Class 7 Social Science Chapter 8 in Hindi PDF: भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं? (समाज का अध्ययन)

कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 8, भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं?: यह अध्याय भारत और विश्व के विभिन्न पावन भौगोलिक क्षेत्रों, तीर्थयात्राओं, पवित्र नदियों, पर्वतों तथा पावन निकुंजों (सैक्रिड ग्रोव्स) की परंपरा और उनके संरक्षण का अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें इतिहासकार धर्मपाल द्वारा वर्णित 12 तीर्थयात्रियों की रामेश्वरम व हरिद्वार यात्रा, बोधगया के बोधिवृक्ष, प्रयागराज कुंभ मेले, माता सती से जुड़ी शक्तिपीठों तथा ओडिशा की डोंगरिया खोंड जनजाति के नियमगिरि पर्वत का उल्लेख किया गया है।

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कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 8 (भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं?): मुख्य बिंदु

पावनता और तीर्थयात्राएँ बौद्ध धर्म में बोधगया (जहाँ प्रतिवर्ष 40 लाख से अधिक यात्री आते हैं) तथा सिख धर्म में तख्त श्री पटना साहिब और अमृतसर का अकाल तख्त प्रमुख पावन स्थल हैं। इतिहासकार धर्मपाल के वृत्तांत में लखनऊ के दो गाँवों से आए 12 तीर्थयात्री मिट्टी के पात्रों व घी-आटा की गठरियों के साथ रामेश्वरम से हरिद्वार की यात्रा करते चित्रित किए गए हैं।

पावन भूगोल और पावन पारिस्थितिकी संपूर्ण भारत में 4 धाम, 12 ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठ फैले हैं जिनकी उत्पत्ति सती के देहावसान और भगवान विष्णु द्वारा चक्र से उनके शरीर के विभाजन से जुड़ी है। इसके अतिरिक्त ऋग्वेद के ‘नदी-स्तुति सूक्त’ में 19 नदियों का आह्वान है तथा प्रयागराज संगम पर आयोजित कुंभ मेले में 2025 में लगभग 66 करोड़ लोगों ने भाग लिया।

पर्वत, वृक्ष और पावन निकुंज ओडिशा की डोंगरिया खोंड जनजाति नियमगिरि पहाड़ी को ‘नियम राजा’ का निवास मानकर वृक्ष काटने पर प्रतिबंध लगाती है तथा पीपल (फाइकस रिलिजियोसा) का उल्लेख मोहनजोदड़ों की मुहरों में भी मिलता है। मेघालय में ‘का केशा’ या ‘बासा’, राजस्थान में ‘ओरण’ और केरल में ‘कावू’ जैसे पावन निकुंजों में जैव-विविधता व जलाशयों का संरक्षण किया जाता है।

तीर्थयात्रा से व्यापार तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्राचीन काल में उत्तरापथ और दक्षिणापथ जैसे व्यापारिक व तीर्थ मार्गों से कपास, मसाले, चंदन, मोती और हीरों का व्यापार होता था। वहीं न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय द्वारा तारानकी माउंगा पर्वत को पूर्वज मानकर कानूनी अधिकार दिलाने की तरह आज वैश्विक स्तर पर पावन भूगोल के संरक्षण और सतत विकास पर बल दिया जा रहा है।

अध्याय 8 के अभ्यास

  • विद्यार्थी पारदर्शी ट्रेसिंग पेपर पर प्राचीन व्यापारिक मार्गों का नक्शा बनाकर उसे प्रमुख तीर्थस्थलों के मानचित्र पर रखकर दोनों के अंतर्संबंधों का अवलोकन करते हैं।
  • विद्यार्थी पर्यावरणविद डेविड सुजुकी के कथन पर समूह में चर्चा करके प्रकृति, नदियों और पर्वतों के प्रति मानवीय व्यवहार के प्रभाव का विश्लेषण करते हैं।
  • विद्यार्थी अपने क्षेत्र के पावन स्थलों की सूची बनाकर परिवार व समुदाय के वरिष्ठ लोगों से जानकारी एकत्र करते हैं तथा 150 शब्दों में एक संक्षिप्त लेख लिखते हैं।

कक्षा 7 समाज का अध्ययन अध्याय 8 के प्रश्न-उत्तर (हल)

प्रश्न 1. 'पावनता' क्या है?
उत्तर: पावनता का तात्पर्य उन समस्त धार्मिक एवं आध्यात्मिक भावों से है जो पावन, दिव्य तथा आदर एवं श्रद्धा के योग्य हों
यह केवल धर्म या आध्यात्मिकता से ही नहीं, बल्कि निश्चित भूभाग, विशेष यात्राओं (तीर्थयात्रा) तथा सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ी होती है।

प्रश्न 2. भूमि कैसे पावन हो जाती है?
उत्तर: जब किसी स्थान या भूमि का संबंध किसी दिव्य घटना, पावन स्मृति, आध्यात्मिक व्यक्ति, संत के पावन अवशेषों, प्राकृतिक आकृति (पर्वत, नदी, वन) या धार्मिक आस्थाओं से जुड़ जाता है, तो वह भूमि पावन मानी जाने लगती है।

प्रश्न 3. पावन भूगोल ने भारतीय उपमहाद्वीप के सांस्कृतिक एकीकरण में किस प्रकार की भूमिका निभाई है?
उत्तर: संपूर्ण भारत में फैले चार धाम, 12 ज्योतिर्लिंग, 51 शक्तिपीठ तथा विविध धर्मों के पावन स्थल एक अंतर्संबंधित संजाल (नेटवर्क) बनाते हैं
इन पावन स्थानों की यात्राओं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के लोगों, भाषाओं, विचारों, रीति-रिवाजों और अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ, जिसने संपूर्ण उपमहाद्वीप को एक साझा सांस्कृतिक पहचान में पिरोया।

प्रश्न 4. तीर्थयात्राएँ किस प्रकार दोहरा महत्व रखती हैं?
उत्तर: तीर्थयात्राएँ व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक व व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास को पोषित करती हैं
इसके साथ-साथ वे दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़कर व्यापार, परिसंचरण तथा अखिल भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण के सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य को भी समर्थन देती हैं।

प्रश्न 5. लोग तीर्थ या अन्य पावन स्थानों की यात्रा क्यों करते हैं?
उत्तर: लोग धार्मिक व आध्यात्मिक पुण्य लाभ, दिव्य शक्ति से जुड़ने, मन्नत पूरी करने, तथा मानसिक शांति एवं व्यक्तिगत व आध्यात्मिक विकास प्राप्त करने के लिए तीर्थयात्रा करते हैं
इसके अतिरिक्त कुछ लोग व्यापार, विचार-विमर्श, शिक्षा तथा नए अनुभवों को साझा करने के लिए भी इन स्थानों की यात्रा करते हैं।

प्रश्न 6. आपके विचार में प्राकृतिक तत्व, जैसे – नदी, पर्वत और वन आदि लोगों के लिए पावन क्यों माने जाते हैं? वे हमारे जीवन में किस प्रकार योगदान देते हैं?
उत्तर: भारतीय संस्कृति में प्रकृति के कण-कण में दैवीय उपस्थिति (भूदेवी/पृथ्वी माता) मानी जाती है, जिससे नदियाँ जीवनदायिनी, पर्वत दिव्य शक्ति के प्रतीक और वन (पावन निकुंज) देवताओं के निवास माने जाते हैं
ये तत्व हमें जल, शुद्ध वायु, औषधियाँ, जैव-विविधता संरक्षण तथा आध्यात्मिक शांति प्रदान करके हमारे जीवन को बनाए रखते हैं।

प्रश्न 7. प्राचीन तीर्थयात्रा मार्गों ने उस समय किस प्रकार व्यापार को प्रोत्साहित किया? आपके अनुसार ये पावन स्थान उन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक बने?
उत्तर: तीर्थयात्रियों की भोजन, वस्त्र व ठहराव जैसी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यापारी उनके साथ यात्रा करते थे जिससे उत्तरापथ और दक्षिणापथ जैसे तीर्थ व व्यापारिक मार्ग आपस में जुड़ गए
पावन स्थानों पर लगने वाले मेलों व यात्रियों की आवाजाही से स्थानीय वस्तुओं, हस्तशिल्प और सेवाओं की बिक्री बढ़ी जिसने उन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 8. पावन स्थान किस प्रकार वहाँ के लोगों की संस्कृति और परंपरा को प्रभावित करते हैं?
उत्तर: पावन स्थान स्थानीय गाथाओं, रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, त्योहारों और वेशभूषा को जन्म देते हैं
उदाहरण के लिए, वे प्राकृतिक संसाधनों (जैसे वृक्षों, तालाबों व पशु-पक्षियों) के संरक्षण के नियम तय करते हैं और समुदाय में परस्पर विश्वास व सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाते हैं।

प्रश्न 9. लगभग 66 करोड़ लोगों ने 2025 के कुंभ मेले में भाग लिया था। भारत की पूरी जनसंख्या का यह कितना अनुपात है?
उत्तर: भारत की कुल जनसंख्या लगभग 140 करोड़ मानते हुए
अनुपात = 66 करोड़ ÷ 140 करोड़ = 66/140 = 33/70 ≈ 0.4714
प्रतिशत = 0.4714 × 100 ≈ 47.14% (अर्थात भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 47% या लगभग आधा भाग)।

प्रश्न 10. ऋग्वेद का 'नदी-स्तुति सूक्त' प्राचीन भारत की कितनी नदियों का आह्वान करता है?
उत्तर: ऋग्वेद का 'नदी-स्तुति सूक्त' प्राचीन भारत के उत्तर-पश्चिम की 19 प्रमुख नदियों की प्रशंसा एवं आह्वान करता है।

प्रश्न 11. ओडिशा की डोंगरिया खोंड जनजाति के लिए कौन-सी पहाड़ी पावन है और वे इसे किसका निवास मानते हैं?
उत्तर: डोंगरिया खोंड जनजाति के लिए नियमगिरि शृंखला में स्थित 'नियम डोंगर' पहाड़ी पावन है
वे इस पहाड़ी को अपने सर्वोच्च देवता 'नियम राजा' का निवास स्थान मानते हैं जो उन्हें भरण-पोषण की सामग्री प्रदान करते हैं।

प्रश्न 12. 'पावन निकुंज' (Sacred Groves) क्या हैं और ये पर्यावरण संरक्षण में किस प्रकार सहायक हैं?
उत्तर: पावन निकुंज वनों के वे विशिष्ट क्षेत्र हैं जिन्हें ग्रामीण व जनजातीय समुदायों द्वारा देवताओं का निवास मानकर वृक्षों की कटाई और शिकार से सुरक्षित रखा जाता है
ये वनस्पतियों व जीवों की विशाल जैव-विविधता को आश्रय देते हैं और इनमें स्थित छोटे जलाशय जल संरक्षण में सहायता करते हैं।

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अन्य अध्याय

FAQ

कुंभ मेले की पौराणिक पृष्ठभूमि क्या है और 2025 के कुंभ में कितने लोगों ने भाग लिया था?
कुंभ मेला समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु द्वारा मोहिनी रूप में अमृत कलश ले जाते समय हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में गिरी अमृत की बूँदों से जुड़ा है। वर्ष 2025 के प्रयागराज कुंभ मेले में लगभग 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया था।

51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति से कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी है?
माता सती के आत्मदाह के पश्चात् क्रुद्ध भगवान शिव को शांत करने हेतु भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के मृत शरीर को अनेक टुकड़ों में विभाजित कर दिया था। संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठों के रूप में स्थापित हुए।

‘पावन निकुंज’ (Sacred Groves) क्या हैं और इन्हें विभिन्न राज्यों में किन क्षेत्रीय नामों से जाना जाता है?
पावन निकुंज वनों के वे विशिष्ट क्षेत्र हैं जिन्हें स्थानीय व जनजातीय समुदायों द्वारा देवताओं का निवास स्थान मानकर कटाई व शिकार से संरक्षित रखा जाता है। इन्हें केरल में ‘कावू’, मेघालय में ‘का केशा’, राजस्थान में ‘ओरण’ और झारखंड में ‘सरना’ कहा जाता है।

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