DAV Class 8 Hindi Chapter 16 एक तिनका Question Answer | Gyan Sagar Solutions

Get complete, accurate, and 100% textbook-grounded DAV Class 8 Hindi (Gyan Sagar) Chapter 16 Question Answers: एक तिनका (कविता) by Ayodhya Singh Upadhyay ‘Harioudh’. This comprehensive guide includes कविता का भावार्थ और मूल संदेश, पाठ में से (लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न), बातचीत के लिए, अनुमान और कल्पना, भाषा की बात (तुकांत शब्द, मुहावरे और वाक्य प्रयोग), and जीवन मूल्य strictly aligned with the prescribed DAV CAE syllabus.

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1. कविता का भावार्थ और मूल संदेश

कवि: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
कविता: एक तिनका

मूल पंक्तियाँ:
मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ,
एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ,
एक तिनका आँख में मेरी पड़ा॥

मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा,
लाल होकर आँख भी दुखने लगी।
मूँठ देने लोग कपड़े की लगे,
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी॥

जब किसी ढब से निकल तिनका गया,
तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिए।
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए॥

भावार्थ:
एक दिन कवि अपने घर की छत की मुंडेर पर अपने सामर्थ्य और स्थिति के घमंड में ऐंठे हुए खड़े थे। तभी अचानक हवा के झोंके के साथ दूर से उड़ता हुआ घास का एक छोटा-सा तिनका उनकी आँख में गिर गया। तिनका आँख में जाते ही कवि झिझक उठे और अत्यधिक बेचैन हो गए। उनकी आँख लाल होकर दुखने लगी। कवि की लाचारी देखकर आसपास के लोग कपड़े की पोटली (मूँठ) बनाकर उनकी आँख सेकने और तिनका निकालने का प्रयास करने लगे। जिस अहंकार पर कवि को गर्व था, वह ‘बेचारी ऐंठ’ चुपचाप दबे पाँवों भाग गई। जब विभिन्न उपायों के बाद तिनका आँख से निकल गया, तब कवि की अंतरात्मा (‘समझ’) ने उन्हें ताना मारते हुए कहा कि तू किस बात पर इतना घमंड कर रहा था? तेरा सारा अहंकार तोड़ने के लिए तो घास का एक नन्हा-सा तिनका ही पर्याप्त है।

मूल संदेश:
इस कविता का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को कभी भी अपनी शक्ति, धन या स्थिति पर घमंड नहीं करना चाहिए। संसार की सबसे छोटी से छोटी वस्तु भी मनुष्य के झूठे अहंकार को नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसलिए जीवन में सदैव विनम्रता और सहजता अपनानी चाहिए।

2. पाठ में से (लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर)

प्रश्न 1: कवि छत की मुंडेर पर किस मनोदशा में खड़ा था?
उत्तर: कवि अपनी छत की मुंडेर पर अत्यधिक घमंड और ऐंठ में भरा हुआ खड़ा था। उसे अपनी स्थिति, क्षमता और शक्ति पर व्यर्थ का गर्व था।

प्रश्न 2: आँख में तिनका पड़ने पर कवि की क्या शारीरिक स्थिति हुई?
उत्तर: आँख में तिनका पड़ते ही कवि असह्य पीड़ा से झिझक उठे और बेचैन हो गए। उनकी आँख लाल होकर दुखने लगी तथा वे स्वयं को अत्यधिक विवश और लाचार अनुभव करने लगे।

प्रश्न 3: ‘ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी’ – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि जब एक नन्हा-सा तिनका आँख में चला गया, तो कवि की सारी अकड़, घमंड और हेकड़ी पल भर में समाप्त हो गई। जो कवि स्वयं को बहुत शक्तिशाली समझ रहा था, वह एक छोटे से तिनके के सामने बेबस हो गया और उसका अहंकार चुपचाप दूर भाग गया।

प्रश्न 4: आसपास के लोगों ने कवि की सहायता किस प्रकार की?
उत्तर: आसपास के लोगों ने कपड़ा एकत्र कर उसकी पोटली (मूँठ) बनाई और कवि की दुखती हुई आँख पर लगाकर सिकाई की तथा किसी प्रकार तिनका बाहर निकालने का प्रयास किया।

प्रश्न 5: तिनका निकलने पर कवि की ‘समझ’ ने उसे क्या ताना दिया और इससे कवि को क्या सीख मिली?
उत्तर: तिनका निकलने पर कवि की अंतरात्मा या बुद्धि (‘समझ’) ने उन्हें ताना दिया: “ऐंठता तू किसलिए इतना रहा, एक तिनका है बहुत तेरे लिए॥” इससे कवि को यह सीख मिली कि मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए और संसार में किसी भी छोटी वस्तु को तुच्छ नहीं समझना चाहिए।

3. बातचीत के लिए (विचारोत्तेजक प्रश्न)

प्रश्न 1: अहंकार मनुष्य के पतन का कारण कैसे बनता है?
उत्तर: अहंकार मनुष्य के विवेक और सोचने-समझने की शक्ति को नष्ट कर देता है। अहंकारी व्यक्ति स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मानकर दूसरों को तुच्छ समझने लगता है, जिससे उसके सामाजिक संबंध बिगड़ने लगते हैं। अहंकार के कारण व्यक्ति अपनी भूलों को नहीं देख पाता और धीरे-धीरे उसका पतन निश्चित हो जाता है।

प्रश्न 2: प्रकृति की सबसे छोटी वस्तु भी हमें क्या पाठ पढ़ा सकती है?
उत्तर: प्रकृति की सबसे छोटी वस्तु भी हमें जीवन की बड़ी सीख दे सकती है। जैसे कि एक छोटा-सा तिनका मनुष्य को उसके झूठे अहंकार का अहसास करा देता है और यह सिखाता है कि संसार में कोई भी प्राणी या वस्तु उपेक्षणीय या शक्तिहीन नहीं है।

4. भाषा की बात (तुकांत शब्द, मुहावरे और वाक्य प्रयोग)

1. तुकांत शब्द (Rhyming Words):
• खड़ा – पड़ा
• दुखने लगी – दबे पाँवों भगी (लगी – भगी)
• ताने दिए – तेरे लिए (दिए – लिए)

2. मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य प्रयोग:
• ऐंठ में रहना (घमंड में रहना):
  अर्थ: अत्यधिक अहंकार या अकड़ में रहना।
  वाक्य प्रयोग: सफलता मिलने के बाद भी सज्जन व्यक्ति कभी ऐंठ में नहीं रहते।
• दबे पाँवों भागना (अहंकार का समाप्त होना):
  अर्थ: चुपचाप खिसक जाना या घमंड चूर-चूर हो जाना।
  वाक्य प्रयोग: आँख में तिनका जाते ही कवि की ऐंठ दबे पाँवों भाग गई।
• ताने देना (व्यंग्य करना):
  अर्थ: भूल का अहसास कराने के लिए व्यंग्य कसना।
  वाक्य प्रयोग: जब तिनका आँख से निकल गया, तब कवि की ‘समझ’ ने ही उन्हें ताने दिए।
• मूँठ देना (कपड़े की पोटली से सेंकना):
  अर्थ: कपड़े की तह या पोटली बनाकर आँख की सिकाई करना।
  वाक्य प्रयोग: आँख में दर्द होने पर लोगों ने कपड़े की मूँठ देकर सिकाई की।

5. जीवन मूल्य (नैतिक शिक्षा)

प्रश्न: किसी भी वस्तु अथवा प्राणी को कभी छोटा या उपेक्षणीय नहीं समझना चाहिए। जीवन में विनम्रता का क्या महत्व है?
उत्तर: जीवन में विनम्रता और सहृदयता का अत्यधिक महत्व है। विनम्रता मनुष्य का सच्चा आभूषण है, जो उसे समाज में सम्मान दिलाती है। इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि आकार या स्थिति में कोई वस्तु कितनी भी छोटी क्यों न हो, उसकी अपनी शक्ति और अस्तित्व होता है। एक छोटा-सा तिनका भी बड़े से बड़े अहंकारी व्यक्ति को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है। अतः हमें किसी को भी तुच्छ मानकर उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और सदैव अहंकार का त्याग कर विनम्रतापूर्वक जीवन बिताना चाहिए।

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