Class 4 EVS Chapter 4 in Hindi PDF: प्रकृति की गोद में (हमारा अद्भुत संसार)

कक्षा 4 हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4, प्रकृति की गोद में: यह अध्याय रीना और अमित की गाँव यात्रा पर आधारित है, जहाँ वे प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय कला और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझते हैं। इसमें पलाश के फूलों से गाँव के स्वागत, नानी द्वारा चावल के आटे व प्राकृतिक रंगों से की गई गोंड कला, नीम के तेल व प्राथमिक उपचार पेटी और सौर ऊर्जा से जगमगाते गाँव के उत्सव का वर्णन है।

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कक्षा 4 हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4 (प्रकृति की गोद में): मुख्य बिंदु

जंगल से होकर यात्रा और पलाश का पेड़ रीना और अमित अपने गाँव जा रहे थे जो जंगल के निकट स्थित था और सौर ऊर्जा से प्रकाशित होने वाला था। गाँव पहुँचते ही उन्हें नारंगी-लाल फूलों से लदा पलाश का पेड़ दिखा, जिसे ‘अग्निपुष्प या जंगल की ज्वाला’ कहा जाता है तथा गुजरात में इसे ‘केसूड़ा’ के नाम से जाना जाता है।

प्राकृतिक घर और गोंड कला रीना की नानी ने मिट्टी, घास और गोबर से बने घर की दीवारों पर चावल के आटे और पानी के घोल से सुंदर चित्रकारी की थी। नानी कपड़ों पर चित्र बनाने के लिए गेंदे के फूल, गुड़हल, चुकंदर, पत्तियों व रंगीन पत्थरों के पाउडर से तैयार प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करती थीं, जो ‘गोंड कला’ की विशेषता है।

प्राकृतिक उपचार और औषधीय पौधे दादाजी ने मच्छरों से बचाव के लिए नीम के तेल से निर्मित मिश्रण का उपयोग किया, जबकि रीना ने दवाइयों व मच्छर भगाने वाली क्रीम युक्त प्राथमिक उपचार पेटी तैयार की थी। पाठ में तुलसी की पत्तियों और अजवाइन जैसी जड़ी-बूटियों का प्रयोग स्वास्थ्य सुरक्षा एवं घरेलू प्राथमिक उपचार के लिए बताया गया है।

सौर प्रकाश उत्सव, जेणु कुरुबा और पवित्र उपवन शाम को पूरा गाँव सौर पैनलों से उत्पन्न बिजली की रोशनी से जगमगा उठा और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक नृत्य करके उत्सव मनाया। पाठ में कर्नाटक की ‘जेणु कुरुबा’ जनजाति द्वारा शहद एकत्र करते समय गाए जाने वाले गीतों तथा समुदायों द्वारा संरक्षित ‘पवित्र उपवन’ (सैक्रेड ग्रोव्स) का विशेष उल्लेख है।

अध्याय 4 के अभ्यास

  • छात्र अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले पाँच रंग-बिरंगे फूलों के स्थानीय नाम लिखते हैं और अपने पसंदीदा फूल का चित्र बनाकर रंग भरते हैं।
  • छात्र गेंदा, गुड़हल या चुकंदर को 1–2 लीटर पानी में 30 मिनट से 1 घंटे तक उबालकर प्राकृतिक रंग बनाते हैं और उससे कपड़े पर चित्रकारी करते हैं।
  • छात्र अपने औषधीय उद्यान का लेआउट बनाकर उसमें अपनी पसंदीदा जड़ी-बूटियों (जैसे तुलसी और अजवाइन) के चित्र बनाते हैं और उनके उपयोग लिखते हैं।

कक्षा 4 हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4 के प्रश्न-उत्तर (हल)

प्रश्न 1. पलाश के पेड़ को 'अग्निपुष्प या जंगल की ज्वाला' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: जब पलाश के पेड़ पर फूल खिलते हैं तो पूरा जंगल दूर से नारंगी-लाल दिखाई देता है, इसलिए पलाश को 'अग्निपुष्प या जंगल की ज्वाला' कहा जाता है।

प्रश्न 2. गेंदे के फूल, गुड़हल या चुकंदर से प्राकृतिक रंग बनाने की क्या प्रक्रिया है?
उत्तर: पौधे के भाग को लगभग 1-2 लीटर पानी में 30 मिनट से 1 घंटे तक उबालकर मिश्रण को छान लिया जाता है, जिससे केवल प्राकृतिक रंग शेष बचता है।

प्रश्न 3. 'जेणु कुरुबा' किस राज्य की जनजाति है और 'जेणु' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'जेणु कुरुबा' कर्नाटक की एक जनजाति है, जिसमें 'जेणु' शब्द का अर्थ 'शहद' होता है।

प्रश्न 4. जेणु कुरुबा जनजाति के लोग शहद इकट्ठा करते समय क्या करते हैं?
उत्तर: जब जेणु कुरुबा जनजाति के लोग मधुमक्खियों के छत्तों से शहद इकट्ठा करते हैं तो वे मधुमक्खियों से क्षमायाचना करते हुए गीत गाते हैं।

प्रश्न 5. मच्छरों के काटने से बचाव के लिए दादाजी ने किस प्राकृतिक तेल का उपयोग किया?
उत्तर: दादाजी ने मच्छरों के काटने से बचाव के लिए नीम के तेल से निर्मित मिश्रण का उपयोग किया।

प्रश्न 6. प्राथमिक उपचार पेटी में कौन-कौन सी वस्तुएँ रखनी चाहिए?
उत्तर: प्राथमिक उपचार पेटी में आवश्यक दवाइियाँ, पट्टियाँ, रोगाणुरोधक क्रीम और मच्छर भगाने वाली क्रीम जैसी वस्तुएँ रखनी चाहिए।

प्रश्न 7. किसी को चोट लगने पर प्राथमिक उपचार देना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: चोट की स्थिति को बिगड़ने से रोकने, दर्द कम करने और डॉक्टर तक पहुँचाने से पहले तुरंत राहत देने के लिए प्राथमिक उपचार देना आवश्यक है।

प्रश्न 8. 'पवित्र उपवन' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 'पवित्र उपवन' वन के वे छोटे-छोटे भाग होते हैं जिन्हें स्थानीय समुदायों द्वारा संरक्षित किया जाता है और जहाँ के पेड़ व वन्यजीव सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 9. प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों के अधिक उपयोग से संसाधनों की कमी और पर्यावरण असंतुलन होता है
उदाहरण के लिए, लकड़ियों के अधिक उपयोग से जंगल समाप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 10. हम अपने आसपास के पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण की रक्षा किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर: हम कागज़ व्यर्थ न करके, प्लास्टिक का उपयोग बंद करके, नए वृक्ष लगाकर और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाकर वातावरण की रक्षा कर सकते हैं।

कक्षा 4 अध्याय 4 PDF ऑनलाइन पढ़ें

अन्य अध्याय

FAQ

पलाश के पेड़ को ‘अग्निपुष्प’ या ‘जंगल की ज्वाला’ क्यों कहा जाता है?
जब पलाश के पेड़ पर चमकीले नारंगी-लाल रंग के फूल खिलते हैं, तो पूरा जंगल दूर से आग की लपटों जैसा दिखाई देता है। इसी कारण पलाश को ‘अग्निपुष्प’ या ‘जंगल की ज्वाला’ कहा जाता है तथा गुजरात में इसे ‘केसूड़ा’ कहते हैं।

‘गोंड कला’ क्या है और इसमें रंग कैसे तैयार किए जाते हैं?
गोंड कला दीवारों पर की जाने वाली एक पारंपरिक चित्रकला है जिसमें पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और मनुष्यों के चित्र बनाए जाते हैं। इसके लिए रंग गेंदे के फूल, गुड़हल, चुकंदर, पत्तियों, छालों तथा रंगीन पत्थरों के पाउडर जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए जाते हैं।

‘जेणु कुरुबा’ जनजाति की क्या विशेषता है और वे प्रकृति का सम्मान कैसे करते हैं?
‘जेणु कुरुबा’ कर्नाटक की एक जनजाति है, जिसमें ‘जेणु’ शब्द का अर्थ ‘शहद’ होता है। यह जनजाति मधुमक्खियों के छत्तों से शहद इकट्ठा करते समय उनसे क्षमायाचना करते हुए गीत गाती है, जो उनके प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

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