कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 5, साम्राज्यों का उदय: यह अध्याय छठी शताब्दी सा.सं.पू. से दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. तक मगध और मौर्य साम्राज्य के उदय, शासन व्यवस्था, व्यापारिक श्रेणियों, स्थापत्य कला तथा सम्राट अशोक के धम्म का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें भविष्या और ध्रुव द्वारा ‘इतिहास’ नामक काल-यंत्र से पाटलिपुत्र की यात्रा, लोहार की पुत्री इरा से बातचीत, कौटिल्य के ‘सप्तांग सिद्धांत’, पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ तथा सारनाथ के सिंह शीर्ष का वर्णन किया गया है।
कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 5 (साम्राज्यों का उदय): मुख्य बिंदु
व्यापार, व्यापारिक मार्ग तथा श्रेणियाँ दूरस्थ क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के संचालन हेतु आर्थिक सामर्थ्य की आवश्यकता होती थी, जिसके लिए शासकों ने व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण स्थापित किया। व्यापार को संगठित करने के लिए व्यापारियों व शिल्पकारों की ‘श्रेणियाँ’ (गिल्ड्स) विकसित हुईं तथा उत्तरापथ और दक्षिणापथ जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों के माध्यम से चीन के रेशमी वस्त्रों और दक्षिण भारत के मसालों का व्यापार होता था।
मगध का उदय और मौर्य साम्राज्य मगध साम्राज्य गंगा और सोन नदियों के उपजाऊ मैदानों में स्थित था जहाँ प्रचुर इमारती लकड़ी, हाथी तथा पास के पर्वतीय क्षेत्रों से लौह अयस्क प्राप्त होता था। आचार्य कौटिल्य के मार्गदर्शन में चंद्रगुप्त मौर्य ने अलोकप्रिय नंद शासक धनानंद को हराकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की तथा ग्रीक राजदूत मैगस्थनीज का स्वागत किया जिसने ‘इंडिका’ पुस्तक लिखी।
कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत और राज्य व्यवस्था कौटिल्य ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘अर्थशास्त्र’ में राज्य के संचालन हेतु सप्तांग सिद्धांत दिया जिसके सात अंग स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र हैं। उत्तर प्रदेश के सोहगौरा से प्राप्त चतुर्थ-तृतीय शताब्दी सा.सं.पू. के ताम्रपत्र अभिलेख में अकाल व संकट के समय खाद्य सुरक्षा हेतु अन्नागार की स्थापना का साक्ष्य मिलता है।
शांति का चयन करने वाला राजा अशोक और धम्म कलिंग (आधुनिक ओडिशा) युद्ध में हुए भारी विनाश और मौतों को देखकर सम्राट अशोक ने हिंसा त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाया और श्रीलंका व मध्य एशिया में अपने दूत भेजे। उन्होंने प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में चट्टानों व स्तंभों पर शिलालेख उत्कीर्ण करवाए तथा धम्म के प्रचार एवं पशु-पक्षियों के संरक्षण व चिकित्सा के निर्देश दिए।
अध्याय 5 के अभ्यास
- विद्यार्थी कक्षा 6 के ‘भारत की सांस्कृतिक जड़ें’ अध्याय का पुनरावलोकन करके बुद्ध और महावीर की शिक्षाओं को पुनः पढ़ते हैं।
- विद्यार्थी व्यापारिक मार्गों के मानचित्र का अवलोकन करके यात्रा में सहायक भौगोलिक विशेषताओं और परिवहन के साधनों की पहचान करते हैं।
- विद्यार्थी ब्राह्मी लिपि के विषय में जानकारी एकत्र करके एक लघु कार्य परियोजना बनाते हैं तथा अपनी सीखी गई बातें उसमें संलग्न करते हैं।
कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 5 के प्रश्न-उत्तर (हल)
प्रश्न 1. साम्राज्य की विशेषताएं क्या हैं और यह राज्य से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: साम्राज्य अनेक राज्यों या विस्तृत भूभागों को मिलाकर बना एक बहुत विशाल क्षेत्र होता है जिसमें विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग रहते हैं
साम्राज्य का आकार राज्य की तुलना में बहुत बड़ा होता है तथा इसके संचालन हेतु सुदृढ़ सैन्य बल, व्यापक कर-संग्रह प्रणाली और विशाल प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 2. राज्यों से साम्राज्यों में परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण कारक क्या हैं?
उत्तर: विशाल साम्राज्यों के गठन में संगठित व प्रशिक्षित सेना, कृषि अधिशेष, लौह अयस्क जैसे समृद्ध संसाधन, नदियों तथा व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण और कर-राजस्व में वृद्धि महत्वपूर्ण कारक रहे हैं
इसके अतिरिक्त कुशल नेतृत्व तथा पड़ोसी क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने की महत्वाकांक्षा ने भी इस परिवर्तन में योगदान दिया।
प्रश्न 3. प्रारंभिक भारतीय इतिहास में मौर्य वंश को महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
उत्तर: मौर्य वंश ने भारतीय इतिहास में प्रथम बार एक अत्यंत विशाल तथा संगठित साम्राज्य की स्थापना की, जो उत्तर में मैदानी भागों से लेकर दक्षिण के पठार तक फैला था
मौर्यों ने प्रशासनिक प्रणाली को सुदृढ़ किया, व्यापारिक मार्गों व आहत सिक्कों को बढ़ावा दिया, और सम्राट अशोक ने धम्म, लोक-कल्याण तथा कला-वास्तुकला को अभूतपूर्व प्रोत्साहन दिया।
प्रश्न 4. कौटिल्य के कुछ प्रमुख विचार क्या थे?
उत्तर: कौटिल्य ने अपनी पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में राज्य संचालन के लिए सप्तांग सिद्धांत (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र) प्रस्तुत किया
उन्होंने यह विचार भी दिया कि राजा की प्रसन्नता उसकी प्रजा की भलाई में निहित है और राज्य को ग्रामीण विकास, जल-संरक्षण तथा भ्रष्टाचार निवारण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न 5. अशोक के शिलालेखों को पढ़ने के उपरांत, क्या आपको लगता है कि वे अन्य धार्मिक विश्वासों के प्रति सहिष्णु थे?
उत्तर: हाँ, अशोक के शिलालेखों से स्पष्ट होता है कि वे सभी संप्रदायों के प्रति पूर्णतः सहिष्णु थे
उन्होंने अपने धम्माधिकारियों को बौद्ध संघ के साथ-साथ ब्राह्मणों, आजीवकों और जैनों सहित सभी संप्रदायों के सदस्यों के कल्याण हेतु नियुक्त किया था।
प्रश्न 6. पाणिनि की 'अष्टाध्यायी' की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: लगभग 5वीं शताब्दी सा.सं.पू. में रचित 'अष्टाध्यायी' प्रसिद्ध संस्कृत व्याकरण ग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य पाणिनि ने की थी
इसमें 3996 सूत्रों के माध्यम से संस्कृत भाषा और व्याकरण के नियमों को अत्यंत संक्षिप्त व सुव्यवस्थित रूप से संकलित किया गया है।
प्रश्न 7. मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने और किसकी सहायता से की थी?
उत्तर: मौर्य साम्राज्य की स्थापना लगभग 321 सा.सं.पू. में चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी
उन्होंने अपने योग्य और कुशल मार्गदर्शक आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) की कूटनीतिक सलाह और मार्गदर्शन से अलोकप्रिय नंद शासक धनानंद को हराकर इस साम्राज्य की नींव रखी।
प्रश्न 8. मैगस्थनीज़ कौन था और उसने भारत के विषय में किस पुस्तक में लिखा?
उत्तर: मैगस्थनीज़ एक ग्रीक राजदूत और इतिहासकार था जिसे यूनानी शासक द्वारा चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में पाटलिपुत्र भेजा गया था
उसने भारत की अपनी यात्राओं और पाटलिपुत्र के जनजीवन का विवरण 'इंडिका' नामक प्रसिद्ध पुस्तक में लिखा।
प्रश्न 9. कौटिल्य के 'सप्तांग सिद्धांत' के सात अंग कौन-कौन से हैं?
उत्तर: कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत के अनुसार राज्य सात अंगों से मिलकर बना है— स्वामी (राजा), अमात्य (मंत्री व अधिकारी), जनपद (क्षेत्र व जनसंख्या), दुर्ग (किलेबंद नगर), कोष (राजकोष), दंड (सेना व कानून-व्यवस्था) तथा मित्र (सहयोगी राज्य)।
प्रश्न 10. सम्राट अशोक ने किस युद्ध के बाद हिंसा का त्याग किया और उन्होंने जनसामान्य तक अपने संदेश पहुँचाने के लिए क्या किया?
उत्तर: कलिंग (आधुनिक ओडिशा) के भीषण युद्ध में हुए भयानक विनाश और मौतों को देखकर अशोक ने हिंसा का त्याग कर अहिंसा और धम्म का मार्ग अपनाया
जनसामान्य तक अपने संदेश पहुँचाने के लिए उन्होंने लोकप्रिय प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में चट्टानों व स्तंभों पर शिलालेख उत्कीर्ण करवाए।
प्रश्न 11. अशोक के शिलालेखों में उनके लिए किन उपाधियों का प्रयोग किया गया है और उनका क्या अर्थ है?
उत्तर: अशोक के शिलालेखों में उन्हें 'देवानामप्रिय' और 'प्रियदसी' (प्रियदर्शी) कहा गया है
'देवानामप्रिय' का अर्थ 'देवताओं का प्रिय' तथा 'प्रियदसी' का अर्थ 'दूसरों के प्रति दयालुता से व्यवहार करने वाला' है।
प्रश्न 12. सारनाथ स्तंभ के शीर्ष भाग की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ का शीर्ष भाग अत्यधिक पॉलिश किए गए चमकदार पत्थर से निर्मित मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिस पर चार सिंह पीठ सटाकर बैठे हैं
यही सिंह शीर्ष वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) है और इसके नीचे धर्मचक्र अंकित है।
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FAQ
कौटिल्य का ‘सप्तांग सिद्धांत’ क्या है और इसके कौन-कौन से सात अंग हैं?
कौटिल्य के अनुसार राज्य सात अंगों से निर्मित होता है, जो स्वामी (राजा), अमात्य (मंत्री व उच्च अधिकारी), जनपद (जनसंख्या व क्षेत्र), दुर्ग (किलेबंद नगर), कोष (राजकोष), दंड (सेना व कानून) और मित्र (सहयोगी) हैं।
मगध साम्राज्य के विस्तार में लौह अयस्क और प्राकृतिक संसाधनों का क्या योगदान था?
मगध के पास स्थित पर्वतीय क्षेत्रों से प्राप्त लौह अयस्क से मजबूत कृषि उपकरण (जैसे लोहे के हल) और हल्के व तेज धार वाले शस्त्र बनाए गए, जिससे कृषि उत्पादन और सेना की युद्ध क्षमता में तीव्र वृद्धि हुई।
सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद क्या बदलाव किए और अपने संदेश कैसे फैलाए?
कलिंग युद्ध के भीषण विनाश के बाद अशोक ने युद्ध का त्याग कर अहिंसा और धम्म का मार्ग अपनाया तथा जनसामान्य तक अपने संदेश पहुँचाने के लिए ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में शिलालेख उत्कीर्ण करवाए।
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