की अमूल्य लकड़ी की संपदा पर पड़ी, तो उन्होंने आदिवासियों को बेदखल करने के लिए कठोर कानून बना दिए। सरकार ने किसी की भी भूमि हथियाने का अधिकार बना लिया और सुरक्षित वनों में आदिवासियों के प्रवेश, सूखी लकड़ी बीनने और पशु चराने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।
  • बिरसा मुंडा का क्रांतिकारी नेतृत्व: राँची जिले के ‘चलकद’ गाँव के तेजस्वी युवक बिरसा मुंडा ने शोषित आदिवासियों को संगठित किया। उन्होंने निडर होकर घोषणा की कि ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया का शासन समाप्त हो चुका है और हमारी पावन भूमि पर ‘मुंडा राज’ प्रारंभ हो गया है। उन्होंने मुंडाओं को अंग्रेज़ों को कोई भी लगान (टैक्स) न देने और उनके किसी भी अन्यायपूर्ण आदेश को न मानने का संकल्प दिलाया।
  • संघर्ष और अमर शहादत: 24 अगस्त 1895 की रात्रि में अंग्रेज़ों ने बिरसा को सोते समय चुपके से बंदी बना लिया। नवंबर 1897 में हज़ारीबाग जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने पुनः गुप्त सभाएँ आयोजित कीं और महारानी विक्टोरिया के पुतले बनाकर मुंडाओं को तीरंदाजी का अभ्यास कराया। 25 दिसंबर 1898 से सशस्त्र उलगुलान (क्रांति) का बिगुल फूँका गया और अंग्रेज़ी पुलिस चौकियों पर हमले किए गए। 3 फरवरी 1900 को धोखे से बिरसा को पुनः गिरफ़्तार कर राँची जेल भेजा गया, जहाँ मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में 9 जून 1900 को रहस्यमय परिस्थितियों (हैजे) में उनकी शहादत हो गई। उनके अनेक वीर साथियों को फाँसी और काला पानी की सजा दी गई, परंतु उनकी क्रांति ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अमिट छाप छोड़ दी।

2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

कठिन शब्दअर्थ (Meaning in Hindi)
विद्रोहबगावत / क्रांति / सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ा होना
न्यौछावरसमर्पित करना / बलिदान देना
सरदारी लड़ाईज़मीन छीने जाने के विरोध में मुंडाओं द्वारा चलाया गया ऐतिहासिक आंदोलन
लगानकृषि कर / टैक्स
लोहा लेनासाहसपूर्वक कड़ा मुकाबला करना
दुर्भाग्यपूर्णअभागा / अत्यंत दुखद घटना वाला
पैतृकपूर्वजों या पूर्व पीढ़ियों से प्राप्त

3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Textbook Solutions)

प्रश्न 1. मुंडा कौन हैं? वे कहाँ रहते थे?
उत्तर: मुंडा भारत की एक प्राचीन आदिवासी जनजाति के लोग हैं। वे बिहार (वर्तमान झारखंड राज्य) के दक्षिणी पहाड़ी अंचलों और जंगलों में निवास करते थे।

प्रश्न 2. किस आंदोलन को ‘सरदारी लड़ाई’ के नाम से जाना जाता है?
उत्तर: ज़मींदारों द्वारा छल-कपट और बलपूर्वक मुंडाओं की कई पीढ़ियों पुरानी पैतृक ज़मीन हड़प लिए जाने के विरोध में मुंडा आदिवासियों ने राँची से लेकर सिंहभूम जिले तक जो व्यापक प्रतिरोध आंदोलन चलाया, उसे ‘सरदारी लड़ाई’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3. मुंडा आदिवासी जंगलों की किस प्रकार रक्षा करते थे?
उत्तर: मुंडा आदिवासी अपनी प्राचीन सामाजिक परंपरा के अनुसार कभी भी जीवित हरे पेड़ों को नहीं काटते थे; वे केवल सूखी गिरी हुई टहनियों, पत्तों और छाल को ही ईंधन आदि के लिए एकत्र करते थे। वे जंगलों को अपनी जीवनदायिनी माता मानते थे और उनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते थे।

प्रश्न 4. अंग्रेज़ी राज समाप्त करने के लिए बिरसा मुंडा ने क्या-क्या किया?
उत्तर: अंग्रेज़ी राज समाप्त करने के लिए बिरसा मुंडा ने निम्नलिखित साहसिक कार्य किए :
1. उन्होंने संपूर्ण मुंडा समाज को एकजुट करके यह उद्घोषणा की कि महारानी विक्टोरिया का विदेशी राज समाप्त हो चुका है और हमारा स्वतंत्र ‘मुंडा राज’ प्रारंभ हो गया है।
2. उन्होंने लोगों को अंग्रेज़ शासकों को लगान न देने और उनके अन्यायपूर्ण कानूनों को मानने से साफ़ इंकार करने की प्रेरणा दी।
3. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने गुप्त स्थानों पर सभाएँ आयोजित कीं और अपने अनुयायियों को तीर-धनुष चलाने का विधिवत सैन्य अभ्यास कराया।
4. उन्होंने 25 दिसंबर 1898 से अंग्रेज़ी हुकूमत के शोषक थानों और प्रशासनिक केंद्रों पर योजनाबद्ध हमले शुरू किए।

4. बातचीत के लिए (Discussion Questions)

प्रश्न 1. कुछ साथियों को मृत्युदंड दिया गया तो कुछ को काला पानी की सज़ा दी गई।

  • (क) काला पानी की सज़ा क्या है?
    उत्तर: काला पानी की सज़ा ब्रिटिश शासनकाल की सबसे अमानवीय और कठोरतम सज़ा थी, जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों को भारत की मुख्य भूमि से दूर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ‘सेलुलर जेल’ में एकांत कालकोठरी में रखा जाता था और उनसे कोल्हू चलवाने जैसी अमानवीय यातनाएँ दी जाती थीं।
  • (ख) यह सज़ा कब और किसने शुरू की?
    उत्तर: यह सज़ा ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के बाद भारतीय क्रांतिकारियों को समाज से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए शुरू की थी।
  • (ग) क्या यह सज़ा आज भी दी जाती है?
    उत्तर: नहीं, 1947 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद यह क्रूर सज़ा पूर्णतः समाप्त कर दी गई और अंडमान की सेलुलर जेल को अब राष्ट्रीय तीर्थ व स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है।

प्रश्न 2. उन्होंने सभी के साथ मिलकर अंग्रेज़ी हुक्म न मानने का फ़ैसला किया।

  • (क) यह फ़ैसला क्यों लिया गया होगा?
    उत्तर: यह फ़ैसला इसलिए लिया गया क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने मुंडाओं की पुश्तैनी ज़मीनें छीन ली थीं, वनों में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी थी और उन पर भारी लगान थोपकर उन्हें भुखमरी की कगार पर पहुँचा दिया था।
  • (ख) क्या यह फ़ैसला स्वतंत्रता प्राप्त करने के किसी अन्य आंदोलन से समानता रखता है?
    उत्तर: हाँ, यह फ़ैसला राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ (Civil Disobedience Movement) और ‘असहयोग आंदोलन’ से पूर्ण समानता रखता है, जहाँ विदेशी कानूनों व करों को शांतिपूर्ण रूप से अस्वीकार किया गया था।
  • (ग) मुंडाओं ने कौन-से अंग्रेज़ी फ़ैसलों को मानने से इंकार किया होगा?
    उत्तर: मुंडाओं ने ज़मींदारों व अंग्रेज़ों को लगान चुकाने, वनों से बेदखल होने और सरकारी ज़ब्ती के किसी भी आदेश को मानने से इंकार किया होगा।

प्रश्न 3. बिरसा मुंडा की तरह किन्हीं दो क्रांतिकारियों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए और कक्षा में बताइए।
उत्तर:
1. शहीद भगत सिंह: उन्होंने ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ के नारे से पूरे देश में आज़ादी की अलख जगाई और मात्र 23 वर्ष की उम्र में हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूम लिया।
2. चंद्रशेखर आज़ाद: उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि वे कभी जीवित अंग्रेज़ी पुलिस के हाथ नहीं आएँगे और अल्फ्रेड पार्क में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अंतिम गोली से स्वयं वीरगति को प्राप्त हुए।

5. अनुमान और कल्पना (Imagination Questions)

प्रश्न: “आज जिस तरह जंगलों का विनाश होता जा रहा है और पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है, वह एक चिंता का विषय है। यदि आज बिरसा मुंडा जैसे महापुरुष हो जाए तो धरती का कुछ और ही रूप हो जाए। कल्पना करके बताइए, कैसे?”
उत्तर: यदि आज हमारे बीच बिरसा मुंडा जैसे साहसी और प्रकृति-प्रेमी महापुरुष होते, तो :
1. वे वनों की अवैध कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के विरुद्ध जन-जन को एकजुट करके एक विशाल राष्ट्रव्यापी पर्यावरण आंदोलन खड़ा कर देते।
2. आदिवासी समुदायों के पारंपरिक वन अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा होती और कॉर्पोरेट लालच से जंगलों का विनाश रुक जाता।
3. वनों की हरियाली पुनर्जीवित होती, जिससे प्रदूषण कम होता, नदियों में स्वच्छ जल बहता और पृथ्वी पर जैव विविधता व पारिस्थितिक संतुलन पुनः स्थापित हो जाता।

6. भाषा की बात (Grammar Exercises)

प्रश्न 1. पाठ में आए ऐसे शब्दों को लिखिए जिनमें ‘नुक्ता’ (. ) का प्रयोग हुआ है :

  1. अंग्रेज़ों
  2. ज़रूरत
  3. फ़ैसला
  4. ज़रूरी
  5. फ़ौज (या ज़मीन / कब्ज़ा)

प्रश्न 2. जिस वाक्य में दो या दो से अधिक क्रियाओं का प्रयोग जुड़ा हुआ हो, उस क्रिया को ‘संयुक्त क्रिया’ कहते हैं। पाठ में से दो वाक्य और छाँटकर लिखिए :
(पाठ्यपुस्तक का उदाहरण: मुंडा आदिवासी अंग्रेज़ों से लोहा लेने के लिए तैयार थे।)

  • (क) बिरसा अपने घर में सो रहे थे। (सोना + रहना)
  • (ख) ज़मीन हाथ से निकलती चली जाएगी। (निकलना + चलना + जाना)

प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों में ‘र्’ (रेफ व पदेन) का सही प्रयोग कीजिए और दोबारा लिखिए :

अशुद्ध शब्दशुद्ध शब्द (‘र्’ का सही प्रयोग)
(क) दुभाग्यपूर्णदुर्भाग्यपूर्ण
(ख) अंग्रज़ोंअंग्रेज़ों
(ग) कांतिकारीक्रांतिकारी
(घ) विदहविद्रोह
(ङ) दजदर्ज

7. जीवन मूल्य (Values and Life Skills)

प्रश्न 1. आप अपने देश के लिए क्या-क्या कर सकते हैं? किन्हीं पाँच कामों की सूची बनाइए :
उत्तर: मैं अपने राष्ट्र के निर्माण के लिए निम्नलिखित पाँच कार्य कर सकता/सकती हूँ :
1. पूरी लगन और ईमानदारी से विद्या अध्ययन कर एक योग्य, चरित्रवान व कुशल नागरिक बनना।
2. पर्यावरण संरक्षण हेतु अधिक से अधिक पेड़ लगाना और जल व ऊर्जा का अपव्यय रोकना।
3. सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा करना और स्वच्छता अभियान में सक्रिय योगदान देना।
4. समाज में बंधुत्व, सद्भाव और समानता की भावना को बढ़ावा देना।
5. भारतीय संविधान के आदर्शों और कानूनों का सदैव निष्ठापूर्वक पालन करना।

प्रश्न 2. किसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए जब आपने अपने साथियों की सहायता से कोई काम पूरा किया हो।
उत्तर: विद्यालय में खेल दिवस के आयोजन के अवसर पर हमारे समूह को खेल मैदान तैयार करने का दायित्व मिला था। हमने आपस में तालमेल बनाकर किसी ने चूना डाला, किसी ने झंडे लगाए और किसी ने कुर्सियाँ व्यवस्थित कीं। सामूहिक सहयोग के बल पर हमने निर्धारित समय से पूर्व ही मैदान को अत्यंत आकर्षक ढंग से तैयार कर लिया।


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