DAV Board Class 5 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions
DAV Class 5 Hindi Chapter 20 कोशिश करने वालों की हार नहीं होती Solutions
Complete authentic solutions for DAV Class 5 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 20: कोशिश करने वालों की हार नहीं होती (Koshish Karne Walon Ki Haar Nahi Hoti – अमर प्रेरणादायक कविता by डॉ. हरिवंश राय ‘बच्चन’). This comprehensive study guide features the detailed stanza-by-stanza poem summary (कविता का विस्तृत सार व भावार्थ), word meanings (कठिन शब्दों के अर्थ), textbook question answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), line completion (कविता की पंक्तियाँ), discussion questions (बातचीत के लिए), imagination questions (अनुमान और कल्पना), grammar exercises (भाषा की बात: पर्यायवाची मिलान, संयुक्त व्यंजन, शब्द भेद तालिका), and life values (जीवन मूल्य) solved strictly according to DAV Education Board standards.
| कक्षा (Class) | विषय (Subject) | पाठ्यपुस्तक (Textbook) | पाठ (Chapter) | कवि (Poet) |
|---|---|---|---|---|
| कक्षा 5 (Class 5) | हिंदी (Hindi) | भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri) | पाठ 20: कोशिश करने वालों की हार नहीं होती | डॉ. हरिवंश राय ‘बच्चन’ |
1. कविता का विस्तृत सार एवं भावार्थ (Poem Summary & Meaning)
- प्रयास और निरंतरता की शक्ति: कवि प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जीवन की कठिन लहरों से भयभीत होकर नौका कभी किनारे नहीं लगती और जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करते हैं, उनकी कभी पराजय नहीं होती। जब एक नन्हीं-सी चींटी अपने मुँह में दाना दबाकर चिकनी दीवार पर चढ़ती है, तो सौ बार फिसलती है। परंतु उसके मन का अडिग विश्वास उसकी रग-रग में साहस और ऊर्जा भर देता है। बार-बार गिरकर चढ़ना और फिर चढ़कर गिरना उसे कभी बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह जानती है कि उसकी सच्ची मेहनत कभी निष्फल नहीं होती।
- धैर्य, लगन और गोताखोर का उदाहरण: गोताखोर समुद्र के अथाह जल में बार-बार डुबकियाँ लगाता है और अनेक बार खाली हाथ वापस लौट आता है। गहरे पानी में सहजता से बहुमूल्य मोती नहीं मिलते। परंतु असफलता से उसका उत्साह कम होने के बजाय दोगुना हो जाता है और अंततः उसकी मुट्ठी खाली नहीं रहती। निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
- असफलता एक चुनौती: कवि असफलता को निराशा का कारण नहीं बल्कि आत्म-विश्लेषण की एक चुनौती मानते हैं। वे कहते हैं कि जब तक पूर्ण सफलता न मिल जाए, तब तक अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करो। सुख-चैन और आलस्य को त्यागकर संघर्ष के मैदान में डटे रहो। बिना कर्म और पुरुषार्थ किए संसार में किसी की जय-जयकार नहीं होती; निरंतर जूझने और कोशिश करने वालों की अंततः विजय ही होती है।
2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
| कठिन शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| सिंधु | समुद्र / सागर / अगाध जलराशि |
| संघर्ष | कठिन मुकाबला / निरंतर जूझना |
| अखरता | बुरा लगना / खटकना |
| सहज | सरलता से / आसानी से |
| दूना | दोगुना |
| उत्साह | जोश / उमंग |
| त्यागो | छोड़ दो |
3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Textbook Solutions – Pages 109-110)
प्रश्न 1. कैसा व्यक्ति कभी हार नहीं सकता?
उत्तर: जो व्यक्ति जीवन में आने वाली कठिनाइयों और असफलताओं से घबराए बिना निरंतर कर्मठता, लगन और दृढ़ विश्वास के साथ प्रयास करता रहता है, वह कभी हार नहीं सकता।
प्रश्न 2. नन्हीं चींटी से मनुष्य क्या सीख सकता है?
उत्तर: नन्हीं चींटी से मनुष्य यह अमूल्य सीख ले सकता है कि बार-बार असफल होने और फिसलने पर भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए तथा मन में अटूट विश्वास रखकर लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
प्रश्न 3. सफलता प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर: सफलता प्राप्त करने के लिए अपनी कमियों और गलतियों का निष्पक्ष विश्लेषण करके उन्हें सुधारना, आलस्य व सुख-चैन का त्याग करना और संघर्ष के मैदान में बिना भागे डटे रहना आवश्यक है।
प्रश्न 4. गोताखोर कब सफल होता है?
उत्तर: गोताखोर तब सफल होता है जब वह खाली हाथ लौटने पर भी निराश नहीं होता, बल्कि दूने उत्साह के साथ बार-बार समुद्र की अगाध गहराइयों में उतरता है और अंततः अपनी मुट्ठी में कीमती मोती समेट कर बाहर निकलता है।
प्रश्न 5. कविता की पंक्तियाँ पूरी कीजिए :
- डुबकियाँ सिंधु में गोताखोर लगाता है,
- जा जाकर खाली हाथ लौट आता है।
- मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में,
- बढ़ता दूना उत्साह इसी हैरानी में।
4. बातचीत के लिए (Discussion Questions – Page 110)
प्रश्न 1. चींटी से हम क्या सीख सकते हैं? सोचकर बताइए।
उत्तर: चींटी से हम निरंतर कठोर परिश्रम, अटूट धैर्य, कड़ा अनुशासन, गिरकर पुनः उठ खड़े होने का अदम्य साहस और सामूहिक सहयोग की भावना सीख सकते हैं।
प्रश्न 2. नन्हीं-सी चींटी भी इतनी मेहनत क्यों करती होगी?
उत्तर: नन्हीं-सी चींटी अपने जीवन की रक्षा करने, भविष्य की विपरीत परिस्थितियों (वर्षा व शीतकाल) के लिए भोजन संचित करने और अपने समूह के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए इतनी अथक मेहनत करती है।
प्रश्न 3. क्या मनुष्य असफल होकर ही सीख सकता है? कैसे?
उत्तर: हाँ, असफलता मनुष्य की सबसे बड़ी शिक्षक होती है। असफलता मनुष्य को उसकी कमियों, लापरवाहियों और गलतियों का स्पष्ट बोध कराती है। जब मनुष्य अपनी त्रुटियों का विश्लेषण करके नए सिरे से सुधार करता है, तो वह पहले से अधिक परिपक्व, सजग और सफल बनता है।
प्रश्न 4. ‘मोती गहरे पानी में ही मिलता है’ – इस पंक्ति के माध्यम से क्या कहने की कोशिश की गई है?
उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जीवन में उच्च उपलब्धियाँ, महान सफलता और ज्ञान किनारे बैठकर नहीं मिलता; उसके लिए कठिन परिश्रम, गहन अध्ययन और जोखिम भरे संघर्ष की गहराइयों में उतरना ही पड़ता है।
5. अनुमान और कल्पना (Imagination Questions – Page 110)
प्रश्न 1. यदि आप मकड़ी होते तो अपने लिए घर कैसे बनाते?
उत्तर: यदि मैं मकड़ी होता/होती, तो दीवार के शांत कोनों पर अपने शरीर के महीन जाले से सुरक्षित व सुंदर घर बुनता/बुनती। यदि हवा या किसी कारण से जाला टूट भी जाता, तो बिना निराश हुए दूने उत्साह से पुनः नया जाला तैयार करता/करती।
प्रश्न 2. यदि आप गोताखोर होते तो आपका अनुभव कैसा होता?
उत्तर: यदि मैं गोताखोर होता/होती, तो समुद्र की अगाध नीली गहराइयों में तैरने का अनुभव अत्यंत रोमांचकारी और रहस्यमयी होता। खाली हाथ आने पर निराशा के बजाय समुद्र के अद्भुत जीवों को देखने और मोती ढूँढने की ललक से मेरा उत्साह और बढ़ जाता।
प्रश्न 3. यदि चींटी बोल सकती तो आप उससे क्या-क्या पूछते? वह क्या-क्या जवाब देती?
उत्तर:
हमारा प्रश्न: “तुम इतनी नन्हीं होकर भी अपने से भारी दाना लेकर दीवार पर बार-बार चढ़ने से थकती क्यों नहीं?”
चींटी का उत्तर: “थकावट शरीर में नहीं, मन के डर में होती है। जब लक्ष्य सामने हो, तो रुकना नहीं चाहिए; परिश्रम ही मेरा सच्चा धर्म है!”
6. भाषा की बात (Grammar Exercises – Page 111)
प्रश्न 1. समान अर्थ वाले शब्दों (पर्यायवाची शब्दों) का सही मिलान कीजिए :
| शब्द | समानार्थक शब्द |
|---|---|
| कोशिश | प्रयास |
| नौका | नाव |
| मोती | माणिक |
| रगों | नसों |
प्रश्न 2. कविता में से ‘स्व’ और ‘ट्ठ’ संयुक्त व्यंजनों वाले शब्द छाँटकर लिखिए :
- ‘स्व’ संयुक्त व्यंजन वाले शब्द : विश्वास, स्वीकार
- ‘ट्ठ’ संयुक्त व्यंजन वाला शब्द : मुट्ठी
प्रश्न 3. पाठ में से चार-चार शब्द छाँटकर तालिका पूरी कीजिए (संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण) :
| संज्ञा (Noun) | सर्वनाम (Pronoun) | क्रिया (Verb) | विशेषण (Adjective) |
|---|---|---|---|
| चींटी | उसकी | फिसलती | नन्हीं |
| नौका | तुम | गिरना | खाली |
| मोती | क्या | चढ़ना | दूना |
| सिंधु | कुछ | त्यागो | गहरे |
7. जीवन मूल्य (Values and Life Skills – Page 111)
कविता में कहा गया है कि असफलताओं को एक चुनौती की तरह स्वीकार करना चाहिए।
प्रश्न 1. असफलता को चुनौती के रूप में स्वीकार करने से क्या लाभ होगा?
उत्तर: असफलता को चुनौती मानने से व्यक्ति के मन से डर, निराशा और हीनभावना समाप्त हो जाती है। वह अपनी गलतियों का निष्पक्ष मूल्यांकन करके दोगुने उत्साह से प्रयास करता है, जिससे सफलता मिलने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाता है।
प्रश्न 2. आप अपनी किस असफलता को चुनौती की तरह स्वीकार करेंगे?
उत्तर: यदि मुझे किसी परीक्षा, खेल प्रतियोगिता, वाद-विवाद स्पर्धा या कला प्रतियोगिता में कम अंक मिलते हैं या हार का सामना करना पड़ता है, तो मैं दुखी होने के बजाय उसे अपनी कमियों को दूर करने की एक सकारात्मक चुनौती के रूप में स्वीकार करूँगा/करूँगी।
प्रश्न 3. ऐसा करने से आपको क्या लाभ होगा?
उत्तर: ऐसा करने से मेरा मनोबल और आत्मविश्वास दृढ़ होगा, मेरी कमजोरियाँ दूर होंगी, मेरा दृष्टिकोण सकारात्मक बनेगा और मैं अगली बार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके निश्चित रूप से विजय प्राप्त कर सकूँगा/सकूँगी।
कक्षा 5 भाषा माधुरी के अन्य सभी पाठों के प्रामाणिक समाधान: