DAV Board Class 5 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions
DAV Class 5 Hindi Chapter 17 हार की जीत Solutions
Complete authentic solutions for DAV Class 5 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 17: हार की जीत (Haar Ki Jeet – प्रेरक कहानी by प्रसिद्ध साहित्यकार सुदर्शन). This comprehensive study guide features the detailed story summary (कहानी का विस्तृत सार), word meanings (कठिन शब्दों के अर्थ), textbook question answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), dialogue identification (किसने, किससे कहा), discussion questions (बातचीत के लिए), imagination questions (अनुमान और कल्पना), grammar exercises (भाषा की बात: विलोम शब्द, प्रत्यय निर्माण), and life values (जीवन मूल्य) solved strictly according to DAV Education Board standards.
| कक्षा (Class) | विषय (Subject) | पाठ्यपुस्तक (Textbook) | पाठ (Chapter) | कहानीकार (Author) |
|---|---|---|---|---|
| कक्षा 5 (Class 5) | हिंदी (Hindi) | भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri) | पाठ 17: हार की जीत | सुदर्शन |
1. कहानी का विस्तृत सार (Detailed Story Summary)
- बाबा भारती और उनका घोड़ा सुल्तान: बाबा भारती गाँव के बाहर एक छोटे से मंदिर में रहते थे और अपना अधिकांश समय भगवान के भजन-कीर्तन तथा अपने अनुपम घोड़े ‘सुल्तान’ की सेवा में बिताते थे। बाबा भारती को सुल्तान से वैसा ही गहरा वात्सल्य और प्रेम था जैसा एक माँ को अपने बेटे से और किसान को अपने लहलहाते खेत से होता है। सुल्तान जैसा सुंदर, सुडौल, चंचल और बलवान घोड़ा पूरे इलाके में दूसरा न था।
- डाकू खड़क सिंह की बुरी नज़र: उस क्षेत्र का कुख्यात और खूँखार डाकू खड़क सिंह जब सुल्तान की अनोखी चाल और सुंदरता की प्रशंसा सुनता है, तो उसका मन उसे देखने के लिए अधीर हो उठता है। वह एक दिन बाबा भारती के आश्रम पहुँचता है। सुल्तान का शानदार रूप और उसकी बाँकी चाल देखकर वह दंग रह जाता है और जाते-जाते धमकी देता है : “बाबा जी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।”
- बाबा भारती का डर और पहरा: खड़क सिंह की इस खुली धमकी से बाबा भारती अत्यंत भयभीत हो गए। उनकी रातों की नींद उड़ गई और वे रात-दिन अस्तबल का कड़ा पहरा देने लगे। कई महीने बीत जाने पर भी जब डाकू नहीं आया, तो बाबा भारती निश्चिंत और असावधान हो गए।
- अपाहिज का छल-कपट: एक दिन संध्या समय जब बाबा भारती सुल्तान की पीठ पर सवार होकर सैर कर रहे थे, तभी रास्ते में एक अपाहिज पेड़ की छाया में बैठकर कराहता हुआ मिला। उसने रोते हुए प्रार्थना की कि उसे पास के गाँव ‘रामायणवाला’ पहुँचा दिया जाए। दयालु बाबा भारती ने तरस खाकर उसे घोड़े पर बिठा लिया और स्वयं लगाम पकड़कर पैदल चलने लगे।
- घोड़े की छिनैती: अचानक उस अपाहिज (जो वास्तव में खड़क सिंह था) ने ज़ोरदार झटका देकर लगाम छीन ली और घोड़े पर सवार होकर तेज़ी से भागने लगा। उसने कहा कि यह घोड़ा अब वह कभी वापस नहीं देगा।
- बाबा भारती की महान प्रार्थना: बाबा भारती ने विचलित हुए बिना शांत स्वर में खड़क सिंह से केवल एक प्रार्थना की : “इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना, नहीं तो लोग किसी गरीब या लाचार पर कभी विश्वास नहीं करेंगे।”
- खड़क सिंह का हृदय परिवर्तन: रात के सन्नाटे में खड़क सिंह के कानों में बाबा भारती के वे शब्द बार-बार गूँजते रहे। उसने सोचा कि बाबा भारती ने अपने प्रिय घोड़े की चिंता न करके समाज के असहाय लोगों के विश्वास की चिंता की। वे मनुष्य नहीं, देवता हैं। पश्चाताप और आत्मग्लानि से भरकर उसने रात के अँधेरे में चुपचाप सुल्तान को लाकर बाबा के अस्तबल में वापस बाँध दिया।
- हार की जीत: प्रातःकाल जब बाबा भारती ने अस्तबल में अपने प्रिय सुल्तान को देखा, तो वे भाव-विभोर होकर उसके गले से लिपट गए और रोते हुए बोले : “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।” इस प्रकार छल से हुई डाकू की जीत हार में बदल गई और बाबा भारती की निस्वार्थ मानवता तथा सच्चाई की भव्य जीत हुई।
2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
| कठिन शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| अधीर | व्याकुल / जिसमें धैर्य न हो |
| सहसा | अचानक / एकाएक |
| करुणा | दया / कृपा भाव |
| अस्तबल | घोड़ों को रखने और बाँधने का स्थान |
| नेकी | भलाई / अच्छा और नेक कार्य |
| प्रकट | ज़ाहिर / उजागर करना |
| असावधान | लापरवाह / बेफ़िक्र |
| कंगला | कंगाल / अत्यंत निर्धन व असहाय व्यक्ति |
3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Textbook Question Answers)
प्रश्न 1. बाबा भारती को अपने घोड़े सुल्तान से कैसा लगाव था?
उत्तर: बाबा भारती को अपने घोड़े सुल्तान से वैसा ही आत्मिक और निस्वार्थ लगाव था जैसा एक माँ को अपने बेटे से और किसान को अपने लहलहाते खेत से होता है। वे अपने हाथों से उसकी खरहरा (मालिश) करते, दाना खिलाते और उसे देखे बिना उन्हें एक पल भी चैन नहीं मिलता था।
प्रश्न 2. खड़क सिंह सुल्तान को क्यों देखना चाहता था?
उत्तर: खड़क सिंह उस इलाके का सबसे प्रसिद्ध और क्रूर डाकू था। जब उसने सुल्तान की सुंदरता, अनोखे रूप, बल और उसकी शानदार चाल की प्रशंसा सुनी, तो उसका मन सुल्तान को देखने के लिए अधीर हो उठा।
प्रश्न 3. खड़क सिंह ने सुल्तान को पाने के लिए क्या चाल चली?
उत्तर: खड़क सिंह ने एक असहाय और अपाहिज व्यक्ति का छद्म वेश बनाया तथा रास्ते के किनारे वृक्ष की छाँव में बैठकर कराहने लगा। उसने बाबा भारती से दया की भीख माँगकर रामायणवाला गाँव पहुँचाने की विनती की। जैसे ही बाबा भारती ने उसे घोड़े की पीठ पर बिठाया, उसने झटका देकर लगाम छीन ली और घोड़ा लेकर भाग गया।
प्रश्न 4. बाबा भारती ने खड़क सिंह से क्या प्रार्थना की और क्यों?
उत्तर: बाबा भारती ने खड़क सिंह से प्रार्थना की कि वह इस छलपूर्ण घटना को किसी के सामने प्रकट न करे। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि यदि लोगों को इस धोखे का पता चल जाएगा, तो समाज में कोई भी व्यक्ति किसी गरीब, दुखी या अपाहिज पर विश्वास नहीं करेगा और उनकी मदद करना छोड़ देगा।
प्रश्न 5. खड़क सिंह ने सुल्तान को वापस क्यों लौटा दिया?
उत्तर: बाबा भारती के उच्च विचारों – “लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे” – ने खड़क सिंह की अंतरात्मा को झकझोर दिया। उसे अपनी नीचता पर गहरा पश्चाताप हुआ और लगा कि उसने एक सच्चे संत को धोखा दिया है। इसी आत्मग्लानि और हृदय परिवर्तन के कारण उसने रात के सन्नाटे में सुल्तान को वापस लाकर अस्तबल में बाँध दिया।
प्रश्न 6. किसने, किससे कहा?
- (क) “बाबा जी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।”
उत्तर: खड़क सिंह ने बाबा भारती से कहा। - (ख) “बाबा, इस कंगले की सुनते जाना।”
उत्तर: अपाहिज बने खड़क सिंह ने बाबा भारती से कहा। - (ग) “इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।”
उत्तर: बाबा भारती ने खड़क सिंह से कहा। - (घ) “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।”
उत्तर: बाबा भारती ने स्वयं से (अत्यंत हर्षित होकर) कहा।
4. बातचीत के लिए (Discussion Questions)
प्रश्न 1. कहानी का शीर्षक ‘हार की जीत’ क्यों रखा गया है?
उत्तर: धोखे और छल से घोड़ा छिन जाने पर बाबा भारती सांसारिक रूप से हार गए थे। परंतु उनकी महान सोच और परोपकारी भावना ने खूँखार डाकू खड़क सिंह का हृदय परिवर्तन कर दिया और डाकू ने स्वयं घोड़ा लौटा दिया। इस प्रकार डाकू की छलपूर्ण जीत हार में बदल गई और बाबा भारती की सच्चाई और नैतिकता की जीत हुई। इसलिए यह शीर्षक सर्वथा उपयुक्त है।
प्रश्न 2. यदि आप बाबा भारती की जगह होते तो खड़क सिंह से क्या कहते?
उत्तर: यदि मैं बाबा भारती की जगह होता/होती, तो मैं भी खड़क सिंह से यही कहता/कहती कि छल और कपट से प्राप्त वस्तु कभी सच्चा सुख नहीं देती और किसी असहाय के विश्वास का अनुचित लाभ उठाना सबसे बड़ा पाप है।
प्रश्न 3. अपाहिज बनकर छल करना कहाँ तक उचित है?
उत्तर: अपाहिज बनकर छल करना पूर्णतः अनुचित और पाप है। ऐसा करने से समाज में परोपकार और दया की भावना नष्ट हो जाती है तथा सच्चे लाचारों और ज़रूरतमंदों को भी लोग शंका की दृष्टि से देखने लगते हैं।
5. अनुमान और कल्पना (Imagination Questions)
प्रश्न 1. अगर खड़क सिंह घोड़ा वापस न लौटाता तो क्या होता?
उत्तर: यदि खड़क सिंह घोड़ा वापस न लौटाता, तो बाबा भारती अत्यंत दुखी रहते और समाज में लोगों का गरीबों व अपाहिजों पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाता, जिससे ज़रूरतमंदों की सहायता करने कोई आगे नहीं आता।
प्रश्न 2. यदि बाबा भारती खड़क सिंह पर गुस्सा करते या पुलिस में शिकायत करते तो क्या होता?
उत्तर: यदि बाबा भारती क्रोधित होते या पुलिस में शिकायत करते, तो खड़क सिंह प्रतिशोध की भावना से भर जाता, वह और अधिक हिंसक बन जाता और उसका कभी भी हृदय परिवर्तन न हो पाता।
6. भाषा की बात (Grammar Exercises)
प्रश्न 1. नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द पाठ में से ढूँढकर लिखिए :
| मूल शब्द | विलोम शब्द (Antonym) |
|---|---|
| सावधान | असावधान |
| प्रसन्न | अप्रसन्न |
| विश्वास | अविश्वास |
| दयालु | निर्दयी |
| हार | जीत |
| संध्या | प्रातः |
प्रश्न 2. नीचे दिए गए मूल शब्दों में ‘ता’ या ‘ई’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए :
- सुंदर + ता = सुंदरता
- प्रसन्न + ता = प्रसन्नता
- अधीर + ता = अधीरता
- सावधान + ई = सावधानी
- दयालु + ता = दयालुता
7. जीवन मूल्य (Values and Life Skills)
बाबा भारती ने अपने घोड़े के छिने जाने के व्यक्तिगत दुख से अधिक समाज के लाचारों और गरीबों पर से विश्वास उठ जाने की चिंता की। उनका मानना था कि व्यक्तिगत स्वार्थ से बड़ा समाज हित होता है।
प्रश्न 1. बाबा भारती के इस व्यवहार से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: बाबा भारती के इस उदात्त व्यवहार से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी व्यक्तिगत सुख-सुविधा और स्वार्थ से ऊपर उठकर सदैव समाज के कल्याण, मानवता और उच्च नैतिक मूल्यों के विषय में सोचना चाहिए।
प्रश्न 2. सच्चाई, दया और सद्भावना में इतनी शक्ति होती है कि वह बड़े से बड़े पापी का भी हृदय परिवर्तन कर सकती है। समझाइए।
उत्तर: बुराई का प्रतिकार बुराई से करने पर घृणा बढ़ती है। परंतु जब हम किसी के साथ निस्वार्थ भाव से दया, क्षमा और उच्च संस्कारों का व्यवहार करते हैं, तो पापी को अपनी गलती का पश्चाताप होने लगता है। बाबा भारती की करुणा और त्याग ने ही क्रूर डाकू खड़क सिंह के पत्थर दिल को पिघलाकर उसे नेक इंसान बना दिया।
कक्षा 5 भाषा माधुरी के अन्य सभी पाठों के प्रामाणिक समाधान: