Get authentic, complete, and step-by-step DAV Class 8 Sanskrit सप्तमः पाठः: मधुराणि वचनानि (Madhurani Vachanani) Solutions from the prescribed DAV Board textbook सुरभि (Surbhi). All exercises including शुद्धम् / अशुद्धम्, रिक्तस्थानपूर्तिः, एकपदेन उत्तराणि, पूर्णवाक्येन उत्तराणि, प्रश्ननिर्माणम्, and व्याकरणम् are solved with clear Hindi explanation.
पाठ का सार (Chapter Summary)
प्रस्तुत पाठ में मधुर वाणी, सत्यभाषण तथा सज्जनों की संगति के महत्व पर आधारित प्रेरक सुभाषित श्लोक संकलित हैं। नीति श्लोकों के अनुसार— मीठे वचन बोलने से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं, इसलिए सर्वदा प्रिय और मधुर बोलना चाहिए। सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए, परन्तु अप्रिय सत्य नहीं बोलना चाहिए और न ही प्रिय असत्य बोलना चाहिए। मधुर वाणी संसार का सबसे बड़ा वशीकरण मन्त्र है जो शत्रुओं को भी मित्र बना देता है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थाः (Vocabulary & Meanings)
| संस्कृत पदम् | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
|---|---|---|
| प्रियवाक्यप्रदानेन | मीठे वचन बोलने से | By speaking sweet words |
| तुष्यन्ति | प्रसन्न होते हैं | Become pleased / satisfied |
| जन्तवः | प्राणी / जीव | Living beings |
| दरिद्रता | कमी / निर्धनता | Poverty / shortage |
| अनृतम् | झूठ / असत्य | Falsehood / lie |
| सनातनः | सदा रहने वाला / शाश्वत | Eternal / timeless |
अभ्यासः (Textbook Exercises)
1. पाठं पठित्वा वदन्तु लिखन्तु च ‘शुद्धम्’ अथवा ‘अशुद्धम्’-
| कथनम् | उत्तरम् |
|---|---|
| प्रियवाक्येन सर्वे जन्तवः तुष्यन्ति। | शुद्धम् |
| वचने दरिद्रता कर्तव्या। | अशुद्धम् |
| अप्रियं सत्यं न ब्रूयात्। | शुद्धम् |
| प्रियम् असत्यं ब्रूयात्। | अशुद्धम् |
| मधुरभाषणं सर्वेषाम् आनन्दाय भवति। | शुद्धम् |
2. मञ्जूषायाः उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु-
- प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
- तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।
- सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
- प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः।
- मधुरवचनेन शत्रवः अपि मित्राणि भवन्ति।
3. एतेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन वदन्तु लिखन्तु च-
(i) केन सर्वे जन्तवः तुष्यन्ति?
उत्तरम्: प्रियवाक्यप्रदानेन
(ii) वचने का न कर्तव्या?
उत्तरम्: दरिद्रता
(iii) कीदृशं सत्यं न ब्रूयात्?
उत्तरम्: अप्रियम्
(iv) कीदृशं धर्मः सनातनः कथ्यते?
उत्तरम्: सत्यं प्रियं च भाषणम्
(v) मधुरभाषणं किम् अस्ति?
उत्तरम्: वशीकरणमन्त्रः
4. एतेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन वदन्तु लिखन्तु च-
(i) मानवेन कीदृशं वचनं वक्तव्यम्?
उत्तरम्: मानवेन सर्वदा प्रियं, हितकरं, मधुरं सत्यं च वचनं वक्तव्यम्।
(ii) सनातनः धर्मः कः अस्ति?
उत्तरम्: सत्यं ब्रूयात्, प्रियं ब्रूयात्, अप्रियं सत्यं न ब्रूयात्, प्रियं च असत्यं न ब्रूयात्— एषः एव सनातनः धर्मः अस्ति।
(iii) वचने दरिद्रता किमर्थं न कर्तव्या?
उत्तरम्: यतोहि मधुरवचनेन सर्वे जीवाः प्रसन्नाः भवन्ति तथा च प्रियवचने कोऽपि व्ययः न भवति, अतः वचने दरिद्रता न कर्तव्या।
5. स्थूलपदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु-
प्रियवाक्यप्रदानेन जन्तवः तुष्यन्ति।
प्रश्नः: केन जन्तवः तुष्यन्ति?
सत्यं प्रियं ब्रूयात्।
प्रश्नः: सत्यं कीदृशं ब्रूयात्?
वचने दरिद्रता न कर्तव्या।
प्रश्नः: वचने का न कर्तव्या?
एषः धर्मः सनातनः।
प्रश्नः: कः धर्मः सनातनः?
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