DAV Board Class 4 Hindi (भाषा माधुरी) | 100% Authentic Textbook Solutions
DAV Class 4 Hindi Chapter 13 Solutions चतुर चित्रकार (Bhasha Madhuri)
Authentic, textbook-grounded solutions for DAV Class 4 Hindi Bhasha Madhuri Chapter 13: चतुर चित्रकार (Chatur Chitrakar) composed by renowned poet रामनरेश त्रिपाठी. All textbook exercises (कविता में से), dialogue attribution (किसने किससे कहा), discussion, adjectives & verbs (भाषा की बात – विशेषण, क्रिया), and values (जीवन मूल्य) strictly adhering to the DAV Education Board curriculum.
| कक्षा (Class) | विषय (Subject) | पाठ्यपुस्तक (Textbook) | पाठ (Chapter) | विधा व कवि (Genre & Poet) |
|---|---|---|---|---|
| कक्षा 4 (Class 4) | हिंदी (Hindi) | भाषा माधुरी (Bhasha Madhuri) | पाठ 13: चतुर चित्रकार | रोचक व हास्य बाल कविता (रामनरेश त्रिपाठी) |
1. कविता का भावार्थ (Poem Summary)
‘चतुर चित्रकार’ पं. रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित एक अत्यंत लोकप्रिय, रोचक और हास्यपूर्ण कविता है। एक चित्रकार सुनसान जंगल में बैठकर प्रकृति का सुंदर चित्र बना रहा था। तभी अचानक वहाँ यमराज का मित्र अर्थात् एक भयानक, खूँखार शेर आ पहुँचा। शेर को देखकर चित्रकार के होश उड़ गए। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने शेर से बड़ी विनम्रता से कहा कि आप बैठ जाइए, मैं आपका एक सुंदर चित्र बना देता हूँ। शेर खुश होकर उकरू-मुकरू होकर बैठ गया। चित्रकार ने आगे का चित्र बनाकर शेर से कहा कि अब आप मुँह उधर घुमाइए ताकि पीछे का चित्र भी बना दूँ। जैसे ही शेर ने मुँह पीछे घुमाया, चित्रकार चुपके से खिसक कर झील किनारे खड़ी नाव में सवार हो गया और तेज़ी से नाव चलाकर दूर निकल गया। जब शेर को धोखा खाने का अहसास हुआ तो वह खिसियाकर बोला कि अपनी कलम-कागज़ तो ले जा! चित्रकार ने दूर से उत्तर दिया कि यह आप ही रखिए और जंगल में चित्रकला का अभ्यास कीजिए।
2. कठिन शब्दार्थ (Word Meanings)
| कठिन शब्द | सरल अर्थ | अंग्रेज़ी अर्थ |
|---|---|---|
| सुनसान | जहाँ कोई न हो, निर्जन स्थान | Desolate / Lonely |
| यम राजा | यमराज (मृत्यु के देवता) | God of Death |
| बटोर | इकट्ठा करके, समेटकर | Gathering / Folding |
| मूँदकर | बंद करके (आँखें मूँदना) | Closing (eyes) |
| झुँझलाहट | चिड़चिड़ाहट, खीझ | Irritation / Annoyance |
| खिसियाकर | खीझना, लज्जित होकर गुस्सा होना | Embarrassed anger |
3. पाठ्यपुस्तक अभ्यास: कविता में से (Textbook Comprehension)
1. कविता के आधार पर उत्तर दीजिए:
(क) ‘चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र। इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र।।’
• (i) चित्रकार कहाँ पर चित्र बना रहा था?
उत्तर: चित्रकार एक सुनसान (निर्जन) जगह पर चित्र बना रहा था।
• (ii) चित्रकार के सामने कौन आ गया?
उत्तर: चित्रकार के सामने यम राजा का मित्र अर्थात् एक खूँखार शेर आ गया।
(ख) ‘झील किनारे नाव लगी थी, एक रखा था बाँस। चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भरके साँस।।’
• (i) झील के किनारे क्या था?
उत्तर: झील के किनारे एक नाव बँधी थी और उसमें एक बाँस रखा था।
• (ii) चित्रकार ने नाव पकड़कर क्या किया?
उत्तर: चित्रकार ने नाव पकड़कर चैन की गहरी साँस ली और तेज़ी से नाव चलाकर शेर की पहुँच से दूर निकल गया।
2. उचित उत्तर पर सही (✓) का चिह्न लगाइए:
• (क) शेर को किसका मित्र कहा गया है?
उत्तर: यम राजा (✓)
• (ख) उकरू-मुकरू होकर कौन बैठ गया?
उत्तर: शेर (✓)
• (ग) शेर ने चित्रकार को क्या ले जाने को कहा?
उत्तर: कागज़ (और कलम) (✓)
3. नीचे दिए गए वाक्य किसने किससे कहे, लिखिए:
| वाक्य | किसने कहा | किससे कहा |
|---|---|---|
| (क) सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप। | चित्रकार ने | शेर से |
| (ख) कलम और कागज़ तो ले जा। | शेर ने | चित्रकार से |
| (ग) अब मुँह आप उधर तो करिए। | चित्रकार ने | शेर से |
4. भाषा की बात (Hindi Grammar & Vocabulary)
1. पाठ के आधार पर चित्रकार और शेर की विशेषताएँ (विशेषण) लिखिए:
• (क) चित्रकार: चतुर, बुद्धिमान, साहसी, फुर्तीला
• (ख) शेर: खूँखार, भयानक, मूर्ख, घमंडी
2. कविता में आए छह क्रिया (काम वाले) शब्द छाँटकर वर्णमाला क्रम में लिखिए:
कविता में आए क्रिया शब्द: बनाना, आना, बैठना, खिसकना, चलाना, बोलना।
वर्णमाला क्रम (Alphabetical Order):
1. आना
2. खिसकना
3. चलाना
4. बनाना
5. बोलना
6. बैठना
5. जीवन मूल्य (Values)
प्रश्न 1. चित्रकार ने हिम्मत से काम लिया और शेर से छुटकारा पाया। हिम्मत से काम लेने का क्या मतलब होता है?
उत्तर: हिम्मत से काम लेने का मतलब है – घोर संकट या भय के समय भी घबराए बिना शांत रहना और अपनी बुद्धि व विवेक का सही उपयोग करके संकट से बाहर निकलने का रास्ता खोजना।
प्रश्न 2. यदि हम हिम्मत और धैर्य से काम लें तो किसी भी मुसीबत से बच सकते हैं? कैसे?
उत्तर: हाँ, जब हम भयभीत नहीं होते तो हमारा मस्तिष्क सही निर्णय ले पाता है। धैर्य से कठिन से कठिन परिस्थिति का समाधान मिल जाता है, ठीक वैसे ही जैसे चित्रकार ने मृत्यु के मुख में भी अपनी सूझ-बूझ से जान बचा ली।