Get authentic, complete DAV Class 6 Hindi Chapter 13 Question Answer (अनोखी दौड़) from Gyan Sagar. In this article, you will find detailed textbook questions, comprehension solutions, value-based questions, and grammar practice as per the official DAV Board curriculum.
पाठ का परिचय (Overview)
पाठ ‘अनोखी दौड़’ एक पत्र के रूप में लिखा गया है। इसमें विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों के विद्यालय में आयोजित ‘खेल दिवस’ (Sports Day) का अत्यंत सजीव, प्रेरणादायक और संवेदनशील वर्णन किया गया है। यह पाठ हमें सिखाता है कि इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर शारीरिक सीमाओं को भी जीता जा सकता है।
पाठ में से (Textbook Question Answers)
प्रश्न 1. सिद्धार्थ अपने माता-पिता के साथ अपनी छोटी बहन के विद्यालय क्यों गया था?
उत्तर: सिद्धार्थ अपने माता-पिता के साथ अपनी छोटी बहन के विद्यालय इसलिए गया था, क्योंकि उस दिन वहाँ विद्यालय का वार्षिक ‘खेल दिवस’ (Sports Day) मनाया जा रहा था और उसकी बहन ने भी उसमें भाग लिया था।
प्रश्न 2. खेल के मैदान में कौन-सा दृश्य सबसे अधिक रोमांचित करने वाला था?
उत्तर: खेल के मैदान में दृष्टि-बाधित (नेत्रहीन) तथा अन्य दिव्यांग बच्चों की दौड़ और खेल प्रतियोगिताओं का दृश्य सबसे अधिक रोमांचित करने वाला था। उन बच्चों के चेहरे पर जीत का उल्लास और अद्भुत उत्साह देखते ही बनता था।
प्रश्न 3. दृष्टि-बाधित बच्चों की दौड़ की क्या विशेषता थी?
उत्तर: दृष्टि-बाधित बच्चों की दौड़ की यह विशेषता थी कि वे आँखों से न देख पाने के बावजूद पूरी गति से दौड़ रहे थे। उनके साथ एक-एक सहायक (गाइड/हेल्पर) था जो ध्वनि या इशारों के माध्यम से उन्हें सही दिशा का निर्देश दे रहा था ताकि वे बिना किसी बाधा के दौड़ पूरी कर सकें।
प्रश्न 4. इस आयोजन को ‘अनोखी दौड़’ क्यों कहा गया है?
उत्तर: इस आयोजन को ‘अनोखी दौड़’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यह सामान्य बच्चों की आम दौड़ से बिल्कुल अलग थी। इसमें शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद बच्चों का अदम्य साहस, परस्पर सहयोग और जीतने का संकल्प देखने योग्य था। यहाँ केवल जीतना महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि भाग लेना और हौसला दिखाना सबसे बड़ा पदक था।
बातचीत के लिए (Discussion Questions)
प्रश्न 1. इस पाठ से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: इस पाठ से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि शारीरिक दुर्बलता या दिव्यांगता कभी भी व्यक्ति के विकास और प्रगति में बाधा नहीं बन सकती। यदि मन में दृढ़ निश्चय, लगन और आत्मविश्वास हो, तो हर कठिन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
प्रश्न 2. विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर: दिव्यांग बच्चों के प्रति हमारा व्यवहार सहानुभूति और दया का नहीं, बल्कि सम्मान, समानता और प्रोत्साहन का होना चाहिए। हमें उन्हें सामान्य समाज का अंग मानते हुए उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए और उनकी मदद के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।
भाषा की बात (Grammar & Vocabulary)
1. नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द लिखिए:
- उत्साह — निरुत्साह
- सफल — असफल
- विश्वास — अविश्वास
- अनोखा — साधारण
- सक्षम — अक्षम
2. पाठ में आए उपसर्ग वाले शब्द छाँटकर अलग कीजिए:
- प्रतियोगिता: प्र (उपसर्ग) + योगिता (मूल शब्द)
- अद्भुत: अद् (उपसर्ग) + भूत (मूल शब्द)
- असमर्थ: अ (उपसर्ग) + समर्थ (मूल शब्द)
- अनुशासन: अनु (उपसर्ग) + शासन (मूल शब्द)
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