DAV Board Class 5 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions
DAV Class 5 Hindi Chapter 15 अँधेर नगरी Solutions
Complete authentic solutions for DAV Class 5 Hindi Bhasha Madhuri (भाषा माधुरी) Chapter 15: अँधेर नगरी (Andher Nagari – नाटक by भारतेंदु हरिश्चंद्र). This comprehensive study guide features the detailed dramatic plot summary (नाटक का विस्तृत कथानक), character introductions (पात्र-परिचय), word meanings (कठिन शब्दों के अर्थ), textbook question answers (अभ्यास प्रश्न-उत्तर), chain of blame table (दोष मढ़ने की श्रृंखला), discussion questions (बातचीत के लिए), imagination questions (अनुमान और कल्पना), grammar exercises (भाषा की बात: विशेषण-विशेष्य मिलान, रिक्त स्थान), and life values (जीवन मूल्य) solved strictly according to DAV Education Board curriculum.
| कक्षा (Class) | विषय (Subject) | पाठ्यपुस्तक (Textbook) | पाठ (Chapter) | नाटककार (Playwright) |
|---|---|---|---|---|
| कक्षा 5 (Class 5) | हिंदी (Hindi) | भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri) | पाठ 15: अँधेर नगरी | भारतेंदु हरिश्चंद्र |
1. नाटक का विस्तृत सार / कथानक (Detailed Plot Summary)
आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित अमर हास्य-व्यंग्य नाटक ‘अँधेर नगरी’ मूर्खतापूर्ण शासन व्यवस्था, अविवेक और लालच के दुष्परिणामों पर तीखा प्रहार करता है:
- पात्र-परिचय: महंतजी, नारायणदास व गोवर्धनदास (महंत के दो शिष्य), चौपट राजा (अँधेर नगरी का मूर्ख शासक), कुंजड़िन, हलवाई, फरियादी, कल्लू बनिया, कारीगर, चूनेवाला, भिश्ती, कसाई, गड़रिया, कोतवाल और सिपाही।
- पहला दृश्य (नगर का बाज़ार): महंतजी अपने दो शिष्यों के साथ एक नए नगर में पहुँचते हैं। वे नारायणदास को पूर्व दिशा में और गोवर्धनदास को पश्चिम दिशा में भिक्षा माँगने भेजते हैं। बाज़ार में कुंजड़िन और हलवाई से पूछने पर गोवर्धनदास को पता चलता है कि यहाँ भाजी भी टके सेर और बढ़िया मिठाई (खाजा) भी टके सेर ही बिकती है। नगर का नाम ‘अँधेर नगरी’ और राजा का नाम ‘चौपट राजा’ है। गोवर्धनदास सात पैसों की भिक्षा से साढ़े तीन सेर मिठाई खरीदकर लाता है। यह सुनकर महंतजी समझ जाते हैं कि जहाँ गुण और अवगुण में कोई भेद न हो, वहाँ रहना प्राणों के लिए संकटकारी है। महंतजी तुरंत नगर छोड़ देते हैं, परंतु गोवर्धनदास लालच में आकर वहीं रुक जाता है।
- दूसरा दृश्य (दरबार का हास्यास्पद न्याय): चौपट राजा के दरबार में एक फरियादी रोता हुआ आता है कि कल्लू बनिए की कच्ची दीवार गिरने से उसकी बकरी उसके नीचे दबकर मर गई। राजा न्याय करने के नाम पर दोष मढ़ने का खेल शुरू करता है :
- कल्लू बनिया दोष कारीगर पर मढ़ता है।
- कारीगर दोष चूनेवाले पर लगाता है।
- चूनेवाला दोष भिश्ती पर डालता है कि उसने चूने में पानी ज़्यादा डाल दिया।
- भिश्ती दोष कसाई पर मढ़ता है कि उसने बड़ी मशक बना दी थी।
- कसाई दोष गड़रिए पर लगाता है कि उसने टके में बड़ी भेड़ बेची।
- गड़रिया दोष कोतवाल पर डालता है कि उसकी धूमधाम वाली सवारी की भीड़ में उसने बड़ी भेड़ बेच दी।
- तीसरा दृश्य (फाँसी और गुरु की चतुराई): फाँसी के समय कोतवाल की गर्दन पतली होने के कारण फंदा बहुत बड़ा निकलता है। राजा आदेश देता है कि बकरी मरने की सजा पूरी करने के लिए नगर से किसी भी मोटे आदमी को पकड़कर फाँसी दे दी जाए। सिपाही मिठाई खाकर खूब मोटे हुए गोवर्धनदास को पकड़ लेते हैं। मृत्यु को निकट देखकर गोवर्धनदास अपने गुरु महंतजी को याद करता है। महंतजी समय पर पहुँचकर गोवर्धनदास के कान में एक गुप्त युक्ति फुसफुसाते हैं। इसके बाद गुरु और शिष्य आपस में पहले फाँसी चढ़ने के लिए लड़ने लगते हैं। जब राजा कारण पूछता है, तो महंतजी बताते हैं कि इस पावन शुभ घड़ी में जो फाँसी चढ़ेगा, वह सीधा चक्रवर्ती राजा बनकर स्वर्ग जाएगा। स्वर्ग जाने के लालच में मूर्ख चौपट राजा स्वयं फाँसी के फंदे पर लटक जाता है और नगरवासियों को उसके कुशासन से मुक्ति मिल जाती है।
2. कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
| कठिन शब्द | अर्थ (Meaning in Hindi) |
|---|---|
| टका | पुराने समय का ताँबे का सिक्का (आधा आना) |
| सेर | पुराने समय में वजन की इकाई (लगभग 933 ग्राम) |
| भिश्ती | चमड़े की मशक में पानी भरकर ढोने वाला व्यक्ति |
| मशक | चमड़े का बना बड़ा थैला जिसमें पानी भरा जाता है |
| नाहक | बिना किसी कारण के / व्यर्थ ही |
| हुज्जत | बहस / जुबानी तकरार या झगड़ा |
| कुंजड़िन | सब्ज़ी बेचने वाली स्त्री |
3. अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Textbook Solutions)
प्रश्न 1. अँधेर नगरी में सारी चीजें कितने में मिलती थीं?
उत्तर: अँधेर नगरी में सभी प्रकार की वस्तुएँ (सब्ज़ी, भाजी से लेकर खाजा व मिठाइयों तक) एक ही भाव ‘टके सेर’ (एक टके में एक सेर) मिलती थीं।
प्रश्न 2. गोवर्धनदास अँधेर नगरी में ही क्यों रहना चाहता था?
उत्तर: गोवर्धनदास अँधेर नगरी में इसलिए रुकना चाहता था क्योंकि वहाँ सभी स्वादिष्ट चीजें व मिठाइयाँ टके सेर बहुत सस्ती मिलती थीं, और वह कम भिक्षा में भी पेट भरकर मौज-मस्ती से मिठाई खाना चाहता था।
प्रश्न 3. फरियादी राजा के पास क्या फरियाद लेकर आया?
उत्तर: फरियादी राजा के पास यह शिकायत लेकर आया कि कल्लू बनिए की कच्ची दीवार गिरने के कारण उसकी दुधारू बकरी उसके नीचे दबकर मर गई है, इसलिए उसे राजा से न्याय दिलाया जाए।
प्रश्न 4. सिपाही गोवर्धनदास को क्यों पकड़ लेते हैं?
उत्तर: कोतवाल की गर्दन दुबली-पतली होने के कारण फाँसी का फंदा ढीला पड़ गया था। राजा ने आदेश दिया कि बकरी मरने के दंड को पूरा करने के लिए नगर से किसी भी मोटे आदमी को फाँसी पर लटकाया जाए। गोवर्धनदास दिन-रात मिठाई खाकर बहुत मोटा हो गया था, इसलिए सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया।
प्रश्न 5. महंत ने गोवर्धनदास को कैसे बचाया?
उत्तर: महंतजी ने अपनी अद्भुत सूझ-बूझ से राजा को यह विश्वास दिला दिया कि इस दुर्लभ शुभ घड़ी में जो भी फाँसी पर चढ़ेगा, वह सीधा स्वर्ग जाकर चक्रवर्ती राजा बनेगा। स्वर्ग के लालच में मूर्ख राजा स्वयं फाँसी पर लटक गया और गोवर्धनदास सकुशल बच गया।
दोष मढ़ने की श्रृंखला
प्रश्न 6. एकांकी ‘अँधेर नगरी’ में सभी बकरी मरने का दोष दूसरे पर थोपते रहते हैं। लिखिए, किसने किसे और क्यों दोषी बनाया :
| दोष लगाने वाला | किसे दोषी बनाया | दोष लगाने का कारण |
|---|---|---|
| (क) फरियादी | कल्लू बनिया | उसकी दीवार के नीचे बकरी दबकर मर गई। |
| (ख) कल्लू बनिया | कारीगर | कारीगर ने ऐसी कच्ची दीवार बनाई जो गिर पड़ी। |
| (ग) कारीगर | चूनेवाला | चूनेवाले ने ऐसा खराब चूना बनाया जिससे दीवार कमज़ोर रही। |
| (घ) चूनेवाला | भिश्ती | भिश्ती ने चूने के गारे में बहुत ज़्यादा पानी मिला दिया। |
| (ङ) भिश्ती | कसाई | कसाई ने खाल की इतनी बड़ी मशक बनाई कि उसमें पानी ज़्यादा आ गया। |
| (च) कसाई | गड़रिया | गड़रिए ने टके की ऐसी बड़ी भेड़ बेची जिससे मशक बड़ी बन गई। |
| (छ) गड़रिया | कोतवाल | कोतवाल की धूमधाम वाली सवारी आने से घबराहट में बड़ी भेड़ बिक गई। |
4. बातचीत के लिए (Discussion Questions)
प्रश्न 1. महंत अँधेर नगरी में क्यों नहीं रहना चाहते थे? क्या आप उनसे सहमत हैं?
उत्तर:
• कारण: महंतजी बुद्धिमान और दूरदर्शी थे। वे जानते थे कि जिस नगरी में भाजी और मिठाई एक ही भाव बिकती हो, वहाँ का राजा विवेकहीन और शासन अन्यायपूर्ण होता है; ऐसे स्थान पर कभी भी निर्दोष व्यक्ति विपत्ति में फँस सकता है।
• सहमति: हाँ, हम महंतजी के निर्णय से शत-प्रतिशत सहमत हैं क्योंकि मूर्ख शासन में किसी भी समय प्राण संकट में पड़ सकते हैं।
प्रश्न 2. महंत ने अपने शिष्यों को अलग-अलग दिशाओं में क्यों भेजा होगा?
उत्तर: महंतजी ने अपने दोनों शिष्यों को दो विपरीत दिशाओं में इसलिए भेजा ताकि वे नगर के अलग-अलग क्षेत्रों से भिक्षा माँग सकें और ठाकुर जी के भोग तथा सबके भोजन के लिए पर्याप्त अन्न एकत्र हो सके।
प्रश्न 3. ‘भाजी’ और ‘खाजा’ क्या है?
उत्तर:
• भाजी: हरी साग-सब्ज़ी या पकी हुई साधारण तरकारी को ‘भाजी’ कहा जाता है।
• खाजा: मैदा और चीनी की चाशनी से बनने वाली एक पारंपरिक, खस्ता और मीठी भारतीय मिठाई को ‘खाजा’ कहते हैं।
5. अनुमान और कल्पना (Imagination Questions)
प्रश्न 1. गोवर्धनदास ने सात पैसे में कौन-कौन-सी मिठाइयाँ खरीदी होंगी?
उत्तर: गोवर्धनदास ने सात पैसे में साढ़े तीन सेर मिठाई खरीदी थी। अनुमान है कि उसने खाजा, जलेबी, बालूशाही, बेसन के लड्डू और हलवा जैसी मिठाइयाँ खरीदी होंगी।
प्रश्न 2. महंत ने गोवर्धनदास को क्या उपदेश दिया होगा?
उत्तर: महंतजी ने गोवर्धनदास के कान में यह गुप्त युक्ति बताई होगी : “तुम फाँसी पर लटकने की ज़िद करो और मैं भी फाँसी पर लटकने का हठ करूँगा। जब राजा पूछेगा, तो हम कहेंगे कि इस शुभ घड़ी में मरने वाला सीधा स्वर्ग जाकर राज करेगा, जिससे मूर्ख राजा स्वयं फाँसी पर चढ़ जाएगा।”
प्रश्न 3. एकांकी का शीर्षक ‘अँधेर नगरी’ क्यों रखा गया होगा?
उत्तर: इस एकांकी का शीर्षक ‘अँधेर नगरी’ इसलिए रखा गया क्योंकि उस राज्य में न्याय, बुद्धि और मर्यादा का घोर अंधकार था। राजा निपट मूर्ख था, गुण और अवगुण बराबर समझे जाते थे और बेकसूर व्यक्ति को फाँसी दी जा रही थी।
प्रश्न 4. आप इस एकांकी के लिए कोई दो शीर्षक बताइए। साथ ही यह भी बताइए कि आपने ये शीर्षक क्यों चुने?
उत्तर:
1. शीर्षक 1: ‘मूर्ख राजा और चतुर गुरु’ – क्योंकि नाटक का अंत गुरु की बुद्धिमत्ता और राजा की मूर्खता से ही निर्धारित होता है।
2. शीर्षक 2: ‘जैसी नगरी वैसा राजा’ – क्योंकि यह शीर्षक अंधेर शासन और बिना सोचे-समझे किए जाने वाले कुन्याय को भलीभाँति उजागर करता है।
6. भाषा की बात (Grammar Exercises)
प्रश्न 1. नीचे कुछ विशेषण दिए गए हैं। उन्हें उनके आगे दिए गए उचित विशेष्य से मिलाइए :
| विशेषण (Adjective) | उचित विशेष्य (Noun) |
|---|---|
| सुंदर | नगर |
| टका सेर | भाजी |
| चौपट | राजा |
| अँधेर | नगरी |
| शुभ | घड़ी |
| बड़ी | भेड़ |
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक से उपयुक्त शब्द चुनकर कीजिए :
- (क) नगर तो बड़ा सुंदर है पर भिक्षा भी सुंदर मिले तो बड़ा आनंद हो। (भोग, रुपए, कपड़े, भिक्षा)
- (ख) सात पैसे भीख में मिले थे उसी से साढ़े तीन सेर मिठाई मोल ली है। (तीन सेर, साढ़े तीन किलो, साढ़े तीन सेर)
- (ग) इस समय ऐसी शुभ घड़ी में जो मरेगा सीधा स्वर्ग जाएगा। (सीधा शहर, सीधा स्वर्ग, सीधा अपने घर, नरक)
7. जीवन मूल्य (Values and Life Skills)
प्रश्न 1. स्वर्ग जाने के लालच में राजा स्वयं फाँसी पर चढ़ गया। क्या यह न्याय सही था?
उत्तर: व्यक्तिगत दृष्टि से राजा का यह कृत्य उसकी घोर अज्ञानता और मूर्खता का प्रतीक था। परंतु अँधेर नगरी की पीड़ित प्रजा के दृष्टिकोण से यह स्वाभाविक न्याय था, क्योंकि अत्याचारी और मूर्ख शासक का अंत उसी की मूर्खता से हो गया और निर्दोष गोवर्धनदास के प्राण बच गए।
प्रश्न 2. आपकी समझ से बकरी के मरने का वास्तविक दोषी कौन था? कारण भी बताइए।
उत्तर: हमारी समझ से बकरी के मरने का वास्तविक दोषी ‘कोई नहीं’ था, क्योंकि अत्यधिक वर्षा के कारण पुरानी दीवार का गिरना एक प्राकृतिक दुर्घटना थी। यदि मानवीय लापरवाही देखी जाए तो कारीगर और चूनेवाला कमज़ोर निर्माण के लिए ज़िम्मेदार थे, परंतु किसी की भी नीयत बकरी की हत्या करने की नहीं थी। मूर्ख राजा ने अनर्गल बहस को न्याय समझ लिया।
कक्षा 5 भाषा माधुरी के अन्य सभी पाठों के प्रामाणिक समाधान: