Get complete, authentic, and step-by-step DAV Class 6 Hindi Chapter 11 Question Answer तेनालीराम ने चोरों को उल्लू बनाया (Gyan Sagar & Abhyas Sagar). Here you will find chapter summary, textbook questions (पाठ में से, बातचीत के लिए, अनुमान और कल्पना, जीवन मूल्य), and complete grammar exercises (भाषा की बात) prepared according to the DAV Board curriculum.
📖 पाठ का सारांश (Chapter Summary):
प्रस्तुत पाठ ‘तेनालीराम ने चोरों को उल्लू बनाया’ में विजयनगर साम्राज्य के चतुर दरबारी तेनालीराम की सूझबूझ और बुद्धिमत्ता का मनोरंजक चित्रण है। जब चोर तेनालीराम के घर में चोरी करने की नीयत से छिपे, तब तेनालीराम ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर यह नाटक रचा कि वे अपने सारे कीमती गहने संदूक में बंद करके कुएं में छिपा रहे हैं। संदूक में भारी पत्थर भरकर कुएं में डाल दिए गए। लालची चोर रात भर संदूक निकालने के चक्कर में कुएं का सारा पानी उलीचते रहे, जिससे तेनालीराम के पूरे बगीचे की मुफ्त में सिंचाई हो गई। सुबह जब संदूक निकला और उसमें केवल पत्थर मिले, तो चोर अपनी मूर्खता पर लज्जित होकर भाग खड़े हुए। इस पाठ से सीख मिलती है कि संकट के समय बुद्धि और धैर्य से कठिन से कठिन विपत्ति को भी टाला जा सकता है।
पाठ में से (प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1. तेनालीराम को अपने घर में चोरों के छिपे होने का पता कैसे चला?
उत्तर: एक रात जब तेनालीराम भोजन करके अपने आँगन में टहल रहे थे, तभी उन्हें पिछवाड़े में झाड़ियों के पीछे से कुछ फुसफुसाहट और सरसराहट की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने ध्यान से देखा, तो उन्हें कुछ आकृतियाँ छिपती हुई दिखाई दीं। इससे तेनालीराम तुरंत समझ गए कि घर में चोर छिपे हुए हैं।
प्रश्न 2. तेनालीराम ने अपनी पत्नी से ऊँची आवाज में क्या कहा और क्यों?
उत्तर: तेनालीराम ने अपनी पत्नी से जान-बूझकर जोर की आवाज में कहा—“सुनती हो! आजकल नगर में बहुत चोरियाँ हो रही हैं। इसलिए हमें अपने सारे सोने-चाँदी के गहने और कीमती सामान इस भारी लोहे के संदूक में बंद करके पिछवाड़े वाले गहरे कुएँ में छिपा देना चाहिए।”
उन्होंने ऐसा इसलिए कहा ताकि झाड़ियों में छिपे चोर उनकी बात सुन लें और घर में घुसने के बजाय कुएँ के पीछे लग जाएँ।
प्रश्न 3. तेनालीराम और उनकी पत्नी ने कुएँ में क्या डाला?
उत्तर: तेनालीराम और उनकी पत्नी ने एक बड़े और भारी संदूक में गहनों के बदले ईंटें और बड़े-बड़े पत्थर भर दिए। इसके बाद दोनों ने मिलकर बड़े यत्न से उस संदूक को उठाकर कुएँ के गहरे पानी में धकेल दिया।
प्रश्न 4. चोर रात भर क्या करते रहे?
उत्तर: चोरों ने सोचा कि संदूक में अथाह धन-दौलत है। पानी गहरा होने के कारण वे संदूक तक नहीं पहुँच पा रहे थे। इसलिए वे रात भर बाल्टियाँ ले-लेकर कुएँ से पानी उलीचते रहे ताकि कुआँ खाली हो जाए और वे संदूक निकाल सकें।
प्रश्न 5. चोरों के परिश्रम का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: चोरों के रात भर पानी उलीचने से कुएँ का सारा पानी नालियों के रास्ते तेनालीराम के पूरे बगीचे, क्यारियों और पौधों में फैल गया, जिससे पूरे बगीचे की उत्तम सिंचाई हो गई। तेनालीराम का कई दिनों का काम मुफ्त में संपन्न हो गया।
प्रश्न 6. सुबह होने पर जब संदूक खुला, तो चोरों की क्या दशा हुई?
उत्तर: सुबह जब चोरों ने पूरी ताकत लगाकर संदूक को बाहर निकाला और बड़ी उत्सुकता से उसका ताला तोड़ा, तो उसमें सोने-चाँदी के स्थान पर सिर्फ ईंट और पत्थर देखकर उनके होश उड़ गए। तभी तेनालीराम ने बाहर आकर मुस्कुराते हुए उनका धन्यवाद किया। अपनी मूर्खता और तेनालीराम की चतुराई को देखकर चोर अत्यधिक लज्जित हुए और सिर पर पैर रखकर भाग खड़े हुए।
बातचीत के लिए
प्रश्न 1. यदि तेनालीराम चोरों को देखकर शोर मचा देते, तो क्या होता?
उत्तर: यदि तेनालीराम शोर मचाते, तो चोर या तो घबराकर भाग जाते या फिर हथियार निकालकर तेनालीराम और उनके परिवार पर जानलेवा हमला कर सकते थे। शांत रहकर बुद्धि से काम लेने के कारण जान-माल की कोई हानि नहीं हुई और चोरों को सबक भी मिल गया।
प्रश्न 2. तेनालीराम के इस व्यवहार से उनके स्वभाव की किन विशेषताओं का पता चलता है?
उत्तर: इससे पता चलता है कि तेनालीराम अत्यधिक चतुर, हाजिरजवाब, निडर और धैर्यवान व्यक्ति थे। वे कठिन और तनावपूर्ण परिस्थिति में भी घबराते नहीं थे, बल्कि अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और विनोदप्रियता (हँसी-मजाक) से समस्या का अनोखा समाधान निकाल लेते थे।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न. यदि चोरों को यह आभास हो जाता कि संदूक में केवल पत्थर हैं, तो वे क्या करते?
उत्तर: यदि चोरों को पहले ही पता चल जाता कि संदूक में केवल पत्थर हैं, तो वे कुएँ से पानी निकालने में अपना समय और श्रम व्यर्थ न करते। वे या तो सीधे घर का ताला तोड़कर डाका डालने की चेष्टा करते या फिर पकड़े जाने के भय से वहाँ से तुरंत भाग निकलते।
जीवन मूल्य
प्रश्न. “बुद्धिबल बाहुबल से श्रेष्ठ होता है।” इस कथन की पुष्टि पाठ के आधार पर कीजिए।
उत्तर: शारीरिक बल (बाहुबल) की तुलना में मानसिक क्षमता और सूझबूझ (बुद्धिबल) सदैव श्रेष्ठ सिद्ध होती है। पाठ में चोर शारीरिक रूप से हट्टे-कट्टे और बलवान थे, परंतु तेनालीराम ने बिना किसी हथियार या हाथापाई के, केवल अपनी तीव्र बुद्धि के प्रयोग से उन्हें रात भर श्रम कराया, अपने बगीचे की सिंचाई करवाई और बिना किसी नुकसान के उन्हें उल्लू बनाकर भगा दिया। यह सिद्ध करता है कि बुद्धि के आगे शारीरिक बल नतमस्तक हो जाता है।
भाषा की बात (व्याकरण एवं अभ्यास सागर)
1. निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विपरीतार्थक) शब्द लिखिए:
| मूल शब्द | विलोम शब्द |
|---|---|
| बुद्धिमान | मूर्ख |
| कीमती | सस्ती |
| रात | दिन |
| भारी | हल्का |
| विश्वास | अविश्वास |
| परिश्रम | आलस्य |
| प्रसन्न | उदास / अप्रसन्न |
| गहरा | उथला |
2. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए:
(क) उल्लू बनाना
अर्थ: मूर्ख बनाना।
वाक्य: तेनालीराम ने अपनी चतुर योजना से चोरों को आसानी से उल्लू बना दिया।
(ख) होश उड़ जाना
अर्थ: अत्यधिक घबरा जाना / दंग रह जाना।
वाक्य: संदूक में कीमती गहनों की जगह पत्थर देखकर चोरों के होश उड़ गए।
(ग) सिर पर पैर रखकर भागना
अर्थ: बहुत तेजी से भाग जाना।
वाक्य: पुलिस को आता देख जेबकतरे सिर पर पैर रखकर भाग निकले।
(घ) झांसे में आना
अर्थ: धोखे या बातों के जाल में फँसना।
वाक्य: लालची चोर तेनालीराम की बातों के झांसे में आ गए।
3. पर्यायवाची शब्द लिखिए:
- पानी: जल, नीर, वारि, तोय
- घर: गृह, सदन, आवास, निकेतन
- रात: रात्रि, निशा, रैन, यामिनी
- चोर: तस्कर, खनक, दस्यु
- बगीचा: उपवन, वाटिका, बाग, उद्यान
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