Class 6 Maths Chapter 9 in Hindi PDF: सममिति (गणित प्रकाश)

कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9, सममिति: यह अध्याय समतल आकृतियों में सममिति, सममिति की रेखा (परावर्तनीय सममिति) और घूर्णन सममिति की अवधारणाओं को समझने के बारे में है। इसमें तितली, फूल, फिरकी, रंगोली, ताजमहल, गोपुरम, बादलों, इंक-ब्लॉट डेविल्स (स्याही के धब्बे), पंचिंग मशीन और पवन-चक्की जैसे उदाहरणों व गतिविधियों का उपयोग किया गया है।

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कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9 (सममिति): मुख्य बिंदु

9.1 सममिति की रेखा किसी आकृति को बिंदुकित रेखा के अनुदिश मोड़ने पर यदि उसका एक आधा भाग दूसरे आधे भाग को पूर्णतः आच्छादित कर लेता है, तो वह सममिति की रेखा कहलाती है। उदाहरण के लिए, नीले रंग के त्रिभुज में सममिति की रेखा होती है जबकि बादलों की आकृति में कोई सममिति नहीं पाई जाती।

एक से अधिक सममिति की रेखाओं की आकृतियाँ वर्गाकार कागज़ को लंबवत, क्षैतिज और दो विकर्णों के अनुदिश मोड़ने पर उसमें 4 सममिति की रेखाएँ प्राप्त होती हैं। इसके विपरीत साधारण आयताकार कागज़ को विकर्ण के अनुदिश मोड़ने पर दोनों भाग एक-दूसरे को पूर्णतः नहीं ढकते।

सममिति की रेखाओं वाले आकार बनाना इंक-ब्लॉट डेविल्स गतिविधि में कागज़ को आधा मोड़कर स्याही की बूँदें छिड़कने से सममित पैटर्न बनते हैं। इसके अलावा पंचिंग मशीन से मोड़े गए कागज़ में छेद करके तथा कागज़ को मोड़कर व काटकर सजावटी सममित आकृतियाँ बनाई जाती हैं।

9.2 घूर्णन सममिति कागज़ की पवन-चक्की को उसके केंद्र के परितः 90° के कोण पर घुमाने पर वह ठीक पहले जैसी दिखाई देती है, जिसे घूर्णन सममिति कहते हैं। इसमें घूर्णन का एक निश्चित केंद्र होता है और 90°, 180°, 270° तथा 360° इसके सममिति के कोण हैं।

अध्याय 9 के अभ्यास

  • विद्यार्थी पंचिंग मशीन द्वारा मोड़े गए चौकोर कागज़ की शीट में किए गए छेदों की स्थिति देखकर सममिति की रेखा की पहचान करते हैं।
  • विद्यार्थी कागज़ को लंबवत तथा क्षैतिज मोड़ पर काटकर खोलने के बाद बनने वाले छेदों के आकार का पूर्वानुमान लगाते हैं और उसे सत्यापित करते हैं।
  • विद्यार्थी अशोक चक्र, दिल्ली के नए संसद भवन और टाइल्स के खेल में सममिति की रेखाओं तथा घूर्णन सममिति के कोणों की गणना करते हैं।

कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9 के प्रश्न-उत्तर (हल)

प्रश्न 1. सममिति की रेखा (या सममिति का अक्ष) किसे कहते हैं?
उत्तर: वह रेखा जो किसी समतल आकृति को दो भागों में इस प्रकार विभाजित करती है कि उस रेखा के अनुदिश मोड़ने पर दोनों भाग परस्पर एक-दूसरे को पूर्णतः ढक (आच्छादित कर) लें, आकृति की सममिति की रेखा या अक्ष कहलाती है।

प्रश्न 2. एक वर्ग में सममिति की कुल कितनी रेखाएँ होती हैं?
उत्तर: एक वर्ग में सममिति की कुल 4 रेखाएँ होती हैं
इनमें एक ऊर्ध्वाधर रेखा, एक क्षैतिज रेखा और दो विकर्णों के अनुदिश रेखाएँ शामिल हैं।

प्रश्न 3. घूर्णन सममिति में 'घूर्णन का केंद्र' और 'सममिति का कोण' किसे कहते हैं?
उत्तर: घूर्णन सममिति में वह निश्चित बिंदु जिसके परितः आकृति को घुमाया जाता है, घूर्णन का केंद्र कहलाता है
तथा वह न्यूनतम कोण जिस पर आकृति को घुमाने पर वह ठीक अपनी प्रारंभिक स्थिति जैसी दिखाई देती है, सममिति का कोण (घूर्णन कोण) कहलाता है।

प्रश्न 4. चार भुजाओं वाली पवन-चक्की (windmill) के लिए सममिति के कौन-कौन से कोण होते हैं?
उत्तर: चार भुजाओं वाली पवन-चक्की के लिए सममिति के 4 कोण होते हैं
ये कोण 90º (चौथाई चक्कर), 180º (आधा चक्कर), 270º (तीन चौथाई चक्कर) और 360º (पूरा चक्कर) हैं।

प्रश्न 5. तीन किरण-संबंधी भुजाओं (radial arms) वाली आकृति में घूर्णन सममिति होने के लिए दो आसन्न किरणों के बीच का कोण कितना होना चाहिए?
उत्तर: एक पूर्ण चक्कर का कोण = 360º
तीन समान भागों में विभाजन = 360º ÷ 3 = 120º
अतः तीन किरण-संबंधी भुजाओं वाली आकृति में घूर्णन सममिति हेतु आसन्न किरणों के बीच का कोण 120º होना चाहिए।

प्रश्न 6. यदि किसी आकृति में सममिति का न्यूनतम कोण 60º है, तो इस आकृति के अन्य सममिति कोण क्या होंगे?
उत्तर: सममिति के कोण न्यूनतम कोण के गुणज होते हैं
60º के गुणज = 60º × 1, 60º × 2, 60º × 3, 60º × 4, 60º × 5, 60º × 6
अतः इसके अन्य सममिति कोण 120º, 180º, 240º, 300º और 360º हैं।

प्रश्न 7. क्या घूर्णन सममिति वाली ऐसी आकृति प्राप्त हो सकती है जिसका न्यूनतम सममिति कोण 17º हो?
उत्तर: नहीं, ऐसा संभव नहीं है
क्योंकि घूर्णन सममिति का न्यूनतम कोण 360º का पूर्ण भाजक (गुणनखंड) होना चाहिए
360º को 17 से विभाजित करने पर शेषफल बचता है (360 ÷ 17 = 21.176…), अतः 17º न्यूनतम सममिति कोण नहीं हो सकता।

प्रश्न 8. अशोक चक्र में सममिति की कितनी रेखाएँ और घूर्णन सममिति के कितने कोण होते हैं?
उत्तर: अशोक चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं
अतः इसमें सममिति की 24 रेखाएँ होती हैं
तथा घूर्णन सममिति का न्यूनतम कोण = 360º ÷ 24 = 15º होने के कारण इसमें 15º के गुणज वाले सममिति के कुल 24 कोण होते हैं।

प्रश्न 9. नियमित बहुभुजों (समबहुभुजों) में भुजाओं की संख्या और सममिति की रेखाओं की संख्या में क्या संबंध होता है?
उत्तर: प्रत्येक नियमित बहुभुज में सममिति की रेखाओं की संख्या उसकी भुजाओं की संख्या के बराबर होती है
जैसे समबाहु त्रिभुज में 3, वर्ग में 4, समपंचभुज में 5 तथा समषट्भुज में 6 सममिति की रेखाएँ होती हैं
इससे प्राप्त संख्या अनुक्रम 3, 4, 5, 6, … है।

प्रश्न 10. कोच हिमकण (Koch snowflake) की आकृति में सममिति की कितनी रेखाएँ और सममिति के कितने कोण होते हैं?
उत्तर: कोच हिमकण में सममिति की 6 रेखाएँ होती हैं
तथा इसमें घूर्णन सममिति के 6 कोण (न्यूनतम कोण = 360º ÷ 6 = 60º, तथा 120º, 180º, 240º, 300º, 360º) होते हैं।

प्रश्न 11. एक वृत्त में परावर्तन सममिति की कितनी रेखाएँ और घूर्णन सममिति के कितने कोण होते हैं?
उत्तर: वृत्त का प्रत्येक व्यास उसकी सममिति की रेखा होता है, इसलिए वृत्त में अपरिमित (अनंत) सममिति की रेखाएँ होती हैं
इसी प्रकार वृत्त को केंद्र के परितः किसी भी कोण पर घुमाने पर वह स्वयं के संपाती रहता है, अतः इसके सममिति के अनंत कोण होते हैं।

प्रश्न 12. समान भुजाओं और समान कोणों वाले एक त्रिभुज (समबाहु त्रिभुज) तथा एक षट्भुज (समषट्भुज) में सममिति की कितनी-कितनी रेखाएँ होती हैं?
उत्तर: समान भुजाओं और समान कोणों वाले त्रिभुज (समबाहु त्रिभुज) में सममिति की 3 रेखाएँ होती हैं
तथा समान भुजाओं और समान कोणों वाले षट्भुज (समषट्भुज) में सममिति की 6 रेखाएँ होती हैं।

कक्षा 6 अध्याय 9 PDF ऑनलाइन पढ़ें

अन्य अध्याय

FAQ

सममिति की रेखा (Line of Symmetry) किसे कहते हैं?
जब कोई रेखा किसी आकृति को दो ऐसे भागों में विभाजित करती है जो मोड़ने पर परस्पर एक-दूसरे को पूर्णतः ढक लेते हैं, तो उसे सममिति की रेखा या अक्ष कहते हैं। जैसे वर्ग में 4 और आयत में 2 सममिति की रेखाएँ होती हैं।

घूर्णन सममिति (Rotational Symmetry) क्या है?
जब किसी आकृति को उसके केंद्र के परितः 360° से कम कोण पर घुमाने पर वह अपनी प्रारंभिक स्थिति जैसी ही दिखाई देती है, तो उसमें घूर्णन सममिति होती है। वह बिंदु जिसके परितः आकृति घूमती है, घूर्णन का केंद्र कहलाता है।

एक वृत्त में सममिति की रेखाएँ और घूर्णन सममिति के कोण कितने होते हैं?
एक वृत्त का प्रत्येक व्यास उसकी सममिति की रेखा होता है, इसलिए इसमें अपरिमित (अनंत) सममिति की रेखाएँ होती हैं। इसी प्रकार वृत्त को केंद्र के परितः किसी भी कोण पर घुमाने पर वह स्वयं के संपाती रहता है, अतः प्रत्येक कोण इसका सममिति कोण होता है।

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