Get authentic, complete, and step-by-step DAV Class 8 Sanskrit त्रयोदशः पाठः: स्वाध्यायात् मा प्रमदः (Svadhyayat Ma Pramadah) Solutions from the prescribed DAV Board textbook सुरभि (Surbhi). All exercises including शुद्धम् / अशुद्धम्, रिक्तस्थानपूर्तिः, एकपदेन उत्तराणि, पूर्णवाक्येन उत्तराणि, प्रश्ननिर्माणम्, and व्याकरणम् are solved with clear Hindi explanation.
पाठ का सार (Chapter Summary)
यह पाठ तैत्तिरीयोपनिषद् के शीक्षावल्ली (दीक्षान्त उपदेश) से लिया गया है। प्राचीन गुरुकुलों में विद्याध्ययन पूर्ण होने पर आचार्य शिष्यों को जीवन में प्रवेश करते समय यह पावन उपदेश देते थे— “सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः।” अर्थात् सदा सत्य बोलो, धर्म के मार्ग पर चलो और स्वाध्याय (आत्म-चिन्तन व अध्ययन) में कभी आलस्य मत करो। साथ ही “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव, अतिथिदेवो भव”— माता, पिता, गुरु और अतिथि को देवता तुल्य मानकर उनका सम्मान करो।
महत्वपूर्ण शब्दार्थाः (Vocabulary & Meanings)
| संस्कृत पदम् | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
|---|---|---|
| स्वाध्यायात् | स्वयं अध्ययन करने से | From self-study |
| मा प्रमदः | प्रमाद (आलस्य) मत करो | Do not neglect / do not be heedless |
| सत्यं वद | सत्य बोलो | Speak the truth |
| धर्मं चर | धर्म का आचरण करो | Practice righteousness |
| मातृदेवो भव | माता को देवता मानने वाले बनो | Revere your mother as divine |
| अनुशासनम् | जीवन के नियम / उपदेश | Moral discipline / instruction |
अभ्यासः (Textbook Exercises)
1. पाठं पठित्वा वदन्तु लिखन्तु च ‘शुद्धम्’ अथवा ‘अशुद्धम्’-
| कथनम् | उत्तरम् |
|---|---|
| शिष्येण स्वाध्याये प्रमादः न करणीयः। | शुद्धम् |
| असत्यं वदितव्यम्। | अशुद्धम् |
| मातृदेवो भव इति उपनिषदः सन्देशः। | शुद्धम् |
| धर्मस्य आचरणं त्याज्यम्। | अशुद्धम् |
| आचार्यस्य सत्कारः करणीयः। | शुद्धम् |
2. मञ्जूषायाः उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु-
- सत्यं वद।
- धर्मं चर।
- स्वाध्यायान्मा प्रमदः।
- मातृदेवो भव।
- आचार्यदेवो भव।
3. एतेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन वदन्तु लिखन्तु च-
(i) कस्मात् न प्रमदितव्यम्?
उत्तरम्: स्वाध्यायात्
(ii) किं वक्तव्यम्?
उत्तरम्: सत्यम्
(iii) किं चरितव्यम्?
उत्तरम्: धर्मम्
(iv) एषः उपदेशः कुतः सङ्कलितः?
उत्तरम्: तैत्तिरीयोपनिषदः
(v) कः देवः भवितव्यः?
उत्तरम्: माता, पिता, आचार्यः, अतिथिः च
4. एतेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन वदन्तु लिखन्तु च-
(i) गुरुकुले अध्ययनसमाप्तौ आचार्यः शिष्यान् किं दिशति?
उत्तरम्: गुरुकुले अध्ययनसमाप्तौ आचार्यः शिष्यान् दिशति यत्— ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः, मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव च।’
(ii) ‘स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ अस्य कः आशयः?
उत्तरम्: अस्य आशयः अस्ति यत् मानवेन ज्ञानार्जने, सद्ग्रन्थानाम् अनुशीलने आत्मचिन्तने च कदापि आलस्यं प्रमादः वा न करणीयः।
(iii) तैत्तिरीयोपनिषदः दीक्षान्तोपदेशस्य समाजे का उपयोगिता अस्ति?
उत्तरम्: एषः उपदेशः मानवं सच्चरित्रं, राष्ट्रभक्तं, मातृ-पितृ-भक्तं सदाचारिणं च निर्मातुं सर्वदा मार्गदर्शकोऽस्ति।
5. स्थूलपदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु-
सत्यं वद।
प्रश्नः: किम् वद?
धर्मं चर।
प्रश्नः: किम् चर?
स्वाध्यायात् मा प्रमदः।
प्रश्नः: कस्मात् मा प्रमदः?
मातृदेवो भव।
प्रश्नः: कीदृशः भव?
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