कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 2, मौसम को समझना: यह अध्याय वायुमंडल की संरचना, मौसम की परिभाषा तथा तापमान, वर्षा, वायुमंडलीय दाब, पवन और आर्द्रता जैसे तत्वों के मापन का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है । इसमें चेन्नई के कृष्णन और कश्मीर के आमिर के संवाद, लद्दाख के खरदुंग-ला दर्रे, तथा वर्षामापी, एनीमोमीटर और चीड़ के शंकु जैसे प्राकृतिक घटकों का उल्लेख किया गया है ।
कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 2 (मौसम को समझना): मुख्य बिंदु
मौसम और इसके तत्व क्षोभमंडल पृथ्वी की सतह से 6 से 18 किलोमीटर तक विस्तृत है जहाँ सभी मौसमी घटनाएँ घटित होती हैं । चींटियों द्वारा अंडों को ऊँचे स्थानों पर ले जाना और चीड़ के शंकुओं का बंद होना वर्षा के प्राकृतिक संकेत हैं ।
तापमान और वर्षा मापन भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना 1875 में हुई थी जिसका आदर्श वाक्य ‘आदित्यात् जायते वृष्टिः’ मनुस्मृति से लिया गया है । वर्षा की मात्रा मापने के लिए बेलनाकार नली वाले वर्षामापी (रेन गेज) का उपयोग किया जाता है जहाँ 5 मिमी गहराई का अर्थ 5 मिमी वर्षा होना है ।
वायुमंडलीय दाब और पवन समुद्र तट पर सामान्य वायुमंडलीय दाब लगभग 1013 मिलीबार होता है, जबकि लद्दाख के खरदुंग-ला (5600 मीटर ऊँचाई) में यह घटकर लगभग 650 मिलीबार रह जाता है । वायुयान चालकों के लिए उड़ानों के समय पवन की गति और दिशा जानने हेतु वात शंकु तथा एनीमोमीटर का प्रयोग किया जाता है ।
आर्द्रता और मौसम केंद्र आर्द्रता को हाइग्रोमीटर यंत्र द्वारा मापा जाता है, जहाँ शुष्क मौसम में सापेक्षिक आर्द्रता 20% से 40% तथा आर्द्र मौसम में 60% से 80% होती है । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वर्ष 2023 में सिक्किम की एक हिम-झील पर 4800 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किया ।
अध्याय 2 के अभ्यास
- विद्यार्थी बोतल और कीप की सहायता से स्वयं वर्षामापी यंत्र बनाकर एक महीने तक प्रतिदिन वर्षा की मात्रा का मापन दर्ज करते हैं ।
- विद्यार्थी मौसम के विभिन्न तत्वों जैसे तापमान, आर्द्रता, वायुदाब, पवन और वर्षा का उन्हें मापने वाले सही उपकरणों के साथ मिलान करते हैं ।
- विद्यार्थी अपने समूह में चर्चा करके विद्यालय परिसर में वर्षामापी स्थापित करने हेतु सबसे उपयुक्त खुले स्थान का चयन करते हैं और अपने निर्णय के कारण लिखते हैं ।
कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 2 के प्रश्न-उत्तर (हल)
प्रश्न 1. यहाँ मध्य प्रदेश में एक नगर के तापमान को एक तालिका द्वारा प्रस्तुत किया गया है। सप्ताह में अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना है? ताप सीमा (रेंज) का आकलन कीजिए।
उत्तर: सप्ताह का अधिकतम तापमान = 32°C (दिनांक 03.03.2025)
सप्ताह का न्यूनतम तापमान = 14°C (दिनांक 05.03.2025)
ताप सीमा (रेंज) = अधिकतम तापमान – न्यूनतम तापमान = 32°C – 14°C = 18°C।
प्रश्न 2. यदि दिल्ली में आर्द्रता 52 प्रतिशत और कोच्चि में 84 प्रतिशत हो, तो दोनों स्थानों में से कहाँ गीले कपड़ों के जल्दी सूखने की संभावना है? यदि दोनों स्थानों पर तापमान समान है, तो कहाँ आपको अधिक पसीना आने की संभावना है?
उत्तर: दिल्ली में आर्द्रता कम (52%) होने के कारण वहाँ गीले कपड़े जल्दी सूखेंगे
कोच्चि में आर्द्रता अधिक (84%) होने के कारण वहाँ अधिक पसीना आने की संभावना है क्योंकि उच्च आर्द्रता में वाष्पीकरण धीमा होता है।
प्रश्न 3. सूर्य से वर्षा क्यों होती है? क्या आप इसका कारण सोच सकते हैं?
उत्तर: सूर्य की ऊष्मा से नदियों, समुद्रों व अन्य जलाशयों का जल वाष्पीकृत होकर जलवाष्प के रूप में ऊपर उठता है और ठंडा होकर बादलों का निर्माण करता है, जिससे संघनन के पश्चात वर्षा होती है।
प्रश्न 4. मौसम के तत्वों का उनको मापने वाले उपकरणों के साथ मिलान कीजिए। प्रयुक्त उपकरण: (1) आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर), (2) पवन वेगमापी (एनीमोमीटर), (3) वायुदाबमापी (बैरोमीटर), (4) तापमापी (थर्मामीटर), (5) वर्षामापी (रेन गेज) || मौसम के तत्व: (क) बर्षण (प्रेसिपिटेशन), (ख) वायुमंडलीय दबाव, (ग) वायु की दिशा और गति, (घ) आर्द्रता, (ङ) तापमान
उत्तर: (1) आर्द्रतामापी – (घ) आर्द्रता
(2) पवन वेगमापी – (ग) वायु की दिशा और गति
(3) वायुदाबमापी – (ख) वायुमंडलीय दबाव
(4) तापमापी – (ङ) तापमान
(5) वर्षामापी – (क) बर्षण (प्रेसिपिटेशन)।
प्रश्न 5. ज्योत्स्ना यह सोच रही है कि जून में मुंबई में अपनी विद्यालय यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह मौसम के पूर्वानुमान को देखती है, जो 29 डिग्री सेल्सियस और 84 प्रतिशत आर्द्रता की भविष्यवाणी करता है। आप उसको क्या सलाह देंगे?
उत्तर: मुंबई में 29°C तापमान और 84% की उच्च आर्द्रता के कारण वातावरण काफी नम और उमस भरा होगा
इसलिए ज्योत्स्ना को हल्के, ढीले और सूती कपड़े साथ ले जाने की सलाह दी जाएगी जो पसीना सोख सकें।
प्रश्न 6. कल्पना कीजिए कि आपका एक छोटा समूह वर्षामापी यंत्र स्थापित कर रहा है। यहाँ उसे स्थापित करने के स्थान के कुछ विकल्प दिए गए हैं— 1. विद्यालय का सब्जी उद्यान 2. विद्यालय भवन की छत 3. ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान 4. विद्यालय परिसर की दीवार 5. विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा। अपने समूह के साथ चर्चा कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त स्थान का निर्धारण कीजिए। अपने निर्णय के कारणों को लिखिए।
उत्तर: सर्वाधिक उपयुक्त स्थान '3. ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान' है
कारण: यह स्थान पेड़-पौधों और भवनों जैसी रुकावटों से दूर है जिससे वर्षा जल सीधे वर्षामापी में एकत्र होगा, तथा ऊँचा चबूतरा इसे नीचे बहते पानी व झोंकों से सुरक्षित रखेगा।
प्रश्न 7. यदि यह समाचार मिलता है कि किसी स्थान विशेष पर 30 मि.मी. वर्षा हुई, तो इसका क्या तात्पर्य है? वर्षा को कैसे मापा जाता है?
उत्तर: इसका तात्पर्य है कि यदि वर्षा का जल बहकर न जाए या वाष्पित न हो, तो समतल भूमि पर एकत्र हुए वर्षा जल की गहराई 30 मि.मी. होगी
वर्षा की मात्रा को मापने के लिए वर्षामापी (रेन गेज) नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 8. कोच्चि और जयपुर में कहाँ अधिक आर्द्रता होने की संभावना है और क्यों?
उत्तर: कोच्चि में जयपुर की तुलना में अधिक आर्द्रता होने की संभावना है
इसका कारण यह है कि कोच्चि समुद्र तट के निकट स्थित है जहाँ जल निकायों से वाष्पीकरण के कारण वायु में जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है।
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FAQ
क्षोभमंडल (Troposphere) क्या है और इसकी ऊँचाई कितनी होती है?
क्षोभमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे निचली परत है जो सतह से 6 से 18 किलोमीटर तक विस्तृत है । इसी परत में सभी प्राणी निवास करते हैं तथा वर्षा व तूफान जैसी मौसमी घटनाएँ घटित होती हैं ।
ऊँचाई वाले स्थानों जैसे खरदुंग-ला पर जाने पर सांस फूलने का क्या कारण है?
अधिक ऊँचाई पर जाने पर वायु हल्की हो जाती है और वायुमंडलीय दाब घटकर लगभग 650 मिलीबार रह जाता है । इसके कारण रक्त को कम ऑक्सीजन मिलती है और शरीर को गतिशील रखने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है ।
पवन की गति और दिशा मापने के लिए किन उपकरणों का उपयोग किया जाता है?
पवन की दिशा मापने के लिए वात दिग्दर्शक (विंड वेन या विंड सॉक) का उपयोग किया जाता है । वहीं पवन की गति को किलोमीटर प्रति घंटा में मापने के लिए घूमते हुए धातुओं के प्यालों वाले पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) का उपयोग होता है ।
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