Class 6 Maths Chapter 1 in Hindi PDF: गणित में पैटर्न (गणित प्रकाश)

कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 1, गणित में पैटर्न: यह अध्याय प्रकृति, घरों और विद्यालयों में दिखने वाले गणितीय पैटर्नों की खोज तथा उनके कारणों के स्पष्टीकरण के बारे में है । इसमें खरीदारी करने, खाना बनाने, गेंद फेंकने, सूर्य, चंद्रमा और तारों की गति तथा रॉकेट और जीनोम जैसे उदाहरणों और गतिविधियों का उपयोग किया गया है ।

कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 1 (गणित में पैटर्न): मुख्य बिंदु

1.1 गणित क्या है? गणित को पैटर्नों की खोज और उनके अस्तित्व के कारणों का स्पष्टीकरण माना जाता है । तारों, ग्रहों और उपग्रहों की गति के पैटर्नों को समझकर मानव ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत विकसित किया और चंद्रमा व मंगल पर रॉकेट भेजे ।

1.2 संख्याओं में पैटर्न पूर्ण संख्याओं (0, 1, 2, 3, 4, …) के पैटर्नों का अध्ययन करने वाली गणित की शाखा को संख्या सिद्धांत कहा जाता है । इसमें दिए गए प्रमुख संख्या अनुक्रमों में विषम संख्याएँ (1, 3, 5, 7, …), वर्ग संख्याएँ (1, 4, 9, 16, …) और घन संख्याएँ शामिल हैं ।

1.4 संख्या अनुक्रमों के बीच संबंध 1 से प्रारंभ करके विषम संख्याओं को जोड़ने पर सदैव वर्ग संख्याएँ प्राप्त होती हैं, जैसे 1 + 3 = 4 और 1 + 3 + 5 = 9 । इसी प्रकार गणन संख्याओं को ऊपर और नीचे जोड़ने (जैसे 1 + 2 + 3 + 2 + 1 = 9) से भी वर्ग संख्याएँ मिलती हैं ।

1.5 आकारों में पैटर्न गणित की वह शाखा जिसमें आकारों में पैटर्नों का अध्ययन किया जाता है, उसे ज्यामिति कहते हैं । इसमें सम बहुभुज (जैसे समत्रिभुज, वर्ग, पंचभुज), संपूर्ण आलेख और कोच हिमकण जैसे आकार अनुक्रम शामिल हैं ।

अध्याय 1 के अभ्यास

  • विद्यार्थी सारणी में दिए गए प्रत्येक संख्या अनुक्रम को उसकी अगली तीन संख्याओं सहित अपनी नोटबुक में पुनः लिखते हैं और अनुक्रम बनाने वाले नियम को अपने शब्दों में व्यक्त करते हैं ।
  • विद्यार्थी 36 को त्रिभुजाकार और वर्गाकार दोनों रूपों में बिंदुओं के द्वारा व्यवस्थित करके अपनी नोटबुक में चित्र बनाते हैं ।
  • विद्यार्थी 1, 7, 19, 37 जैसे षड्भुजाकार (hexagonal) संख्या अनुक्रम को अपनी नोटबुक में बनाकर अगली संख्या ज्ञात करते हैं ।

कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 1 के प्रश्न-उत्तर (हल)

प्रश्न 1. षड्भुजाकार (hexagonal) संख्याओं के अनुक्रम 1, 7, 19, 37, … में अगली संख्या क्या होगी?
उत्तर: पदों का अंतर देखने पर: 7 – 1 = 6
19 – 7 = 12
37 – 19 = 18
अंतर में 6 की वृद्धि हो रही है, अतः अगला अंतर = 18 + 6 = 24 होगा
अगली संख्या = 37 + 24 = 61।

प्रश्न 2. प्रथम 10 विषम संख्याओं का योग क्या है?
उत्तर: प्रथम 10 विषम संख्याएँ: 1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17, 19 हैं
योग = 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 + 17 + 19 = 100
सूत्रानुसार n विषम संख्याओं का योग = n² होता है, अतः 10² = 100।

प्रश्न 3. प्रथम 100 विषम संख्याओं का योग क्या है?
उत्तर: सूत्रानुसार प्रथम n विषम संख्याओं का योग = n² होता है
यहाँ n = 100 है
योग = 100² = 100 × 100 = 10000।

प्रश्न 4. अनुक्रम 1 + 2 + 3 + … + 99 + 100 + 99 + … + 3 + 2 + 1 का मान क्या होगा?
उत्तर: गणन संख्याओं को ऊपर और फिर नीचे जोड़ने का नियम: 1 से n तक जाकर वापस 1 तक घटने पर योग = n² होता है
यहाँ उच्चतम संख्या n = 100 है
मान = 100² = 10000।

प्रश्न 5. जब आप सभी '1' वाले अनुक्रम को ऊपर की ओर जोड़ना प्रारंभ करते हैं, तब आपको कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: योग की गणना करने पर: 1 = 1
1 + 1 = 2
1 + 1 + 1 = 3
1 + 1 + 1 + 1 = 4
प्राप्त अनुक्रम 1, 2, 3, 4, 5, … है, जिसे गणन संख्याएँ (Counting numbers) कहते हैं।

प्रश्न 6. जब आप सभी '1' वाले अनुक्रम को ऊपर और नीचे जोड़ते हैं, तब कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: योग की गणना करने पर: 1 = 1
1 + 1 + 1 = 3
1 + 1 + 1 + 1 + 1 = 5
1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 = 7
प्राप्त अनुक्रम 1, 3, 5, 7, 9, … है, जिसे विषम संख्याएँ (Odd numbers) कहते हैं।

प्रश्न 7. जब आप गणन संख्याओं को ऊपर की ओर जोड़ना प्रारंभ करते हैं, तब आपको कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: योग की गणना करने पर: 1 = 1
1 + 2 = 3
1 + 2 + 3 = 6
1 + 2 + 3 + 4 = 10
1 + 2 + 3 + 4 + 5 = 15
प्राप्त अनुक्रम 1, 3, 6, 10, 15, … है, जिसे त्रिभुजाकार संख्याएँ (Triangular numbers) कहते हैं।

प्रश्न 8. जब आप क्रमागत त्रिभुजाकार संख्याओं के युग्मों को जोड़ते हैं (जैसे 1 + 3, 3 + 6, 6 + 10, 10 + 15), तब कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: योग की गणना करने पर: 1 + 3 = 4
3 + 6 = 9
6 + 10 =Q: षड्भुजाकार (hexagonal) संख्याओं के अनुक्रम 1, 7, 19, 37, … में अगली संख्या क्या होगी? || A: पदों के अंतर का क्रम 6, 12, 18 है
अगला अंतर 18 + 6 = 24 होगा
अतः अगली संख्या = 37 + 24 = 61।

प्रश्न 9. प्रथम 100 विषम संख्याओं का योग क्या होगा?
उत्तर: सूत्रानुसार प्रथम n विषम संख्याओं का योग = n² होता है
यहाँ n = 100 है
अतः योग = 100² = 10000।

प्रश्न 10. व्यंजक 1 + 2 + 3 + … + 99 + 100 + 99 + … + 3 + 2 + 1 का मान क्या होगा?
उत्तर: 1 से n तक जाकर वापस 1 तक घटने वाले योग का नियम n² होता है
यहाँ उच्चतम संख्या n = 100 है
अतः मान = 100² = 10000।

प्रश्न 11. जब आप सभी '1' वाले अनुक्रम को ऊपर की ओर जोड़ते हैं, तब कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: अनुक्रम का योग 1, 2, 3, 4, 5, … प्राप्त होता है
इसे गणन संख्याएँ (Counting numbers) कहते हैं।

प्रश्न 12. जब आप गणन संख्याओं को ऊपर की ओर जोड़ना प्रारंभ करते हैं, तब कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: योग करने पर 1, 3, 6, 10, 15, … प्राप्त होता है
इसे त्रिभुजाकार संख्याएँ (Triangular numbers) कहते हैं।

प्रश्न 13. जब आप क्रमागत त्रिभुजाकार संख्याओं के युग्मों (1+3, 3+6, 6+10, 10+15) को जोड़ते हैं, तब कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर: योग करने पर 4, 9, 16, 25, … प्राप्त होता है
यह वर्ग संख्याओं (Square numbers) का अनुक्रम है।

प्रश्न 14. सम बहुभुजों के आकार अनुक्रम में भुजाओं की संख्या किस अनुक्रम द्वारा दी जाती है?
उत्तर: सम बहुभुजों में भुजाओं की संख्या 3, 4, 5, 6, 7, 8, … होती है
यह 3 से प्रारंभ होने वाली गणन संख्याओं का अनुक्रम है।

प्रश्न 15. कोच हिमकण (Koch snowflake) के आकार अनुक्रम में रेखाखंडों की संख्या का संगत अनुक्रम क्या है?
उत्तर: कोच हिमकण के रेखाखंडों की संख्या का अनुक्रम 3, 12, 48, … होता है
यह अनुक्रम 4 की घात का तीन गुना (3 × 4ⁿ⁻¹) है।

कक्षा 6 अध्याय 1 PDF ऑनलाइन पढ़ें

अन्य अध्याय

FAQ

संख्या सिद्धांत क्या है?
गणित की वह शाखा जिसमें पूर्ण संख्याओं (0, 1, 2, 3, 4, …) के पैटर्नों का अध्ययन किया जाता है, उसे संख्या सिद्धांत कहते हैं । इसमें विषम संख्याओं, वर्ग संख्याओं और त्रिभुजाकार संख्याओं जैसे अनुक्रमों का विश्लेषण किया जाता है ।

विषम संख्याओं को जोड़ने पर कौन-सा पैटर्न प्राप्त होता है?
1 से शुरू करके विषम संख्याओं को जोड़ने पर सदैव वर्ग संख्याएँ प्राप्त होती हैं, जैसे 1 + 3 = 4 और 1 + 3 + 5 = 9 । इसे वर्गाकार बिंदु ग्रिड में बिंदुओं को व्यवस्थित करके चित्र द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है ।

ज्यामिति क्या है और इसमें किस प्रकार के आकार अनुक्रम आते हैं?
गणित की वह शाखा जिसमें आकारों में पैटर्नों का अध्ययन किया जाता है, ज्यामिति कहलाती है । इसमें सम बहुभुज (जैसे समत्रिभुज, वर्ग, पंचभुज) और कोच हिमकण (Koch snowflake) जैसे आकार अनुक्रम शामिल होते हैं ।

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